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RAGINI -the school girl / रागिनी -द स्कूल गर्ल RAGINI

Author Name: Rajesh Aanand | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details
'रागिनी - द स्कूल गर्ल' 12 -13 की दो ऐसी लड़कियों की कहानी है जो अपनी छोटी सी उम्र में ही प्रेम, सेक्स और जिंदगी के सारे अनुभव को समेट लेना चाहती है। 13 वर्ष की 'रागनी' जिसे होश सँभालने से लेकर अब तक अक्सर अपने ही पिता की हवस का शिकार होना पड़ा और जिसके कारण पुरुषो को लेकर उसके अंदर झिझक और शर्म जैसे स्वाभाव कभी जन्म ही नहीं ले पाए। सेक्स जैसे सम्बन्ध उसके लिए वैसे ही थे जैसे आम लड़कियां भूख लगने पर कहीं भी खाना खा लेती हैं। हालांकि देखने में वह बहुत खूबसूरत नहीं थी मगर उसके बेपरवाह स्वाभाव ने लड़को के बीच उसे विशेष बना दिया जो दूसरी हमउम्र लड़कियों की जलन कारण बन गया। उसके साथ पढ़ने वाली लड़कियाँ उसकी तरह बनना चाहती थी, वह चाहती थीं कि रागिनी की तरह ही लड़को के बीच उन्हें भी भाव मिलना चाहिए और इसी ख्वाहिश ने उसकी खास दोस्त नीलम की जिंदगी को एक ऐसे रास्ते की तरफ मोड़ दिया जहाँ पर उसे रागिनी कभी नहीं जाने देना चाहती थी। भावनाओ, द्वन्द और एक दूसरे से आगे किसी भी हद तक निकल जाने की प्रतिस्पर्धा और उसमे चुने गए रास्ते ही इस कहानी के ऐसे धागे बन गए जिससे पाठको का निकलना मुश्किल हो जाता है । इन दोनों लड़कियों के किरदारों ने 21वी शदी के समाज से ऐसा रिश्ता कायम कर लिया है कि समझना मुश्किल हो जाता है कि आप कोई कहानी पढ़ रहे हैं या अपने आस पास हो रही घटनाओं को जीवंत देख रहें हैं।
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राजेश आनंद

राजेश आनंद का जीवन परिचय शब्दों के धागे से नहीं गढ़ा जा सकता। संवेदनाये उनके बचपन से ही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रही हैं। छोटी छोटी बातों के अभिप्राय को समझना, विश्लेषण करना उन्हें शब्दों और चित्रों के जरिये स्वर देने की चेष्ठा ने उन्हें बाल्य्काल में ही एक परिपक्व लेखक और चित्रकार बना दिया था। उनकी पहली उपन्यास गुनहगार उस समय प्रकशित हुई थी जब उनकी उम्र महज़ 17 साल की थी। लेखन के प्रति आकर्षण उनकी प्रतिभा का नहीं अपितु स्वाभाव का हिस्सा था। अमूनन जिन घटनाओ को दिनचर्या का हिस्सा समझ व्यक्ति भुला देता है उन्ही घटनाओं में वह अपनी कहानियों के क़िरदार ढूढते हैं। अब तक लिखी उपन्यासों जैसे 'गुनहगार' में उन्होंने जहाँ एक ओर एक लड़की के पिता की मजबूरियाँ और इंसान की हैवानियत का जीवंत चित्रण किया है तो 'रागिनी - द स्कूल गर्ल' में उन्होंने 12 -13 की लड़कियों के किरदारों को 21वी शदी के समाज से ऐसा रिश्ता कायम कर दिया है कि समझना मुश्किल हो जाता है कि आप कोई कहानी पढ़ रहे हैं या अपने आस पास हो रही घटनाओं को जीवंत देख रहें हैं। स्कूल की लड़कियों में लड़कों को लेकर उनके मनोभाव, आकर्षण, और असहजता के खूबसूरत चित्रण ने कहानी के जरिये लेखक की भावनाओ पर पकड़ को प्रदर्शित करता हैं। अपनी एक उपन्यास 'ग्लैमरस' में जहाँ उन्होंने प्रेम और शादी के वीभत्स रूप से पाठको को अवगत कराया तो वही अपनी दूसरी उपन्यास 'लाल ग्रह ' से उन्होंने कल्पनाओ की उड़ान को मंगल ग्रह तक लेकर चले गए। उन्होंने पृथ्वी के विखंडन से लेकर विज्ञान की दुनिया में अद्वितीय तरक्की के वावजूद प्रकति के सामने इंसान की लाचारी और दूसरे ग्रह में खुद को बसा कर जिन्दा रखने की जद्दोज़ेहद का बहुत ही खूबसूरत ख़ाका गढ़ा है। लेखक अपनी कल्पनाओ की उड़ान और कलम की धार को यहीं नहीं रोका। उन्होंने 'हिन्दू -द दंगा' उपन्यास जरिये उन्होंने धर्म में विघटित समाज पर कुठाराघात किया है। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि एक ब्राह्मण स्त्री मुस्लिम पुरुष से शादी करने के बाद कैसे एक कलंकित वस्तु में तब्दील हो जाती है जिसे न हिन्दू रखना चाहता है न मुसलमान।
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