You cannot edit this Postr after publishing. Are you sure you want to Publish?
Experience reading like never before
Read in your favourite format - print, digital or both. The choice is yours.
Track the shipping status of your print orders.
Discuss with other readersSign in to continue reading.

"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palआशियाना-जिस तरह किसी मकान को घर बनाने के लिए परिवार कि ज़रूरत होती है,उसी तरह हर इन्सान को एक आशियाने कि ज़रूरत होती है।आशियाना मतलब घर ,और घर तब तक घर नहीं होता है जब तक कि वहां सबों के बीच प्रेम कि धारा न बहती हो,ठीक इसी प्रकार आशियाना भी तब पूर्ण होता है जब उस नगरी में आशिक हो।ऐसा आशिक जो दीवानगी फैला दे,इश्क़ के नाम पर फ़रेब नहीं सब को प्यार करना सिखा दे,सब को जवां दिल बना दे और सब को मिला के पुरे संसार को एक परिवार बना दे।आशिक़ी एक ऐसा जुनून है जिसकी जुनूनियत का कोई हद नहीं।आशिक तो बेगाने होते है, सच कहूँ तो परवाने होते हैं, ना सुबह कि फिक्र होती है ना शाम का पता वो तो बस प्यार के एहसास में खोये रहते हैं।
जिस प्रकार हीरे कि परख जोहरी को होती है उसी प्रकार प्रेम को पहचानने कि परख एक आशिक़ को होती है,आज के दौड़ में आशिक तो बहुत मिल जाते है कसमे भी बहुत खाते है और वादे भी बहुत कर जाते हैं पर निभाते वही हैं जो सच्चे आशिक होते हैं ,सच्चे आशिक कभी धोखा नहीं देते क्योंकि वे जानते हैं धोखे का दर्द होता है क्या नैया को मजधार में छोड़ने से होता है क्या !
इस जीवन रुपी नैया में “आशियाने” का बड़ा ही मोल होता है | घर तो बन जाते हैं चंद रुपयों में पर “आशियाना” बनाने में बड़ा ही मोल लगता है क्योंकि वो अनमोल होता है ।
It looks like you’ve already submitted a review for this book.
Write your review for this book (optional)
Review Deleted
Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.अंज़ान
इस संसार रूपी कुरूक्षेत्र के महासमर में कलम-तीर, तुणिर-दवात के अलावा इस दुनिया में अगर कुछ है जिसे मैं अपना कह सकता हूँ तो वो है मेरे प्रशंशक, पाठक, आलोचक ।इसके अतिरिक्त न मेरे पास कोई और सम्पत्ति है और न ही मेरा कोई अन्य परिचय बाँकि शस्त्र है, रक्त से सना हुआ दिल और आशियाने कि खोज़ में जंज़ीर से बँधे-रेंगते दोनों कदमें । इस अज्ञात वन में और कुछ है तो वो है मेरा नाम, जो शायद ये भी मेरा नहीं है "अंज़ान" ...
India
Malaysia
Singapore
UAE
The items in your Cart will be deleted, click ok to proceed.