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Raildoot / रेल दूत सम्वाद नेह का पहुँचा दो

Author Name: R K Pathak "Golden" | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

कसक नहीं, मेरे दिल में धड़कन की ही टिक टिक है,

सावन-भादो वर्षा है, आसिन में भी किच-किच है।।

मेघदूत! कैसे कह दूँ, सन्देश मेरा भी पहुँचा दो,

हाल मेरा तेरे नायक सा, उलझन मेरा सुलझा दो ।।

कालिदास के नायक से संवाद तेरा भी भारी है,

वह राजा से बंधित था, तेरी सेवा सरकारी है।।

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आर के पाठक "गोल्डेन"

रेवती कांत पाठकजी की साहित्यिक यात्रा, ध्यान और आत्म.खोज के

माध्यम से प्राप्त अंतर्दृष्टि को स्पष्ट करने की एक गंभीर खोज के साथ

शुरू हुई।उनके पहले के प्रकाशन “वैदिक धर्म के सर्वश्रेष्ठ उद्धारक

उदयनाचार्य” को मिथिलासंस्कृत शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित एक श्रेष्ठ

आधुनिक आध्यात्मिक कृति के रूप में सम्मानित किया गया है। जबकि

अंग्रेजी में लिखी गई ‘एथेरियलइन्ट्रीग’ ने एक सरल कहानी के माध्यम

से आत्मा की यात्रा के सार को वैदिक दर्शन में उल्लिखित भौतिक दुनिया

और पारलौकिक दुनिया के बीच ज्ञान प्राप्त करने वाले पाठकों के साथ

तालमेल बिठाया हैं।

रेवती कांत  पाठकजी की नवीनतम कृति, "कलियुग में गीता पुनः कहो"

श्रीमद भाागवत गीता के संस्कृत श्लोकों की काव्यात्मक हिंदी छन्दबद्ध

रचना पाठकों में काफी प्रसिद्ध हुई। इसकोआम लोगों द्वारा बड़ी सहजताा

से भजन-कीर्तन के रूप में गाया जा सकता है।

जैसे.जैसे उनकी साहित्यिक यात्रा जारी रही, रेवती कांत पाठकजी ने

पुस्तकों की एक श्रृंखला लिखी जिसमें “सात समुंदर आर-पार”, “लालभौजी”,

“स्मृतियां” और “वैदिक धर्म का सर्वश्रेष्ठ उद्धारक उदयनाचार्य” शामिल हैं।

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