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lashkar / लश्कर

Author Name: vijay akela | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details
लश्कर इसी किताब से - जब मैं बिलकुल अकेला होता हूँ तो अकेला साहब मेरे साथ घंटों रहते हैं - बशीर बद्र विजय अकेला की शायरी उनकी अपनी तन्हाईयों की सौग़ात है - निदा फ़ाज़ली विजय अकेला अपने तर्ज़े बयान में बहुत अकेले हैं - गुलज़ार विजय अकेला की शायरी में इर्द गिर्द का माहौल दिखाई देता है - जावेद अख़्तर विजय अकेला की शायरी आज की शायरी है - शौकत कैफ़ी आज़मी उर्दू शायरी में अब ये उठान नज़र नहीं आती जो अकेला में है - कलीम आजिज़ अकेला से सुननेवाला आपने आपको बहुत आसानी से कनेक्ट कर लेता है - हसन कमाल अभी भी दुनिया से आस रखियो अभी भी होंटों पे प्यास रखियो अभी भी जीये है एक शायर विजय अकेला अज़ीमाबादी - विजय अकेला
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विजय अकेला

विजय अकेला की शायरी मौजूदा दौर की वो शायरी है जिसमें उर्दू के छंद-बंद के साथ-साथ एक आज़ाद ख़याली भी है । जभी आज उनका नाम उर्दू शायरों के बीच हैरत और इज़्ज़त के साथ लिया जाता है। अज़ीमाबाद याने पटना के रहने वाले हैं ।'कहो ना प्यार है' और 'कृष' जैसी फ़िल्मों के गीतकार भी हैं तो मुंबई और दुबई एफ़ एम के रेडियो जॉकी भी। 'लश्कर' के बाद उनके आनेवाले मजमुए का नाम है 'जिहाद'
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