JUNE 10th - JULY 10th
मैं वागा बॉर्डर की शाम की परेड देख, निकलने के लिए अपनी टैक्सी के इंतज़ार में एक चाय की दुकान पर बैठा था। तभी मेरी नजर एक पागल पर पड़ी। पागल कहना तो नहीं चाहिए, क्यूंकि असल में पागल वो नहीं हम सब है। वो तो सीधे होते है, जिन्हे समाज अपनी चालकी और झूट को सच करने के लिए पागल बना देता है।
वो सड़क की सफाई कर रहा था। मैंने पूछा "कुछ खाओगे" तो बोला "मेरे कोल टाइम नहीं है, मेनू पूरा सड़क साफ करनी है।"
"साहब ये पागल यू हीं सड़क साफ़ करता रहता है, कि सुखमिन्दर आएगी तो उसके पैर गंदे न हो जाये।" चाय रखते हुए चायवाला बोला। उसके बारे में जानने की उत्सुकता लिए मैंने पूछा "ये सुखमिन्दर कौन है?"
"आज़ादी से पहले बॉर्डर के पार गोपाल सिंह वाला गांव में रहती थी। बहुत प्यार था हरपाल को उससे। दोनों के गांव आस पास होने के कारण दोनों का स्कूल भी एक था।"
स्कूल से घर जाते समय साईकिल पर पीछे बैठे हुए सुखमिन्दर ने पूछा "अब तो हमारे स्कूल वी खत्म होने को है और मेरा बाहर निकलना बंद हो जाना है। तो कब बात करेगा घर में हमारे व्याह दी।"
हरपाल बोला "माँ नु मना लिता है मैंने, बस बापू से माँ गल कर ले, फिर लेके आता हूँ बरात तेरे घर" हरपाल के घर में ज्यादा रोक टोक नहीं थी। क्यूंकि उसके माँ बापू ने भी प्रेम विवाह किया था। सुखमिन्दर बोली "मैं अपनी विदाई विच साईकिल पर नि ओना। मोटर गाड़ी लानी पड़ेगी और मेरे पैर न गंदे हो इस लिए चमचमाती सड़क तैयार रखना तू । नहीं ता मैनु तेरे नाल व्याह नहीं करोना " और दोनों जोर से हँस पड़े।
कुछ दिनों बाद हरपाल ने सुखमिन्दर को बताया कि बापू मान गए है, "एस इतवार विच तेरे मेरे रिश्ते की गल करन वास्ते तेरे घर जायेंगे।" सुखमिन्दर बहुत खुश हो गयी, मनो उसका सपना पूरा होने वाला था।
10 अगस्त 1947
हरपाल के गांव रोरावाला में रेडियो पर खबर आ रही थी, "जिन्ना और नेहरू जी में मतभेद के चलते आज़ादी के साथ साथ देश को दो हिस्सों में बाटा जा रहा है। इसके चलते देश में दंगे भी बढ़ रहे है।" इन सब से बेखबर हरपाल अपनी ही दुनिया में खोया पड़ा था।
14 अगस्त 1947
शाम के वक़्त हरपाल का दोस्त बिसन भागते हुए आया और चिल्लाते हुए बोला "हरपाल, हरपाल बाहर आ, जल्दी आ।" हरपाल चिल्लाते बोला "आया वीरे आया. क्यों चिल्ला रहा है।"
बिसन हांफते हुए बोला "जल्दी चल पुलिस वाले अपने गाँव के आखिरी खेतो के पास सड़क पर बाड़ लगा रहे है। मैंने पूछा तो बताया की अपने देश का बटवारा हो गया है। अपना गांव हिंदुस्तान का आखिरी गांव होने वाला है। सुखमिंदर का गांव नए देश पाकिस्तान में चला गया है।"
हरपाल ये खबर सुन उसी तरफ दौड़ लगाई। वहाँ पहुंचते ही मजदूरो पर चिल्लाते हुए बोला "ए की है, एथे कोई बाड़ नहीं लगेगी। ए ता मैन सड़क है लाहौर जान वाली, एस्नु कैसे बंद कर सकते हो। मैं ये नहीं करन देना।" उसका चिल्लाना सुनकर अफसर भी आ गए और बोले "क्या दिक्कत है लड़के काम करने दे इन्हे। लड़ना है तो जा जिन्ना और नेहरू से लड़ उन्ही के वजह से ये सब हो रहा है।"
हरपाल ने सोचा की सुखमिंदर को बटवारे से पहले भगा कर अपने घर ले आता हूँ और ये सोच उसके गावं की तरफ भागने लगा। उसके गावं पंहुचा, तो वहां का नजारा देखकर हैरान था, सभी घर टूटे पड़े थे, इधर उधर लोगो की लाशें पड़ी थी। वो सुखमिन्दर के घर के सामने पंहुचा वहाँ का हाल भी कुछ ऐसा ही था। उसके भाई और बापू ज़मीन पर बुरी तरह घायल पड़े थे, वो अंदर कमरे में पंहुचा तो वहां का नजारा देख कर मानो उसके पेरो से नीचे से ज़मीन निकल गयी। अंदर सुखमिन्दर बिना कपड़ो के चुन्नी से बंधी छत से लटकी हुई थी।" वो ये देखकर वहीँ बेहोश हो गया।
चायवाला बोला "पता नहीं ये कैसे वहाँ से वापस आया। होश आने पर इसे कुछ याद नहीं था। बस यहीं बोलता रहता है, की सुखमिंदर नु व्याह करके लाना है, तो सड़क साफ़ करके रखनी पायेगी। ऊसनु वादा कित्ता है, मैं"
मैंने इधर उधर देखा तो सारी सड़क साफ़ थी, पर हरपाल का कोई अता पता नहीं था। टैक्सी वाला आ चुका था। टैक्सी में वापस आते समय मैं यही सोच रहा था, कि जिस बॉर्डर को हम देखने आते है, उस लकीर की वजह से कितनो ने अपनों को खोया है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस सड़क ने लोगो के साथ साथ दो मुल्को के बॅटवारे का इतना बड़ा दर्द सहा होगा।
#73
Current Rank
25,330
Points
Reader Points 3,330
Editor Points : 22,000
67 readers have supported this story
Ratings & Reviews 5 (67 Ratings)
dev.rohit2001
achhi kahani lagi
alam.rahul
Nice story. Best of luck
nidhi.748
Bahut Khub aise hi likhte rahiye
Description in detail *
Thank you for taking the time to report this. Our team will review this and contact you if we need more information.
10Points
20Points
30Points
40Points
50Points