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'Voh' Kahan Hai? / 'वो' कहाँ है? परम-आत्मा? परम प्रश्न का अंतिम उत्तर / Paramaathma? Param Prashna ka Anthim Utthar

Author Name: Piyush 'jen' | Format: Paperback | Genre : Philosophy | Other Details

‘वो’ कहाँ है? – एक अंतहीन खोज?

धर्मों का उत्तर – ‘वो’ एक अवस्थित है बैकुंठ में, स्वर्ग में, अर्श पर, सर्वत्र, घट-घट में।

विज्ञान के उद्भव ने धर्मों का एकाधिकार समाप्त कर, इस उत्तर पर अनेकों प्रश्न-चिन्ह लगा दिये-

·         ‘एक’ शुद्धता का प्रतीक है तो फिर प्रकृति में प्रचुर विविधता का क्या स्रोत है?

·         अरबों प्रकाश-वर्ष की दूरियों तक कहीं स्वर्ग का अस्तित्व नहीं, तो ‘वो’ कहाँ है? 

·         सर्वत्र है तो स्वरूप क्या है? अरूपी है तो जगत को रूप कैसे मिला?

विज्ञान का उत्तर – शून्य- ‘बिग-बैंग’। प्रकृति स्वचलित है- नियमबद्ध। ‘वो’ है ही नहीं ढूंढोगे कहाँ?

मानव-जिज्ञासा के चलते विज्ञान का ये उत्तर भी प्रश्नों के परे नहीं-

·         अनंत-सम ऊर्जा का विस्फोट, शून्य-सम विस्तार से? स्वयं में अविश्वशनीय!

·         जगत का विस्तार हो रहा है तो क्या सीमापार नितांत निर्वात है? 

·         क्या भौतिकी के नियम अनंत निर्वात में सीमित पदार्थ की उपस्थिती को मान्यता देते हैं?

लेखक के मन्तव्य से, उत्तर सन्निकट ही है, चाहिए तीसरी, तिरछी और  तीक्ष्ण नज़र - ३त दृष्टि। 

उत्तर एक में नहीं, शून्य में भी नहीं। इस द्विअंक के द्वंद का समाधान है... जानने के लिए पढ़िये-

‘वो’ कहाँ है?

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Paperback 299

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पीयूष 'जेन'

१९६० में जन्मे, पीयूष जैन ने इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर तेल एवं प्रकृतिक गैस आयोग में अपनी सेवाएँ दी। वहाँ से स्वैछिक सेवानिवृति लेकर 1993 में उन्हो॑ने डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अपना उद्यम प्रारम्भ किया।

६० वर्षों की सूक्ष्म निरीक्षण, तर्क, भौतिकी और धर्म से जुड़ी उनकी यात्रा ने उन्हें एक तीसरी, तिरछी और तीक्ष्ण (३त) दृष्टि से जगत के अवलोकन का अवसर दिया। ३त-दृष्टि ने जगत और जीवन के अछूते और अद्वितीय आयामों से उनका साक्षात्कार कराया जिसे अब वे साझा करने हेतु परिपक्व हैं एवं तत्पर भी। 

 भगवान, अहिंसा, ब्रह्मांड, ज्योतिष, जगत-स्वरूप, कर्म आदि विषयों पर उन्हो॑ने अनेकों बुद्धिजीवी सम्मेलनों में अपने विचार प्रस्तुत किए, जिन्हें अपनी मौलिकता के लिए भरपूर सराहा गया। विज्ञान और धर्म के अनेकों मनीषियों के संपर्क एवं उनकी निरंतर नवीन सोच की ओर गतिशील रहने की परिणीती है यह पुस्तक, जो आपकी ब्रह्म एवं ब्रह्मांड के प्रति सोच को सदैव के लिए परिवर्तित कर देगी। लेखक की अन्य दो प्रकाशित पुस्तकों के शीर्षक हैं- १. शून्य से प्रारम्भ... जीवन-यात्रा... अनंत पर अंत? २. Astrology- Prudence, Science Or Ignorance? तीसरी पुस्तक, ‘वो’ कहाँ है? अब आपके हाथों में है। 

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