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GIGYASA

Arts, Photography & Design | 11 Chapters

Author: Chandan Thakur

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Sensation also keeps the sensitive alive only when a smile filled with innocence is alive between the growing mind and the hardened body.

मैं ज़िद्दी....

आज मैं खेल रहा था
आसमां कुछ कह रहा था ।
चल कर आराम करो
खेलना अब बंद करो ।।

पर मैं ज़िद्दी,
उसकी बात नहीं मानी ।
उन्होंने बरस कर
शुरू किया देना पानी ।।

हम बच्चों ने उसमे ख़ूब नहाया
आसमां खुश होकर पानी बरसाया ।
बादल में नाचे मन मोरा
हम बच्चों का मन हरसाया ।।

इतने में आया‌‌ हाथी व दासा
उन्होंने दिखाया ग़जब तमाशा ।
दासा ने डम-डम डमरू बजाया
हाथी को उसने ख़ूब नचाया ।।

एक तरफ़ थी तमाशा
दूसरी ओर खोया मैं ख्वाबों में ।
वर्षा रानी घर को चली
देकर उमंग हम सबों में ।।

फिर! हम बच्चों ने ठानी खेल
घर जाने में हो गयी देर ।।

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