हॉन्टेड चर्च

हॉरर
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हॉन्टेड चर्च

चर्च की छत की घंटी (Church bell)ज़ोर से बजने लगी और तब राज का ध्यान चर्च की छत पर गया, तो अपने दोस्त रतन की लाश उसी घंटी पर लटकती हुई पाई। रतन की रहस्यमई मौत को देख, राज के पैरों तले ज़मीन खसक गयी और वो खुदको रतन की मौत का ज़िम्मेदार समझने लगा।

राज- ये सब मेरी वजह से हुआ, मेरी जीद्द की वजह से।

राज और रतन असम में स्थ्तित गुहाटी में रहते थे और पक्के दोस्त थे। एक रात वो दोनों कोई पार्टी से वापस आ रहे थे। रात बहुत हो गयी थी और अब उनको घर पहुँचने में बहुत देर हो जाएगी, क्यूंकि दोनों ने पार्टी में खूब शराब पि ली थी और इस वजह से राज गाडी धीरे चला रहा था।

रतन- यार राज, आज तो पार्टी में बहुत enjoy किया। तू गाडी चलालेगा ना? या फिर हम किसी होटल में आज रात रह जाते हैं?

राज- नहीं रतन, मैं ठीक हूँ। एक शॉर्टकटवाला रास्ता पकड़ते हैं, नेहरू पार्क रोड। जल्दी घर पहुँच जायेंगे।

रतन- नहीं राज, उस रास्ते से कोई गुजरने की हिम्मत नहीं करता। वो एक हॉन्टेड रास्ता है।

राज- मैं यह सब नहीं मानता। एक बार घर पहुँच जाएं बस। इससे ज्यादा छोटा रास्ता और कोई इलाके में नहीं है।

रतन ने राज को बहुत समझाया, राज एक नास्तिक था, वो भगवन और भूत-प्रेत को नहीं मानता था। बातें करते- करते, दोनों नेहरू पार्क रोड पहुँच जाते हैं। नेहरू पार्क रोड पहुँचते ही रतन की तो जैसे हालत पतली हो रही थी। मनो जैसे डर के मारे उसका नशा काम हो गया हो।

राज- क्या हुआ रतन? तू इतना डरा हुआ क्यों है? लगता है तेरा सारा नशा उतर गया, हाहाहा।

रतन- मैंने कहा था ना की यहाँ नहीं आना? तुम बहुत ज़िद्दी हो राज।

राज- तू फिर शुरू हो गया? छोटा सा रास्ता है, अभी 15 minute में हम घर पहुँच जायेंगे।

अचानक चर्च के पास पहुँचते ही उनकी गाडी ख़राब हो गयी। चर्च की घंटी बजने की आवाज़ ज़ोर से आ रही थी। रतन ने समय देखा, रातके १ बजे थे। चर्च दिखने में एक पुराने खंडर जैसा था।

रतन- यार, रातके १ बजे भी चर्च की घंटी बजने की आवाज़? हैरानी की बात है ।

राज- कोई हैरानी की बात नहीं है। यह भगवन, ईश्वर सब तुम इंसानो का भ्रम है। एक तो दूर-दूर तक तो कोई मैकेनिक नहीं दिख रहा। शायद कोई लिफ्ट मिल जाएं तो सही होगा। गाडी के पास इंतज़ार करते हैं।

रतन- ऐसी हुन्तेद जगह पर कोई समझदार इंसान कैसे आएगा, जो तू लिफ्ट की उम्मीद कर रहा है?

इतने में रतन को चर्च के बाहर, एक बूढ़ा सा आदमी दिखा।

रतन- राज, वो देख चर्च के बाहर कोई बैठा हुआ है। चलना देखें शायद वही हमारी कुछ मदद कर दे।

राज- मुझे तो वहां कोई नहीं दिखरहा।

रतन- नहीं राज, ध्यान से देख वहां तुझे एक बूढ़ा आदमी दिखेगा काले कपड़ों में।

राज ने फिर देखा तोभी वहां कोई नहीं था। रतन उस बूढ़े आदमी के पास गया तो उसने देखा की एक पादरी बाइबिल पढ़ रहा था। रतन हैरान था की ऐसी खंडर जगह पर रातके १ बजे, यह पादरी अकेले बाइबिल पढ़ रहा है।

रतन- अरे फादर, आप यहाँ अकेले क्यों बैठे हो? और इतनी देर रातको चर्च की बड़ी घंटी का बजना? इस चर्च की ऐसी हालत? यहाँ आपके साथ और कौन है, या अकेले को?क्या आपको डर नहीं लगता?

पादरी को रतन पर बहुत गुस्सा आता है और वो वहां से चले जाते हैं। रतन का चर्च को अंदर से देखने का मन हुआ और मोबाइल की टोर्च ऑनकर, अकेले ही अंदर चला गया। उसने देखा की पादरी एक कोने में बैठकर बाइबिल पढ़ रहे थे। चर्च के अंदर Cross या Jesus Christ से जुडी और कोई धार्मिक वस्तु नहीं थी। इसलिए चर्च इतना डरावना और खंडर बन गया था।

रतन-अरे, यह तोआश्चर्य की बात है, अँधेरे में भी पादरी बाइबिल कैसे पढ़ रहे हैं?

रतन की वजह से पादरी को बाइबिल पढ़ने में बहुत परेशानी हो रही थी। वो चर्च की छत पर चले गए। रतन भी अपनी मोबाइल लाइट से पूरा चर्च अंदर से देख रहा था और फिर देखते-देखते, वो छत पर भी पहुँच गया।

रतन उस छत की Church bell के पास पहुंचा और उसे बजाने की कोशिश करने लगा। तभी उसे ठोकर लगती है और वो bell की रस्सी पे जा गिरा। रस्सी, रतन की गर्दन पे फस्स गयी। पास खड़े पादरी से रतन मदद मांग रहा था, पर पादरी उसे गुस्से से घूरे जा रहा था।

रतन- बचाओ! बचाओ! राज, राज मुझे बचाओ।

इतने में पादरी रतन को ज़ोर से धक्का देता है और रतन को Church bell से फांसी लग जाती है। घंटी पे लटकने से, रतन दम तोड़ देता है।

वहां राज भी रतन को ढूंढ रहा था। चर्च के चारों तरफ ढूंढ़ने के बावजूद रतन नहीं मिला। रतन का फ़ोन भी नहीं लग रहा था।

चर्च की छत की घंटी ज़ोर से बजने लगी और तब राज का ध्यान चर्च की छत पर गया, तो अपने दोस्त रतन की लाश उसी घंटी पर लटकती हुई पाई। रतन की रहस्यमई मौत को देख, राज के पैरों तले ज़मीन खसक गयी और वो खुदको रतन की मौत का ज़िम्मेदार समझने लगा।

राज ने देखा की रतन की लाश के पास बाइबिल पड़ने की आवाज़ आ रही थी। इतने में राज को रतन का कॉल आया।

राज- रतन तू? तेरा कॉल? यह सब क्या है?

कॉल-राज मुझे बचाओ।राज मुझे बचाओ।

राज को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ऊपर रतन की लाश और अब उसका कॉल। साथ में उसकी लाश के पास बाइबिल पड़ने की आवाज़।

राज चर्च की छत पे जाने लगा और इतने में एक ट्रक के गुजरने की आवाज़ आयी। राज ने उस ट्रक को रोका।

राज- सुनिए भाई साहब, प्लीज मेरी मदद करो, मेरे दोस्त की लाश वहां चर्च के ऊपर लटकी हुई है।

ट्रक ड्राइवर- अरे साहब आप यहाँ कैसे फस गए? चलिए यहाँ से। यहाँ बहुत खतरा है।

राज- क्या बकवास कर रहे हो? इंसानियत के नाते तो मदद करो?

ट्रक ड्राइवर- अगर मैंने आपकी मदद की, तो हमारी मदद करने कोई नहीं आएगा। मैं अभी भी कह रहा हूँ, चलिए मेरे साथ।

राज हारकर उस ट्रक में बैठ जाता है। ट्रक ड्राइवर दिखने में ५० साल का गाँव का रहने वाला लग रहा था और शरीर से काफी तंदरुस्त था। राज के मन में रतन की मौत का मंज़र घूम रहा था। अब राज पूरी तरह से डरा हुआ था।

ट्रक ड्राइवर- साहब, आप यहाँ कैसे आए? क्या आपको इस जगह के बारे में कुछ नहीं पता? आपके दोस्त की मौत कैसे हुई?

राज ने गाडी खराब होने और रतन की मौत का पूरा किस्सा बताया तो ट्रक ड्राइवर ने उस चर्च का राज़ खोल दिया।

ट्रक ड्राइवर - जब भारत पर अंग्रेज़ों का शासन था, तब आज़ादी की लड़ाई में बहुत से क्रांतिकारी शहीद हुए और कई निर्दोष भारतीय लोग, अंग्रेज़ों की ग़ुलामी करने पर मजबूर थे। इसपर चर्च के एक प्रसिद्ध ब्रिटिश पादरी विल्सन, अंग्रेज़ों की तानाशाही के खिलाफ थे और हमेशां भारतीय लोगों के पक्ष में रहे। यह देख, ब्रिटिश सरकार को पादरी विल्सन पर शक हुआ, की वो भारतीय लोगों की सहायता कर रहे हैं। इस बात से नाराज़ होकर, एक दिन ब्रिटिश सरकार के एक अधिकारी ने पादरी विल्सन के गले में रस्सी बांधकर उन्हें चर्च के छत पर टंगी बड़ी घंटी पर लटका दिया। पादरी विल्सन ने अँगरेज़ सरकार को पतन का अभिशाप दिया।पादरी विल्सन ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया और उस चर्च को अँगरेज़ सरकार ने खाली करवा दिया।तबसे, पादरी विल्सन की आत्मा उसी चर्च में आजभी भटक रही है और रोज़ आधी रातको चर्च की बड़ी घंटी बजने और बाइबिल पड़ने की आवाज़ आती है। कोई भी उस चर्च के रास्ते से गुजरने की हिम्मत नहीं करता।

राज- लेकिन, तुम कैसे आए यहाँ? तुम्हे डर नहीं लगा?

ट्रक ड्राइवर- साहब, मैं इस रास्ते से गुजरने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करता हूँ। अपने तोह भगवन ही मालिक है।

राज-मेरे दोस्त की मौत, उसका क्या? और तुम्हे चर्च की कहानी के बारे में?

ट्रक ड्राइवर- हम गाँव के लोग बचपन से इन्ही कहानियों को सुनकर बड़े हुए हैं। आप जैसे शहरी लोग नहीं समझेंगे। जब कभी कोई इस चर्च में आया, या फिर पादरी से बात करने की कोशिश की तो ऐसी पुरानी ज़िद्दी आत्माएं किसीकी भी मौजूदगी पसंद नहीं करती, क्यूंकि उस जगह पर सिर्फ अपना कब्ज़ा समझती हैं और कभी छोड़के कहीं नहीं जाती। आपके दोस्त को भी पादरी ने ही मारा। ऊपर से आप दोनों ने शराब पि रखी थी। इस बातसे पादरी ने और भी ज्यादा क्रोधित होकर रतन को मौत के घाट उतार दिया।

राज- इतने सालों से यह चर्च को हटाया क्यों नहीं गया? यह सब कबतक चलेगा?

ट्रक ड्राइवर- हाँ साहब, कई बिल्डरों ने इसे तोड़ने की कोशिश की, पर वो सब अपनी जान गवा बैठे।

राज- लेकिन अगर वह पादरी आत्मा है, तो बाइबिल कैसे पढ़ रहे थे?

ट्रक ड्राइवर- पादरी विल्सन एक प्रसिद्ध पादरी थे और अगर चर्च की मर्यादा का उलंघन करो तोह वह क्रोधित हो जाते हैं। उनकी जगह, उनके पाठ-पूजा में विग्न पड़ता है।

राज और ट्रक ड्राइवर बातें कर ही रहे थे की अचानक ट्रक का balance बिगड़ा। सामने रोड पर पादरी विल्सन की आत्मा खड़ी दिखी और ट्रक एक पेड़ को जाके टकर मार दिया। ट्रक ड्राइवर ने धीमी आवाज़ में हनुमान चालीसा लगा रखा था शायद इसलिए दोनों की जान बच गयी।

उस दिन के बाद राज को भगवान् पर विश्वास हो गया मगर रतन की मौत और चर्च को याद कर, आजभी उसकी रूह कांप उठती है।

-मनप्रीत कौर

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