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Tulika Srivastava

तूलिका श्रीवास्तव

जब भी कोई बात तूलिका जी के मन-मस्तिष्क को झंकझोर देती है, वह लिखने के लिए  विवश हो जाती हैं।

            गणित में स्नातकोत्तर होने के बावजूद हिंदी के प्रति इनका एक अलग ही रुझान है। लिखने का सलीका इन्हें विरासत में मिला है, पिता जी एक बेहतरीन साहित्यकार थे और इनकी माता जी भी कभी गीत, कभी कहानियाँ लिखकर हिंदी साहित्य में अपना योगदान देती रहती हैं। लेखन के अलावा इनका आर्ट और क्राफ्ट्स में विशेष रुझान है। इसी शौक के चलते तूलिका जी बहुत सी कलाकृतियाँ और हस्तशिल्प बनाती रहती हैं। संगीत में भी इनकी विशेष रुचि है। इनका मानना है कि सभी को अपनी ज़िंदगी में कुछ न कुछ रचनात्मक कार्य करते रहना चाहिए। आजकल ये हैदराबाद में रह रही हैं।

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गहराई

Books by तूलिका श्रीवास्तव “मनु”

एहसास...कैसे होते हैं ये एहसास? ज़िन्दगी बहुत से रंगों से भरी है और हर रंग में एक नया एहसास छिपा है। कुछ बेहद रंगीन...कुछ बेहद फ़ीके। ये एहसास ही हैं जो हमें ज़िन्दगी से रूबरू कराते हैं।<

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