'षड यात्रा' विशुद्ध रुपें एक संस्मरणात्मक पोथी अछि ।मानवक जीवन सेहो एक प्रकार के यात्रा अछि,जाहि यात्रा के क्रम मे ओकरा बहुत किछु देखवा मे अवैत छैक। कहीं आनन्दक लहरि सॅं ओ सुख
प्रस्तुत पोथी ” गंगा के किछोर सँ “ एक मैथिलीक काव्य संग्रह अछि।चुँकि हमर आवास पटना मे गंगा के किछोर मे अवस्थित अछि, जाहि ठाम सँ एहि पुस्तक के रचना कएल गेल । अस्तु एकर नाम “ गंग
कितनी आश्चर्य की बात है, नहीं ! एक रचनाकार कई महीनों या कई वर्ष लगाकर एक पूरी किताब तैयार करता है इसबीच वो कई तरह के अनुभवों से गुज़रता है सहता है लिखता है फ़िर पढ़ता है और पढ़कर फ़िर से प
संवेदना भी संवेदनशील को तभी ज़िन्दा रख पाती हैं जब बड़े हो रहे मन और सख्त हो रहे शरीर के मध्य मासूमियत से भरी मुस्कान जिंदा हो ।
आपके मुस्कान को ज़िन्दा रखने के लिए मेरे कलम की न
आशियाना-जिस तरह किसी मकान को घर बनाने के लिए परिवार कि ज़रूरत होती है,उसी तरह हर इन्सान को एक आशियाने कि ज़रूरत होती है।आशियाना मतलब घर ,और घर तब तक घर नहीं होता है जब तक कि वहां सबों
संवेदना भी संवेदनशील को तभी ज़िन्दा रख पाती हैं जब बड़े हो रहे मन और सख्त हो रहे शरीर के मध्य मासूमियत से भरी मुस्कान जिंदा हो ।