$ 0 0 items

pradeep sharma


BOOKS PUBLISHED


भारतीय पौराणिक इतिहास में दुष्यन्त और शकुन्तला की प्रेम कहानी अद्वितीय है । इस कहानी में महाराज दुष्यन्त को युवा, शक्तिशाली एवं महावीर पुरुवंशी राजा के रूप में चित्रित किया गया है । उनकी कीर्ति पृथ्वी लोक से स्वर्ग तक फैली हुई थी । स्वयं देवराज इंद्र इनके परम मित्र थे, जिनकी सहायता वो असुरों के विरुद्ध युद्ध में कई बार कर चुके थे । एक समय देवराज इन्द्र की आज्ञा से मेनका विश्वामित्र जी की तपस्या को भंग करने के लिए पृथ्वी पर आयी और अपने कार्य में सफल हुई । इस सफल कार्य के परिणति के रूप में शकुन्तला का जन्म हुआ । इन्द्र की आज्ञा से अपनी तीन माह की अबोध कन्या को वन में अकेले छोड़ कर मेनका को वापस स्वर्ग लौटना पड़ा । संयोग से महर्षि कन्व उस मार्ग से कहीं जा रहे थे, तभी उनकी नजर शकुन्त पक्षियों द्वारा संरक्षित उस अबोध बच्ची पर पड़ी । महर्षि कन्व उस अबोध कन्या को अपने आश्र...

Read More