लव यू जिंदगी

वीमेन्स फिक्शन
5 out of 5 (9 )


कभी कभी कुछ बाते हमारे हमेशा यादो में रहती है। हर पल याद आती है। दिल को जो बाते छू जाती है, उसे हमारी यादो में हमारे पलो में अपने पास हमेशा रखनी चाहिए।

और जो बाते हमें परेशान करती है, दुःख देती है, उन्हें खुदके करीब नहीं आने देना चाहिए. उसे खुदसे दूर जाने दो।

मुस्कुराहट को हमेशा अपने करीब रहने दो,अपने दिल पर उसे पूरी तरह से छा जाने दो।

अपने दिल की घबराहट को कही दूर चले जाने दो।

और अपने इस जिंदगी को इस तरह प्यार करो की, दिल से बस यही आवाज आए।

लव यू जिंदगी।

लव यू जिंदगी।

क्यों ना, हम भी अपने जीवन को ऐसे ही सजाये .........।

इस नए संगीत ने, जीवन जीने के इस गाने के मतलब ने, कितनी सहजता से हमें जीवन जीने का तरकीब सिखाया है। सुनो तो बस लुभावना यह एक संगीत है पर, इसने कितनी सुंदर बात कही है।

इस नए गाने की तरह अपने जीवन का भी सफर हम सब को नयी उमंग से जीना चाहिए

यह संगीत जीवन जीने के ढंग को अपने तरीके से सम्पूर्णता प्रदर्शित कर रहा है।

ऐसे ही जीवन को जी रही हमारी इस कहानी की, "आरती "

आरती उम्र ३५ वर्ष

आरती ने भी,अपने जीवन को इसी संगीत की तरह ही सजाने की कोशिश की है।

आज वह सिंगल है, पर पूरी तरह से अपने आप को परिपूर्ण महसूस करती है ।

इसी ३५ वर्ष आरती की संघर्षभरी व जोश पूर्ण कहानी आज आप सभी के सामने प्रस्तावित कर रही हु, शायद हमें भी कुछ सिख मिल जाये

एवंम कठिन परिस्थिति का सामना करने का हौसला मिल जाये।

आरती के कॉलेज की पढ़ाई का आखरी वर्ष था। इतने वर्ष साथ रहे आज सब दोस्तों के साथ आरती का आखरी दिन था, जो सब दोस्तों ने एक साथ जश्न करने का सोचा नजाने फिर कौन कहा निकल जाये फिर किसी से दोबारा मुलाकात हो न, हो इसलिए सब दोस्तों ने राहुल के फार्म हाउस पर पार्टी करने का निश्चित किया।

राहुल जो आरती के साथ ही पढ़ रहा था जो की, उसका एक अच्छा दोस्त तो था ही, पर दोनों में प्यार भी था।

राहुल के फार्म हाउस जाने के लिए सब ने टूव्हीलर का चयन किया, ताकि रास्ते में एक साथ जाना भी हो, बातें भी हो और रास्ते का आनंद भी ले पाए।….

पर शायद यही गलती हो गयी थी… सभी से!!!!!!!

वह इन सभी पलो को यादगार बनाना चाहते थे। और सच में यह दिन सभी के, जीवन भर के लिए यादगार भी बन गया।

उस दिन सभी अपने अपने घरो से सुबह ही निकल पड़ते है। बिच रास्ते में सब मिलते है, और वही से एक साथ में निकल पड़ते है, लेकिन राहुल एक दिन पहले ही अपने फार्म हाउस पहोच चूका था, क्योकि उसे वहाँ पार्टी की व्यवस्था करनी थी।

सभी वहाँ पोहचते है। राहुल के फार्म हाउस से वहाँ का नजारा बहुत ही लुभावना था। सभी ने बहोत आनंद लिया।, बातें की, मस्ती की,अच्छा अच्छा खाना खाया और अपने आगे की लाइफ के बारे में भी चर्चा की ताकि सभी को कुछ न कुछ आइडिआ मिले की आगे हमें क्या करना ठीक रहेगा ।

इन सब बातो के बिच आरती और राहुल ने भी अपनी आगे की लाइफ के बारे में बातें की और कहा सब कुछ ठीक ठाक होने पर हम अपने परिवार को अपने बारे में बताएँगे इन सब पर भी उन्होंने चर्चा की।

पर, जीवन के कुछ राह में सफर अधूरा ही रह जायेगा यह किसने सोचा था………….

और सही भी है ना.!!!!

हमें हर वक्त जज्बातो में बहना ठीक नहीं होता, कभी कभी कुछ फैसले व्यावहारिक दृष्टी से लेने होते है। और वह सभी के लिए सही भी होते है ।

यह पार्टी रात होने से पहले ख़त्म हो चुकी थी। फार्म हाउस हाइवे से दूर होने के कारण रास्ते में ट्रैफिक ना मिले इसलिए सभी ने जल्दी निकलने का फैसला किया और सब पार्टी खत्म करके अपने घरो की और निकल पड़े। बिच रास्त में हाइवे स्टार्ट होने पर सभी एक दूसरे के आगे पीछे चलने लगे पर सामने से एक कार कण्ट्रोल से बहार होकर विपरीत रास्ते में आगयी जहा उसने आरती की स्कूटी को जोरदार टक्कर दी इसके पहले की लोग कुछ समझ पाते आरती हवा में उड़ती रास्ते के दूसरी और जाकर गिरी सब चिल्लाने लगे रास्ते में सब तरफ हलचल मचने लगी….

आरती बेहोश होकर रास्ते में गिर पड़ी सब ने उसे उठाया और हॉस्पिटल पोहचाया ।

हॉस्पिटल पहुंचते ही जब आरती की आँखें खुली तो उसने खुद को हॉस्पिटल के बेड पर पाया और उसने देखा की उसकी माँ उसके बगल में बैठी रो रही है ।

उसने अपनी माँ को कहा की, माँ रोने की जरुरत नहीं है। में अभी ठीक हु तभी उसकी माँ और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी । माँ को संभालने के लिए जब आरती ने खुद को उठाने की कोशिश की, तो वह खुद को उठा नहीं पा रही थी तब डॉक्टर ने उसे कहा , दुर्घटना की वजह से आपके निचले हिस्से को गहरा जख्म हो गया है। जिसके वजह से आपका निचला हिस्सा सुन्न पड चूका है। अब आप उठ नही पाओगी । आपको आपके हर काम के लिए किसी की सहायता की ज़रूरत पड़ेगी । और यह सुनकर आरती रोने लगी की, अब मेरा क्या होगा। एक की पल में जीवन के मायने बदल गए, एक ही पल में उसकी जिंदगी ने अलग मोड़ ले लिया ।

तीन दिन बाद आरती को हॉस्पिटल से छुट्टी दी गयी और घर लाया गया । उसकी माँ और उसके पिताजी दोनों ही हमेशा आरती के इर्द गिर्द रहने लगे उसके हर काम में उसकी मदद करने लगे उन्होंने उसे कभी भी अकेला नहीं छोड़ा पर, इस बात की, तकलीफ उन्हें भी हो रही थी, और आरती को भी । कल तक जो अपने भविष्य के बारे में सोच रही थी, अब वह अचानक मेरा क्या होगा इस सोच में लग गयी थी।

रोज़ घर में लोगो का आना जाना होने लगा।

लोगो की बाते सुन कर वह और भी परेशान होने लगी सब आकर बस एक ही बात करते थे।

की, अब इसका क्या होगा यह सुन उसके माता पिता और भी चिंतित हो जाते थे।

पर, वह आरती के सामने कुछ भी जताते नहीं थे, इसी बीच एक दिन आरती के सारे दोस्त उसे मिलने आये तब आरती की नज़र राहुल को ढूंढ रही थी। तब दोस्तों ने कहा राहुल ने तुमसे मिलने और तुमसे कोई भी रिश्ता रखने से मना कर दिया है, इसलिए वह तुमसे मिलने नहीं आया ।

आरती को इस बात का बहुत दुख हुआ वह चाहती थी की, राहुल आकर एक बार बस उससे मिले ।

पर यह सुनकर वह और भी टूट चुकी थी की, वह उससे मिलना नहीं चाहता,सब दोस्तों के जाने के बाद आरती गुमसुम सी हो गयी वह मन ही मन कुछ सोचने लगी की अब में जीकर क्या करू राहुल ने भी मेरा साथ छोड़ दिया और माँ बाप पर भी मै बोझ बन गयी हु।

अब मेरा ऐसा रहना ठीक नहीं होगा, और फैसला करती है की, अब उसे नहीं जीना फिर वह

बिस्तर पर ही पड़े एक कपडे को उठाति है, और उस से अपना मुँह बंद कर सांस रोकने की कोशिश करती है, और यह करते वक़्त उसे एक अंदर से आवाज़ आती है ।

" की नहीं रुको ये क्या कर रही हो तुम यह सही नहीं है "

इस परेशानी का हल यह नहीं है इससे तुम तो अपनी परेशानियों से मुक्त हो जाओगी पर जो दर्द तुम अपने माँ बाप को दे जाओगी वह यह सहन नहीं कर पाएंगे और वो तुरंत रुक जाती है, की सच में वह क्या करने जा रही थी ।

सोचती है की, मेरी अब जैसी भी हालत है कम से कम में उनके साथ तो रहूंगी मेरे अलावा उनका है ही कौन भले ही में आज शरीर से अपाहिज हो गयी हु पर दिल और दिमाग से नहीं वह एक लम्बी सांस लेती है,और यह सोचती है की मैं इस चुनौती को स्वीकार करुँगी और इस बात को समझती है की,उसकी वजह से अगर उसके माँ बाप को परेशानी हो रही है, तो वह उनके साथ रहकर उनकी परेशानी कम करेगी अपने जीवन जीने का दृष्टिकोण बदल देगी कल तक जो उसकी सोच थी वह आज भले ही बदल गयी है, लेकिन उसने जीना नहीं छोड़ना है ।

इसमें गलती किसी की नहीं। जिंदगी ने अगर उसे यह चुनौती दी है, तो उसे वो स्वीकारेगी नाके हार मान जाएगी। अब यही उसकी जिंदगी है। जानती थी की,उसके लिए यह मुश्किल घडी है पर, उसे यह स्वीकार करनी थी । जो मुश्किल , तो है पर नामुमकिन नहीं है ।

अब उसे खुद को इस अपाहिजता के साथ जीना है, पर नयी उमंग,नयी शुरुवात, नए संकल्प से करना है ।

वह रोज सुबह जल्दी उठकर खुद के काम करने का प्रयास करने लगी माँ की सहायता से अपने पैरो पर खड़े होने की कोशिश करने लगी ।

उसने लोगों का अपने घर में आना जाना बंद कर दिया था। ताकि वे अपनी पीड़ा को कम कर सकें।

वह अपने अपाहिजता को मात देने लगी उसने पूरी तरह ठान लिया था मुझे जीना है । नाकि लोगो के क्षमा,दया का पात्र बनना है, उसने जीना सीखा, खुद के लिए और खासकर अपने माता पिता के लिए जिन्होंने इस अवस्था में भी कभी उसे अकेला नहीं छोड़ा। यहाँ उसने यह समझ लिया की, दुनिया में सिर्फ माँ बाप का प्यार ही मुफ्त में मिलता है बाकी सब के लिए किंमत चुकानी पड़ती है ।

आप कितने भी कमज़ोर पड जाये माता पिता ही है, जो ऐसी हालत में आपको हर वक्त साथ देते है, आपका साथ नहीं छोड़ते और उन्ही के प्यार से आज वह एक नामी कंपनी में मैनेजर की पद पर है, उसे खुद पर नाज़ है की, वह किसी पर भी निर्भर नहीं है, और आज अपाहिज होने के बावजूद भी उसने अपनी लगन अपनी मेहनत से इन सब हालातो को मात दी है, आज वह अपने घर में भी, अपने सभी काम खुद करने में सक्षम है ।

और उसके माता पिता को किसी की, भी कोई बात सुनने की जरुरत नहीं है, जो कभी उनसे कहते थे अब इसका क्या होगा ।

और आज वह अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता पिता को देती है, जिन्होंने उसे इस असली जीवन की परीक्षा में उसका साथ दिया उसे टूटने नहीं दिया उसे हिम्मत दी और आज अपने सभी सपने पुरे करने की काबिलियत उसमे बरक़रार रखी।

इस पर गाने की आगे की पंक्तियों से यह सिख मिलती है।

की बुरे वक्त के साथ जो बदल जाये उनका साथ उनका हाथ वही छूट जाये यह बेहतर है उसे वही छोड़ देना ही ठीक होता है। जो बुरे वक्त में भी साथ निभाए हर वक्त आपके साथ रहे वही हमारे अपने है उनका साथ कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए।

जिंदगी की यह राह कभी सीधी है कभी टेढ़ी है पर चलना हमें हमेशा उसपर ही है बस कब कौन साथ निभाए यही असल में वक्त बताता है ।

ऐसे बेवजह के रिश्तो में उलझकर अपने जीवन की डोर छोड़ देना यह फैसला गलत है।

रिश्ता वही सही है,जो तुम्हे एहमियत दे बुरे वक्त में भी तुम्हारा साथ ना छोड़े, बस वही अपने है और कोई नहीं।

इस तरह आरती ने अपनी जीवन की कठिन परीक्षा को परखा और उसे खुदपर हावी नहीं होने दिया।

आज आरती की संघर्ष की कहानी हमें यही सिखाती है की, हमें भी जीवन में हार नहीं माननी चाहिए। परिस्थितिया कैसी भी हो उन्हें स्वीकार कर खुदको मजबूत बनाना चाहिए।

“जीवन में अच्छे बुरे दिन तो आते ही है

हर रात के बाद सवेरा आता ही है

बुरे दिन में हौसला गवाकर हार मान जाना

यह उसका हल बिलकुल नहीं है

डटकर सामना कर बुरे वक्त को

अच्छा बनाना यही असल में नयी

शुरुवात है”

যেই গল্পগুলো আপনার ভালো লাগবে

X
Please Wait ...