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SWAPN SANDESH / स्वप्न सन्देश सिक्के का दूसरा पहलू

Author Name: Kamlesh Jain Gundhar | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

 “यूँ न जा मुझे अकेला छोड़ कर...

लौट आ, ना जा मेरा दिल तोड़ कर...

उखड्ती साँसों को थोडा थाम ले…

पास बैठी हूँ तेरे, एक बार तो मेरा नाम ले"...

इस कहानी में कुछ ही अंश व्यक्तिगत जीवन पर आधारित है | ज्यादातर कथानक और कथावस्तु काल्पनिक हैं | ये कहानी पूर्व में प्रकाशित स्वप्न सन्देश के आगे की कहानी कहती है या यूँ कह ले की स्वप्न सन्देश पुरुष पात्र का दृष्टिकोण दिखाती थी तो ये कहानी महिला पात्र की भावनाएं और दृष्टिकोण दर्शाती है | कहानी में भावनाओं के जबरदस्त चित्रण के लिए शायरी और कविताओ का समावेश किया गया है जो कम शब्दों में बात पाठकों तक पहुंचा देती है |

कहानी में प्रेम है , विरह है, पूर्वाग्रह है तो पूर्वाभास भी है | जीवन में दो बेहद ज़रूरी विकल्पों में से किसी एक को चुनने और छोड़ने की दुविधा से उत्पन्न परेशानियाँ, दुःख और दर्द को कविताओं के माध्यम से पाठकों के दिलों में उतारने की कहानी है |

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कमलेश जैन गुणधर

कहानी के लेखक कमलेश की उम्र ज्यादा नहीं है और ये उनकी दूसरी किताब है | ये कहानी भावनाओं की अभिव्यक्ति में लिखी शायरियों और कविताओं से भरी है | लेखक को कहानी के साथ साथ शायरी लेखन में भी गहन रूचि है | इस कहानी में पिरोई गई कवितायेँ और शायरियां सिर्फ एक ही किताब पुराने लेखक के हिसाब से बहुत बेहतर है |

लेखक ने सफलता पूर्वक प्रेम और विरह की स्थितियां और उस से होने वाले दर्द और वेदना की बहुत ही बढ़िया तरीके से चित्रांकित किया है | कहानी में जो घटनाक्रम पिरोये गए है उनका वर्णन बड़ी ही बारीकी और कुशलता से किया गया है |

जिन पाठकों को प्रेम, भावनात्मकता और शयरियाँ / कवितायें पसंद है उनके लिए ये कथा उत्तम प्रस्तुति है | 

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