JUNE 10th - JULY 10th
कॉलेज का दूसरा साल वो साल होता है जहां कुछ स्टुडेंस सीधे दूसरे साल में दाखिला लेते है। और राज,कमल और किशोर यही देख रहे थे कि उनके ब्रांच में कौन कौन नया आया है, तभी कमल की नजर कोने में बैठी एक लड़की पर गई उसने किशोर से कहा ‘‘ अरे सुन तो ये वही है न अपने प्रो. राजपूत की बेटी... क्या नाम था...?‘‘ ‘‘निशा.... हां निशा नाम है इसका‘‘ किशोर ने कहा। राज का ध्यान कहीं और था , किशोर ने राज से कहा ‘‘अरे इधर तो देख बला की खूबसूरत लड़की है यार इसने बाहर से पढ़ाई की है‘‘। राज जैसे ही निशा की तरफ मुड़ा उसकी आंखे मानो जम सी गईं, चेहरा पीला पड़ गया और हाथ पांव ठंडे पड़ गए। बस वो निशा को एकटक देखता ही रह गया, और निशा... निशा का स्वभाव राज के बिल्कुल उलट था, वो बड़े चंचल स्वभाव की थी, हालांकि कॉलेज में ये उसका पहला ही दिन था फिर भी सबसे मिलकर ऐसे बात कर रही थी जैसे सबको जानती हो उसने पहले ही दिन काफी दोस्त बना लिए और पढ़ाई, पढ़ाई में भी वो राज से आगे।
दूसरी तरफ राज की रातों की नींद उड़ चुकी थी उसने जब से निशा को देखा था बस उसके बारे में सोचा करता अब रोज उसकी ये आदत थी की जिस बंेच पर निशा बैठती उसके ठीक पीछे बैठकर राज उसे देखा करता, वहीं निशा की दुनिया में राज का अब तक आगमन नही हुआ था यू ंतो थे एक ही क्लास के लेकिन वो राज को नहीं जानती थी। लेकिन ये पल भी बदलने वाला था जल्द ही कॉलेज में फेयरवेल होने वाला था और राज उसकी सारी तैयारियां देख रहा था, निशा को ये काम मिला था की वो सीनियर्स के 3 साल की यादों की एक वीडियो बनाएगी, जिसके लिए उसे सारे सीनियर्स के नाम और उनकी तस्वीरें चाहिए थी, उसने अपने सहेलियों से पूछा तो किसी ने कहा कि राज के पास सब कुछ है मैं तुम्हे उसका नंबर देती हूं तुम उससे जो भी चाहिए मांग लेना। राज कॉलेज का सारा काम निपटा के घर लौटा, खाना खाकर आराम करते हुए अपना मोबाईल चला रहा था कि तभी एक मैसेज आया‘‘ हाई निशा दिस साइड, तुम्हारी हेल्प चाहिए थी‘‘ राज को तो मानों अपनी आंखो पे यकीन नही हो रहा था के निशा जिसे वो इतना पसन्द करने लगा है उसका मैसेज आया है। राज ने तुरंत जवाब दिया‘‘येस हाई हां तुम बोलो मैं मदद करूंगा‘‘ तब निशा ने सारी बातें बताईं और राज ने फट से उसे सारी तस्वीरें और नाम भेज दिए, बस फिर क्या था अब तो रोज ही किसी न किसी बहाने से कभी राज तो कभी निशा एक दूसरे से मैसेज पर बातें किया करते थे। देखते ही देखते कॉलेज का तीसरा और आखिरी साल भी आ गया और साल के पहले ही दिन राज ने तय किया कि वो अपने दिल की बात निशा से कह देगा। उस दिन प्रैक्टिल था सभी प्रैक्टिल निपटा कर घर जा चुके थे, बचे तो बस राज,कमल,किशोर और निशा और उसकी दोस्त अंकिता। राज हिम्मत करके निशा के पास गया और उससे कहा‘‘ पिछले तीन सालों में मैने ये बात नहीं बताई क्योंकि मैं तुम्हारी दोस्ती खोने से डरता था पर अब मुझे लगता है कि जो हो देखा जाएगा, अगर आज नहीं कहा तो शायद कभी बोलने का मौका दोबारा मिलेगा नहीं। मैं.... मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मुझे तुमसे प्यार है और हां मैं ज्यादा फिल्मी बातें नहीं करूंगा अगर तुम्हे लगता है कि मैं भरोसे के लायक हूं और तुम्हारा साथ निभा सकता हूं तो ही तुम मुझे हां कहना, वरना कोई बात नहीं।‘‘ निशा के चेहरे की हवाईयां उड़ गईं, उसके गाल लाल हो चुके थे उसने दबे आवाज में कहा ‘‘ सच तो ये है कि मैं भी तुमसे प्यार करती हूं बस कहने से डरती थी।‘‘
अब राज और निशा दोनों एक-दूसरे के हो चुके थे, एक सुनहरा एहसास जो प्यार में होता है उसे उन्होने महसूस किया, अब प्यार में जो बुरा वक्त आता है वो होता है जुदाई, बस ये पल इनकी जिंदगी में दस्तक दे चुका था, निशा को आगे की पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहर जाना था, राज राज का रो-रोकर बुरा हाल था वो डरता कि कहीं निशा मुझसे दूर गई तो हमेशा के लिए जुदा हो जाएगी। निशा ने उसे समझाया‘‘ तुम डरो मत हमारा रिश्ता कभी खराब नही होगा ये मैं तुमसे वादा करती हूं‘‘। राज मान गया और निशा अब दूसरे शहर में रहकर पढ़ने लगी। राज उसे रोज मैसेज करता, कॉल करता कुछ दिनों तक सबकुछ ठीक था पर धीरे-धीरे निशा राज के मैसेज का जवाब नहीं देती, कॉल्स नहीं उठाती न ही सामने से कॉल्स आते। राज को लगता कि वो शायद पढ़ाई में बिजी है इसलिए जवाब नहीं देती। लेकिन दिन-ब-दिन राज की चिंता बढ़ने लगी राज रोज रात तक इंतजार करता कि अब शायद निशा कॉल करे या मैसेज का जवाब दे पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आज राज का जन्मदिन था, सबकी बधाईयां राज को लगातार आ रहीं थीं, और उनमें एक कॉल निशा का आया राज तो जैसे फूले नहीं समा रहा था उसने तुरंत फोन उठाया और कहा ‘‘ मुझे पता था तुम आज कॉल करोगी ही , कितने दिन हो गये कहां थी यार पता है मैं कितना परेशान हो गया था।‘‘ सामने से निशा ने कहा‘‘ सुनो इतना खुश होने की जरूरत नहीं है मैने सिर्फ इसलिए कॉल किया था कि मुझे तुम्हे कुछ बताना था‘‘। ‘‘हां बोलो‘‘ राज ने कहा ‘‘ मुझे किसी और लड़के से प्यार हो गया मैं हमारा रिश्ता खत्म कर रही हूं‘‘ ‘‘ निशा पर हुआ क्या अचानक क्यूं ऐसा मुझसे कोई गलती हुई‘‘ राज ने रूंधे गले से कहा। ‘‘ आज के बाद न मुझे कॉल करना न ही मैसेज‘‘ इतना कहकर निशा ने फोन रख दिया। इधर राज कुछ सोच ही नही पाया कि हुआ क्या बस चुप सा एक जगह बैठ गया। घंटो रोता रहा घंटे दिन में बदले दिन साल में अब उस बात को 2 साल हो चुके थे लेकिन राज राज अब तक निशा को भूला नहीं था उसने एक दिन तय किया कि वो आज निशा को कॉल करके सब बातें साफ कर लेगा कि हुआ क्या ? उसने कॉल लगाया निशा ने फोन उठाया‘‘ तुमसे कहा था न मैने मुझे कॉल नही करना‘‘ राज ने कहा ‘‘मुझे बस मेरी गलती बताओ हुआ क्या?‘‘ निशा ने कहा‘‘ कोई जरूरत नही है जानने की और न ही मैं जरूरी समझती हूं तुम्हे जवाब देना‘‘ काफी देर दोनों में झगड़ा हुआ राज ने आखिर में कहा ‘‘ ठीक है तुम खुश रहो अपनी जिंदगी में मैं भी तुम्हें भूल जाउंगा‘‘ इतना कहकर उसने फोन रख दिया और निशा के नंबर को ब्लॉक कर दिया। लेकिन रात में बैठकर उसने एक खत लिखा जिसमें उसने निशा को पिछले 5 साल की यादें दिलाईं और लिख कर उसे एक लिफाफे में डाल दिया ताकि वो खत निशा तक पहुंचा सके। कुछ दिनों बाद एक सुहानी शाम थी राज छत पर कॉफी पी रहा उतने में उसे एक दोस्त का कॉल आया, और सामने से आवाज आई ‘‘ भाई मैं किशोर ये मैं क्या सुन रहा हूं यार ये कब और कैसे हुआ‘‘ राज ने पूछा ‘‘ किस बारे में बात कर रहा है तू मेरा रिश्ता तो काफी समय पहले ही खत्म हो चुका है‘‘ ‘‘ नहींे यार वो निशा... निशा है न उसकी... कल रात एक बीमारी से मौत हो गई‘‘। इतना सुनते ही काफी का कप राज के हाथ से गिर पड़ा वो खामोश सा रह गया‘‘ राज राज तू सुन रहा है उसकी बॉडी आज यहां उसके घर ला चुके हैं तू आ रहा है न‘‘ इतना सुनते ही राज दौड़ पड़ा गाड़ी निकाली और सीधे निशा के घर पहुंचा वहां उसके घर वाले और उसका ब्वायफ्रेंड था उसने राज से कहा‘‘ निशा को एनेमिया था इंफेक्शन काफी बढ़ चुका था वो आखिरी वक्त में तुमसे मिलना चाहती थी माफी मांगना चाहती थी पर उसे डर था तुम उससे मिलोगे नहीं।‘‘ राज के मन में उस दिन से अब तक सिर्फ एक ही सवाल कायम है ‘‘क्यूं नहीं बुलाया मुझे आखिरी बार मिलनेै‘‘। आज राज सबसे हंसकर मिलता तो है लेकिन उसके दिल में कुछ सवाल, निशा की यादें, और उसका वो आखिरी खत आज भी राज के साथ हैं।‘‘
जिंदगी का कुछ पता नहीं किसी के आने किसी के चले जाने से जिंदगी रूकती नहीं है हमें चलना होता ह र पल लड़ना होता है, और कहानी जैसी खत्म होगी हम सोचते हैं लेकिन वैसी खत्म नही होती।
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sonu2525kashyap
rajkumarsaxena1508
Excellent story Outstanding mind-blowing thought process I am given
kajal999raj
Behatareen
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