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Utho Jago Aur Bhramagyani Bano / उठो, जागो और ब्रह्मज्ञानी बनो शाश्वत परमानंद के लिए आत्मप्रत्यक्षीकरण जरूरी है/ Self-realization is necessary for eternal bliss

Author Name: His Holiness Dr. Kewal Krishna | Format: Paperback | Genre : BODY, MIND & SPIRIT | Other Details

· परमानंद और अनंत शांति के लिए आत्मबोध बहुत अनिवार्य है

· हमेशा अपनी मां के प्रति वफादार रहें

· अपनी मातृभूमि के प्रति वफादार रहें

· सूर्य भगवान के प्रति वफादार रहे

· अपने जीवन में हमेशा सत्य को ही अपनाएं

·  सत्य आपको ईमानदार एवं निडर बनाता है

                                                                                                                                (डॉक्टर केवल कृष्ण जी महाराज)

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ब्रह्मलीन डॉक्टर केवल कृष्ण जी महाराज

परमपूज्य डॉ केवल कृष्ण जी पूर्णतः आत्मसाक्षात्कारी संत थे  जिन्होंने 01अगस्त 1939 को जम्मू कश्मीर राज्य में रियासी कस्बे में जन्म लिया।  डॉ साहब मन, कर्म, वचन  से सदा एक रहे,। वह हमेशा कहते कि आत्मग्यान प्रत्येक मानव का जन्मसिद्ध अधिकार है और यह 5 से 10 मिनट नियमित  रूप स सुबह व शाम ओउम् का उच्चारण करने से ही संभव ह  । कोई पूजा पद्धति, यज्ञ हवन काल्पनिक भगवान यां देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना हमें कभी भी आत्मप्रत्यक्षीकरण की और नहीं ले जा सकती। आत्मसाक्षात्कार के लिए हमें भीतर की ओर लौटना होगा और अपनी आंतरिक पुस्तक को पढ़ना होगा, तभी हम अपनी वास्तविकता को जान सकते हैं।  इन्होंने सत्य को ही गुरू व मार्गदर्शक के रूप में ग्रहण करने की प्रेरणा दी। । हम सभी एक ही स्रोत से आए हैं और वह है शब्द और प्रकाश तो फिर यह मतभेद धर्म व संप्रदाययों के नाम पर क्यो?  प्रतेक मानव को अपनें में देखना और अपने जैसा ही व्यवहार करना यही तो है सच्ची अध्यात्मिकता। उन्होंने कृष्णा केंसर शोध संस्थान कुरुक्षेत्र नामक संस्थान की नीव रखी और  इसके निर्देशक रहे। 

 डॉ साहब जी ने 5 अक्तूबर 2013 में अपने भौतिक शरीर को छोड़ दिया। डॉ साहब जी के वचनों का संकलन  इस पुस्तक में संग्रह है।  जो सदा सर्वदा मानवजाति का कल्याण करते रहेंगे। वर्तमान कालखण्ड में मनुष्यता ने अपनी पवित्रता को भंग कर दिया है, वह इन दुर्लभ वचनों द्वारा अपने गौरवशाली व्यक्तित्व को पुनः पा सकता है। "स्वयं का बोध ही तो मानव का अंतिम लक्ष्य है।"

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