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Behta Nirzar / बहता निर्झर Behte hue sangharshrat Jeevan ka kavya/ बहते हुए संघर्षरत जीवन का काव्य

Author Name: Prakash Chandra Ji Surana | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

"बहता निर्झर" जिसे रुकना मंजूर नहीं था। संकीर्ण और रूढ़िवादी मानसिकता का पुरजोर विरोध, अपनी खुली और उदार मत वाली सोच, निर्भीकता एवं पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना, अपने मूल्यों पर अड़िग रहते हुए जीवन में संघर्ष करने की उनकी झलक इस काव्यसंग्रह में दिखाई देती है। प्रस्तुत कविताओं को जीवन के किशोरावस्था से यौवन अवस्था के बीच अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के एक उत्तम उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।

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प्रकाश चन्द्र जी सुराणा

प्रकाश चन्द्र जी सुराणा का जन्म 27 जुलाई 1942 को हिंगोली में हुआ।  सात बहनों के इकलौते भाई, मिलनसार, हसमुख औऱ पारिवारिक प्रकृति के व्यक्ति थे। उम्र के 14 वें साल से उन्होंने कठिन आर्थिक स्थिति का हिम्मत से सामना करते हुए नासिक से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। साथ-साथ अनेक नौकरियां और व्यवसाय किए। चाहे वो स्कूल में इतिहास पढ़ाना हो, चाहे पोस्ट डिपार्टमेंट में नौकरी हो, खुद से ज्यादा उन्होंने परिवार की परिस्थितियों को प्राधान्य दिया। सही मायने में एक "बहता निर्झर " जिसे रुकना मंजूर नहीं था। संकीर्ण और रूढ़िवादी मानसिकता का पुरजोर विरोध, अपनी खुली और उदार मत वाली सोच, निर्भीकता एवं पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना, अपने मूल्यों पर अड़िग रहते हुए जीवन में संघर्ष करने की उनकी झलक इस काव्यसंग्रह में दिखाई देती है। प्रस्तुत कविताओं को जीवन के किशोरावस्था से यौवन अवस्था के बीच अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के एक उत्तम उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।

एक सफल व्यवसायी का एक संवेदनशील मन इन कविताओं में झलकता है।

अपनी शर्तों पर जीवन जीना, अपने मूल्यों से समझौता न करना और धर्म से ज्यादा कर्म पर विश्वास रखना, धार्मिक कर्म कांड और परंपरा से हट कर तार्किक और मानवता के दृष्टिकोण से जीवन अपने शर्तो पर जीने का एक निर्भीक तरीका आत्मविश्वास और आशावाद से जीवन की कठिनाइयों का सामना करना और संघर्ष में कभी नहीं डगमगाने की अपनी जीवनशैली से लोंगो को सदैव प्रेरित किया।

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