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व्यास, शास्त्र और कल्कि महावतार
व्यास, शास्त्र और कल्कि महावतार
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Book Description

विषय- सूची भाग-1 : वंश एवं गोत्रमानव सभ्यता का विकास और जाति की उत्पत्तिअ. पौराणिक वंश        1. मनुर्भरत वंश की प्रियव्रत शाखा         2. मनुर्भरत वंश की उत्तानपाद शाखा  ब. ऐतिहासिक वंश        1. ब्रह्म वंश       2. सूर्य वंश         3. चन्द्र वंश  स. भविष्य के वंशगोत्रमनवन्तरभाग-2 : व्यास और शास्त्र लेखक/शास्त्राकारशास्त्रवेदव्यासलेखकों/शास्त्राकारों के आदि पुरूष प्रतीक व्यासपुराणव्यास और लव कुश सिंह “विश्वमानव”वेदव्यास शास्त्र लेखन कला“सम्पूर्ण मानक” का विकास भारतीय आध्यात्म-दर्शन का मूल और अन्तिम लक्ष्यसार्वभौम सत्य-सिद्धान्त के अनुसार काल, युग बोध एवं अवतारयुगानुसार धर्म, प्रवर्तक और धर्मशास्त्रव्यष्टि और समष्टि धर्मशास्त्रशास्त्रार्थ, शास्त्र पर होता है, शास्त्राकार से और पर नहीं भाग-3 : कल्कि अवतार काल और युग परिवर्तक कल्कि अवतारकल्कि अवतार, महाअवतार क्यों?कल्कि महाअवतार एवं अन्य स्वघोषित कल्कि अवतारकल्कि अवतार और लव कुश सिंह “विश्वमानव” भाग-4 : लव कुश सिंह “विश्वमानव” अदृश्य काल में विश्वात्मा का प्रथम जन्म - योगेश्वर श्री कृष्ण  दृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का पहला भाग - स्वामी विवेकानन्ददृश्य काल में विश्वात्मा के जन्म का अन्तिम भाग - भोगेश्वर श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“बुड्ढा कृष्ण - कृष्ण का भाग दो और अन्तिमएक ही मानव शरीर के जीवन, ज्ञान और कर्म के विभिन्न विषय क्षेत्र से मुख्य नाम भाग-5 : 2020 - मन का नवीनीकरण प्रारम्भ के पहले दिव्य-दृष्टिव्यवस्था के परिवर्तन या सत्यीकरण का पहला प्रारूप और उसकी कार्य विधिमिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारानये समाज के निर्माण का आधारसन् 2020 ई0 - मन का नवीनीकरणईश्वरीय समाज