तामसिक साया

हॉरर
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तामसिक साया

असम जैसी जगह उन लोगों के लिए ठीक है, जिनको भूत -प्रेत में दिलचस्पी हो। असम को भारत का काला जादू की राजधानी का खिताब भी मिला है। ऐसा कहा जाता है की, बहुत पहले दूर -दूर से लोग यहाँ काला जादू सिखने आते थे। असम में यह भी माना जाता है, की अगर किसीने काला जादू और मंत्र शक्ति मैं महारथ हासिल कर्ली, तो वो इंसान को जानवर में बदल सकता है।

असम में नागांव (Nagaon) नाम का एक छोटा सा गांव है। इस गाओं में काले जादू की कोई सीमा नहीं। यहाँ जानवरों और पंछियों की बलि दी जाती है। सबसे जयादा हर अमावस की रात में, शाम 6 से ९ बजे के बीच पंछियों की बलि दी जाती है। रातको तो जैसे इन् मरे हुए पंछियों की बारिश होती है। बहादुर से बहादुर इंसान भी यह दृश्य देखकर डर जाये। वैज्ञानिक भी कभी इन चीज़ों का पता नहीं लगा पाए।

यह वारदात कुछ १० साल पहले की है। नागांव में अपने परिवार के साथ काया नामक लड़की रहती थी। वो १६ साल की स्कूल पड़ने वाली युवती, जिसके बचपन से ही आकर्षित रूप की चर्चा गांवभर में थी। गांव के कई मर्द, काया की सुंदरता को देख मोहित हो जाते। उसका जवान हुस्न, नीली आँखें और गोरा रंग देखकर, मर्दों की बुरी नज़र अक्सर उसपर रहती।

एक दिन जब काया स्कूल से घर को लौट रही थी, तब गाँव के ४ आदमियों ने उसे अगवा कर लिया। अक्सर काया के आने-जाने का समय उनको पता होता। वो ४ आदमी काया को एक छोटे से घर में ले गए और वहां ४ दिनों तक लगातार उसका रेप किया। ४ दिनों तक उन चारों ने काया को बहुत नोचा और उसपर अत्याचार भी किये। पांचवे दिन, तड़पते हुए काया ने दम तोड़ दिया। उन ४ आदमियों ने काया की लाश को उसी घर में जला दिया और उस घर को बंद कर दिया। गाँव में किसीको पता भी नहीं चला इस दुर्घटना का । काया की लाश जलकर राख हो गयी।

अगले दिन, काया की आत्मा एक भयानक रूप लेकर अपने कातिलों से बदला लेने गाँव में आकर, अपने उन ४ कातिलों को मार डालती है। इतने पर भी काया की आत्मा नहीं रूकती। वो गांववालों को भी अपनी मौत का ज़िम्मेदार समझती थी, क्यूंकि गाँव में किसीने भी उसके गुमशुदा होने पर कुछ नहीं किया। आधी रातको जैसे जोरसे रोना और हसना, बम्बू की लकड़ियों का कट कर गिरना, पायल की आवाज़ और घरों की छतों पर पत्थर फेकना, यह सब काया की आत्मा का आतंक था।

गांववालों ने तांत्रिक को बुलाया और तांत्रिक ने उसी घर में जहाँ काया की मौत हुई थी, वहां जाकर मंत्र-तंत्र फुके और काया की आत्मा को वश में किया। तांत्रिक ने एक अभिमंत्रित कील उस घर की एक दिवार पर ठोक दिया, जिससे काया की आत्मा उस घर में कैद हो गयी।

तांत्रिक ने गांव में सबको इस शापित घर से दूर रहने की चेतावनी दी। कुछ सालों तक काया के आतंक से गाँव मुक्त रहा।

फिर एक दिन, दो सैनिक फैसल और किशन, अपनी आर्मी की ट्रेनिंग ख़तम करके अपने घर वापस जा रहे थे। रास्ते में नागांव से गुजरते हुए उनकी जीप अचानक उसी शापित घर के बहार बदकिस्मती से बंद पड़ जाती है।

फैसल -रात बहुत हो चुकी है और दूर -दूर तक कोई गांववाला नहीं दिखाई दे रहा।

किशन- हाँ यार फैसल, इतनी रात को कौन हमारी मदत करने आएगा?

वो दोनों बात कर ही रहे थे की एक बुढ्ढा आदमी हाथ में लाठी लेकर उनके सामने से गुजर रहा था। वो अपनी ही धुन्न में चला जा रहा था।

किशन- अरे चाचा, यहाँ कोई कार मैकेनिक मिलेगा?

बूढ़े की नज़र उस घर पर पड़ती है और कांप गया।

बूढ़ा आदमी -यहाँ से जाओ जल्दी, इस घर के सामने मत खड़े रहो।

यह कह कर बूढ़ा तेज़ी से चलने लगा। फैसल और किशन यह देख हैरान हुए।

किशन -अरे इनको क्या हो गया? मैकेनिक का तो बताया नहीं और ऐसे ही चले गए।

फैसल- चल यार किशन, आज की रात इसी घर में गुजारते हैं और कल सुबह जल्दी निकल जायेंगे।

किशन मान जाता है और दोनों उस शापित घर में चले जाते हैं। वो दोनों सेना के सिपाही थे, तोह ऐसी बंद जगहों से कहाँ डरने वाले थे। जो देश की रक्षा करते हैं उन्हें ऐसी जगह से कोई फरक नहीं पड़ता। उनका मोबाइल नेटवर्क ना चलने से वो दोनों अपने घरवालों को खबर नहीं दे सके।

फैसल अपना सामान का बैग गलती से उसी कील पर टांग देता है। जो तांत्रिक ने सालों पहले घर के अंदर ठोका था। बैग का वजन भारी था तो कील और फैसल का बैग दोनों ही ज़मीन पे गिर जाते हैं। फैसल इसको नज़र अंदाज़ कर, कील को एक तरफ फेकता है और अपना भारी बैग एक जगह रख देता है।

दोनों सो गए और एक घंटे बाद, एक लड़की की ज़ोर से रोने की आवाज़ें आने लगी। किशन की नींद खुली और उसने देखा की एक लड़की बहुत डरावने भूतिया रूप में उसके सामने खड़ी थी। फैसल की गलती से काया की आत्मा आज़ाद हो गयी और अब वो किशन के सामने खड़ी थी।

काया की आत्मा-चले जाओ, वार्ना तुम भी मरोगे।

किशन, एक आर्मी सैनिक होने के नाते, नहीं डरा। काया की आत्मा ने सोते हुए फैसल को हवा में ऊपर उठा लिया।

काया की आत्मा- तेरे दोस्त को मार डालूंगी, चले जाओ तुम दोनों।

काया ने फैसल को निचे ज़मीन पर पटक दिया और फैसल की नींद खुली। फैसल को सर पर चोट लग गयी और उसने भी काया की आत्मा को देखा।

फैसल-किशन, चल यहाँ से भाग चलें। वो बूढ़ा आदमी भी इस घर की तरफ इशारा कर, चले जाने को बोल रहा था, पर हमने ही उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

किशन- फैसल, एक सैनिक होकर इतना कमज़ोर दिल? कहाँ गयी तेरी हिम्मत?

फैसल के ज़िद्द करने पर, किशन और फैसल अपना सामान लिए उस शापित घर को छोड़कर भागने लगते हैं। रास्ते में उन्हें एक गाँव दिखा और वहां स्तिथ एक शिव मंदिर भी।

किशन- फैसल, आज रात इस मंदिर के बहार गुजार लेते हैं। यही एक सुरक्षित जगह है।

फैसल किशन की बात मान गया और दोनों वहीँ मंदिर के बाहर आसरा लेते हैं।

कुछ देर बाद, एक सिद्ध साधु वहां से गुजरे और उनकी नज़र किशन और फैसल पर पड़ी।

साधु- हम्म, यह एक सुरक्षित जगह है। उस लड़की की आत्मा से तुम्हारी रक्षा होगी।

किशन- साधु महाराज, आपको कैसे पता हमारी हालत के बारे में?

साधु - इस गाँव के हर कोने से में वाकिफ हूँ। तुम दोनों की यह दुर्दशा की और क्या वजह हो सकती है?

किशन और फैसल इस बात से अनजान थे, की कुछ दिन पहले ही एक सिद्ध साधु नागांव के शिव मंदिर में आए। काले जादू से पीड़ित लोगों की मदत और अपनी सिद्धियों से वो अतृप्त आत्मा को मुक्ति दिलाते थे। इसलिए उन दोनों की हालत साधु देखते ही पहचान गए ।किशन और फैसल ने अपने साथ हुई भूतिया घटना के बारे में साधु को सब बताया।

साधु- हम्म, तुम दोनों इस नागांव के भूतिया किस्सों से अनजान हो। तुम्हारा भूत -प्रेतों से कभी सामना नहीं हुआ इसलिए उस घर में चले गए। तुम दोनों अभी मेरे साथ उस घर में चलो, क्यूंकि ऐसी आत्माएं इतनी आसानी से पीछा नहीं छोड़ती।

फैसल, किशन और साधु उस घर में जाते हैं। घर के अंदर जाते ही, साधु की नज़र ज़मीन पे गिरे उस कील पर गयी। उस कील को हाथ में लेकर, साधु ने अपने दिव्या दृष्टि से, कील और उस आत्मा का रहस्य पता लगाया।

फैसल- अरे, यह तोह वही कील है जिसपर मैंने अपने भारी बैग टांगा था और वजन के कारण ही कील और बैग ज़मीन पर गिर गए।

साधु- गलत हुआ!! वो आत्मा आज़ाद हो गयी। इस कील ने उसे इस घर में बाँध रखा था। यह एक शापित घर है और इस शापित घर में कैद आत्मा का नाम है काया।

साधु ने उस शापित घर और काया की दर्दनाक कहानी किशन और फैसल को सुनाई। किशन और फैसल सुनकर बहुत दुखी हुए।

किशन- तो अब क्या किया जाये साधु महाराज?

साधु- एक उपाय है। लेकिन तुम दोनों को हिम्मत रखनी होगी।

फैसल- आप जो कहो साधु महाराज, अब तोह हम भी उस लड़की की आत्मा को मुक्ति दिलाना चाहते हैं।”

साधु- जब किसी इंसान के मरने के बाद, अगर उसके अंतिम विधि या श्राद्ध के पुरे नियम ना किये हों तोह उसकी आत्मा भटकती है और यह तो नाबालिक लड़की की आत्मा है। उसके शरीर की राख और हाड़ियाँ इसी घर में है, उसे ढूंढो और इस खाली कलश में डाल्दो और यह गंगा जल भी उसकी राख पर छिटककर बंद कर देना और जरुरत पड़ी तो काया की आत्मा पर भी। क्यूंकि ऐसी ज़िद्दी आत्माएं अपनी राख तक किसीको पहुँचने नहीं देती। काया की आत्मा तुम दोनों को नुक्सान पहुंचा सकती है ।

किशन और फैसल अपने मोबाइल की टोर्च लाइट चालू कर, काया की राख ढूंढ़ने लगे और दूसरी तरफ काया की आत्मा को भनक लग गयी और वो किशन और फैसल को नुक्सान पहुँचाने की कोशिश करने लगी। कभी खिड़की के कांच उनपर फेंकती, तो कभी छल से किशन की आवाज़ निकाल के फैसल को पुकारती। फिर काया की आत्मा, किशन पर वार करने लगी, तो फैसल ने मौक़ा देखते ही गंगाजल काया पर छिटक दिया। इससे काया की आत्मा ज़ोरों से चिल्लाते गायब हो गयी।

कुछ देर बाद उन दोनों को एक कोने में काया की रख और हड्डियां मिली। किशन ने काया की रख को खाली कलश में डाल दिया और फैसल ने उसपर गंगाजल छिड़क दिया। इस काम को करते-करते पूरी रात निकल गयी और दिन चड़ गया। दोनों उस कलश को साधु के पास ले गए।

साधु मंदिर के पीछे की नदी में जाने के बजाए, जंगल की ओर बढ़ने लगा। किशन और फैसल को साधु पर शक हुआ और वो दोनों भी साधु का पीछा करने लगे। साधु जंगल की एक अँधेरे कोने में पहुंचा, वहां पहले से दो तांत्रिक मौजूद थे। साधु को देख, वो तांत्रिक उसे प्रणाम-दंडवत करने लगे।

फैसल- अरे, यह क्या हो रहा है? साधु महाराज यहाँ क्या कर रहे हैं, वो भी काया की अस्थियों के साथ?

किशन- यह तो इस साधू को पकड़ने पर ही पता चलेगा, चल।

साधु ने काया की अस्थियों को हवं अग्नि में डाला और अपने तांत्रिक रूप में आ गया। किशन और फैसल यह देख चिल्ला उठे।

फैसल- यह सब यहाँ क्या हो रहा है?

किशन- तोह यह है तेरा असली रूप पाखंडी साधु?

वहां मौजूद उन दो तांत्रिकों ने किशन और फैसल की आँखों में धुल फ़ेंक के, एक पेड़ से बाँध दिया।

तांत्रिक- मुर्ख सैनिकों!! मैं ही हूँ इस गाँव का तामसिक साया। एक सिधद्ध साधु का भेस लेकर मेने इस नागाओं को भी अपनी चपेट में ले लिया। मेरा असली मकसद पूरा करने के लिए मेने तुम दोनों का उपयोग किया। काया की आत्मा को उस घर में मेने कैद किया था और गाँव में उसकी दहशत फैलादी। उस घर को शापित बताकर मेने वहां अपनी बहुत बड़ी- बड़ी तांत्रिक सिद्धियां हासिल की, जिससे मैं आसानी से किसीका भी रूप ले सकता हूँ। मेरा मंदिर में दिखना,एक छलावा था, तुम्हें अपने जाल में फ़साने का, तुम्हारा नागाओं में रुकना शैतान का करिश्मा था।

फैसल- कैसा मकसद ? तुम यह क्यों कर रहे हो?

तांत्रिक- आज चद्र ग्रहण है, और उसके बाद में पांच तत्वों को अपने वश में कर, तुम दोनों की बलि देकर, मैं काली शक्तियों का स्वामी बन जाऊंगा। बलि! बलि!! बलि!!! बलि!!! शक्ति दे, काली शक्तियों के दाता। बलि लो, बल दो।

-मनप्रीत कौर

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