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Rang Badalta Suraj / रंग बदलता सूरज kuchh yugon ke, kuchh yaadon ke/ कुछ युगों की, कुछ यादों की

Author Name: Dr. Prakash Raje | Format: Paperback | Genre : Biographies & Autobiographies | Other Details

यह वह समय था जब कई युग पिघलकर, नए सांचे में ढलकर, एक नए युग का निर्माण करने जा रहे थे, एक सर्वथा नया युग. 

आजादी के तुरंत बाद देश में और आम आदमी के जीवन में ऐसे परिवर्तन आ रहे थे जिनके बारे सदियों से सोचा भी नहीं गया था. 

दुनिया में एक पीढ़ी ऐसी थी, जिसे अपने जीवन काल में वे सारे परिवर्तन देखने को मिले. यह वह पीढ़ी थी जो आजादी के आस पास जन्मी, हिन्दुस्तान के गाँवों में पली, बढ़ी, पढ़ी.

प्रस्तुत है कैसे एक ही पीढ़ी को, एक ही जीवन काल में, इतने सारे परिवर्तन देखने को मिले – मानों एक अपूर्व अभिनव खगोलीय परिवर्तन हुआ हो और अनंत अन्तरिक्ष में विचरण करने वाले सूरज ने भी एकाएक अपने रंग बदल लिए हो! 

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डॉ. प्रकाश राजे 

डॉ प्रकाश राजे 
जन्म ०५ जून १९५४, जन्म एवं कर्म भूमि इंदौर.
बचपन और शिक्षा मध्य प्रदेश के गाँवों/कस्बों की अत्यंत साधारण शालाओं में.
बावजूद इस के हर प्रतियोगी परीक्षा में सफल. पीएमटी  में राज्य में पाँचवा स्थान.
बतौर कैप्टन आर्मी मेडिकल कोर में सेवा. 
प्रतिष्ठित पीजीआई चंडीगढ़ से एम डी.  
ख्यात विकृति विज्ञानी. बॉम्बे हॉस्पिटल इंदौर में कंसलटेंट रहे.
बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी. सामाजिक जीवन में  विभिन्न मंचों पर सक्रिय. अंग्रेजी पर प्रभुत्व के बावजूद भाषण और सम्भाषण में हिंदी का आग्रह. विलक्षण स्मरण शक्ति. 
भारत की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि  जिसने स्वतंत्र भारत के संधिकाल में हुए युगांतरकारी परिवर्तनों को अत्यंत निकटता से देखा और अनुभव किया. 
प्रस्तुत है उस परिवेश और परिवर्तनों से जुड़े रोचक प्रसंग और लेखक के दिलचस्प व्यक्तिगत अनुभव. साथ ही युवा पीढ़ी के लिए भानुमति का पिटारा भी!!

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