रिहाई

रहस्य
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कितना आसान होता है दूसरों का सलाह देना हम एकदम एक्‍सपर्ट की तरह बात करते हैं क्‍या हुआ, क्‍यों हुआ, क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं करना चाहिए सबका हिसाब किताब करके आसानी से समझा देते हैं, आपके साथ भी होता है ना ऐसा?

चलिये अब सिचुएशन को थोड़ा उल्‍टा कर देते हैं, बात आपकी अपनी हो, प्रोब्‍लम आपकी खुद की हो तो क्‍या वैसे ही हिसाब किताब हो जाता है जैसे किसी दूसरे के लिये हो, क्‍या तब एक्‍सपर्ट की तरह बोलने वाला इंसान नादान बनकर सोचने समझने की शक्‍ति को खोता नहीं दिखता?

ऐसी ही हालत में मैं हूं…. सोच समझ सब कुछ जैसे फ्रीज हो गयी है…. माइस 15 डिग्री टेंपरेचर में और क्‍या होगा?

अरूणाचल प्रदेश के शांत और सुस्‍त तवांग में हूं मैं,,,, कल रात ही फिर से बर्फ पड़ी है और मैं कुछ दिन के लिये यहां फंस गया हूं,,, घूमने आया था यहां पिछले हफ्ते अपने कुछ दोस्‍तों के साथ, वो सब बर्फ गिरने के पहले ही वापस लौट गये पर मैं जा नहीं सका, क्‍यों रूक गया ये समझने की कोशिश जारी है.

पता है कभी कभी हमें चुनना पड़ता है अपनी हकीकत और सपनों के बीच, मैं भी इसी दोराहे पर हूं, जानता नहीं सच क्या है, पर जो आस पास हो रहा है वो किसी बुरे सपने से कम नहीं.

मुझे कुछ आवाजें सुनाई देती है, कभी कभी कुछ तस्‍वीरें भी दिखती हैं जो समझ से परे होती हैं, पर कुछ दिन बाद वहीं सब सामने दिखने लगता है, कभी अच्‍छा कभी बुरा… खैर डरिये मत मैं कोई भूत या आत्‍मा की बात नहीं कर रहा. इसे आप सिक्‍स्‍थ सेंस कह सकते हैं, कभी कभी ये जागृत हो जाती है…. यूं ही अचानक कुछ कहती है…. पर जरूरी नहीं की हर कोई इसे समझ सके, मेरे साथ क्‍यों हो रहा है, ये सोच सोच कर मैं परेशान हो जाता हूं लेकिन अब यहां, तवांग आने के बाद लगता है जैसे सारे लिंक जुड़ गये हैं,

ओह लगता है बारिश शुरू हो गई, मतलब अब मैं अपने कमरे से बाहर भी नहीं जा सकता, उफ्फ ये सब क्‍यों हो रहा है? एक तो मेरे दिमाग में बजती ये आवाजें और उस पर ये, क्‍या करु कुछ समझ नहीं आ रहा.

बहुत देर तक यू ही खाली बैठे रहने के बाद तीस साल के श्रियन ने टीवी ऑन कर दिया, कुछ देर बाद उसके दरवाजे पर दस्‍तक हुई.

मैं तुला हूं आप मुझे नहीं जानते पर मैं आपको अच्‍छी तरह से जानती हूं क्‍या मैं अंदर आ जाउं?

तुला, ये नाम तो पहले कभी नहीं सुना पर इस लड़की का चेहरा देखा हुआ सा लग रहा है कौन है ये? श्रियन खुद से ही सवाल कर रहा था.

और इतने में तुला कमरे के अंदर दाखिल हो चुकी थी.

आपके सारे दोस्‍त तो वापस चले गये पर आप नहीं गये क्‍यों ?

तुला श्रियन से ऐसे बात कर रही थी जैसे उसे बहुत पहले से जानती हो, पर श्रियन हैरान सा उसे देख रहा था.

क्‍या मैं आपको जानता हूं?

हां भी और नहीं भी, तुला का ये जवाब श्रियन को और हैरान कर गया. उधर तुला पूरे कमरे में घूम घूम कर हर चीज को बहुत गौर से देख रही थी.

“आज फिर वही सपना देखा धडधड़ाकर गिरते बड़े बड़े पत्‍थर और कुछ चीखें फिर मुझे सोने नहीं दे रही…”

“अरे अरे ये क्‍या कर रही हो, ये मेरी डायरी है तुम इसे नहीं पढ़ सकती”, श्रियन ने तुला के हाथ से डायरी खींचते हुए कहा

“दो साल पहले ऐसा ही हुआ था ना, वो जो पुल तुमने डिजाइन किया था वो गिर गया था, क्‍या उस वक्‍त कोई चीख सुनी थी तुमने, नहीं ना? कैसे सुनते, तुम तो उस दिन अपने दोस्‍तों के साथ अपना बर्थे डे मना रहे थे, किसी डिस्‍को में शराब पीकर नाच रहे थे, तुम्‍हें कैसे सुनाई देती चीखे उस म्‍यूजिक के शोर में”, तुला का ये तल्‍ख लहजा और उसकी आखों की कड़वाहट श्रियन को उन्‍हीं आवाजों की तरह लग रही थी जो दो साल से उसे परेशान कर रही थी. वो हर वक्‍त साथ रहने वाला साया क्‍या तुला का था? ये बात सोचते ही श्रियन चक्‍कर खाकर गिर गया.

कुछ देर बाद जब उसकी आंख खुली तो तुला वही सामने कुर्सी पर बैठी कॉफी पी रही थी.

“ये नींबू पानी पी लो तुम्‍हें अच्‍छा महसूस होगा”, तुला ने गिलास आगे बढ़ाते हुए कहा

श्रियन ने पहले खुद को संभाला और फिर अपने सवाल दागने शुरू किए.

“तुम हो कौन? ऐसे अचानक आकर ये सब बातें करने का मतलब क्‍या है? क्‍या जानती हो मेरे बारे में? क्‍या करने आई हो यहां?”

तुला मुस्‍कुराने लगी, “पता है उस हादसे के एक साल बाद मुझे पता चला कि तुमने वो पुल डिजाइन किया था, तब से कई बार कोशिश की तुम्‍हारे सामने ऐसे आकर खड़े होने की लेकिन आ नहीं पाई बहुत गुस्‍सा था, नफरत थी, सोचा कैसे थोड़े से पैसे कमाने के लिये लोगों की जान से खेल सकता है कोई?”

“मैंने वो पुल पैसों के लिये नहीं बनाया था और ना ही उसके डिजाइन में कोई गड़बड़ थी, गड़बड़ उस लालची ठेकेदार के घटिया मटिरियल में थी, तुम्‍हें कोई आइडिया नहीं मैंने किस हद तक इसके लिये लड़ाई लड़ी, हर रिश्‍ता तोड़ दिया उनसे, मेरे अपने पापा से दूर हो गया मैं क्‍योंकि उन्‍होंने ये पुल बनाने में अपनी इंसानियत तक बेच दी पर तुम कैसे समझ सकती हो ये?”

“श्रियन, मुझसे बेहतर कौन समझ सकता है ये दर्द, तुम्‍हारे पापा ने तो एक पुल में मुनाफा कमाने के लिये उसे कमजोर बनाया, पर मेरे पापा ने तो उस पुल के नीचे दबी लड़की को जीते जी मरा साबित कर दिया और वो भी कुछ पैसों के लिये”

श्रियन गौर से तुला को देखने लगा ये चेहरा उसे पहले भी दिखा था. उस तस्‍वीर में जो उस पुल हादसे में मरने वाली लड़की की थी, वो तस्‍वीर जिसे अखबार में छपने से रोकने के लिये उसके पापा ने कई लोगों को खरीदा था, खबर दबा दी गई थी किसी को पता भी चला कि किसी की जान ली थी उस पुल ने.

“तुम थी वो लड़की, तुम जिंदा ?

“हां लेकिन अब मेरी पहचान बदल गई है नाम बदल गया है, कोई नहीं जानता मुझे, छोटा सा हादसा मानकर सब भूल गये, मैं एक साल तक एक अंजान जगह रही, पिछले साल जब सब पता चला तो सब कुछ छोड़़ कर वापस आई.”

“पर तुम मेरे बारे में इतना सब कैसे जानती हो? हर डाक्‍यूमेंट से तो मेरा नाम गायब कर दिया गया था, किसी को नहीं पता कि मैं उस हादसे से जुड़ा था”

“पता है श्रियन, तुम्‍हारी दोस्‍त और डॉक्‍टर रीया को, उन्‍हें तुमने सब बताया है”

“रीया को तुम कैसे जानती हो?”

“जब वापस आई तो ट्रोमा में थी इतनी हिम्‍मत नहीं थी कि उसी जगह वापस जा पाती, डॉक्‍टर रीया ने मेरी बहुत मदद की, वो बहुत पहले से जान गई थी कि हम दोनों उनके पेशंट हैं लेकिन उन्‍होंने कभी बताया नहीं, हम दोनों कई बार आमने सामने आये उनके क्‍लीनिक में, पर ना तुम मुझे पहचानते थे और ना ही मैं”

“तो अब यहां क्‍यों हो तुम? मुझसे बदला लेने आई हो?”

“बदला? कैसा बदला श्रियन? बदला लेने नहीं आई मैं यहां और ना ही तुम्‍हें ये बताने आई हूं कि मैंने तुम्‍हें माफ किया, हम दोनों जानते हैं कि उस दिन जो हुआ उसमें गलती किसकी है पर किसी को सजा देने से उसका अपराध कम नहीं होता, तुम तय करो क्‍या करना चाहते हो, अपने दिमाग में बजती आवाजों से भागना चाहते हो या फिर सही जगह आवाज उठाकर दोबारा ऐसा होने से रोकना चाहते हो”

श्रियन तुला की बातें सुन रहा था लेकिन अचानक उसका चेहरा उसे धुंधला दिखाई देने लगा कुछ सैकेंड में वो फिर बेहोश हो गया.

आंख खुली तो सर में तेज दर्द था. उसने कमरे में हर तरफ देखा लेकिन तुला वहां नहीं थी वो जा चुकी थी, श्रियन टेबल के पास जाकर बैठ गया, उसे लगा कि वहां कुछ था जो अब नहीं है

“मेरी डायरी, कहां गई? यही तो थी, कहां गायब हो गई? क्‍या तुला उसे ले गई? पर उसका तो नंबर भी मेरे पास नहीं कहां ढूंढूगा उसे?”

श्रियन को याद आया कि तुला ने रीया का नाम लिया था उसने फौरन रीया को फोन किया

रीया तुम्‍हारे पास तुला का नंबर होगा ना वो यही है तवांग में मैं मिला उससे प्‍लीज मुझे उसका नंबर दे दो वो मेरी डायरी ले गई है मुझे वापस चाहिए वो

“मैं किसी तुला को नहीं जानती श्रियन”

“तुला वही लड़की रीया, जो उस पुल हादसे में मरी थी, पर वो मरी नहीं जिंदा है”

“मरे हुए लोग जिंदा नहीं होते श्रियन, वापस आ जाओ तुम्‍हारी दवा बदलनी पड़ेगी” रीया ने कहा

श्रियन शॉक हो गया, लेकिन उसे पूरा यकीन था कि उसने जो देखा और सुना वो कोई सपना नहीं था, उसने गहरी सांस ली और अपना लैपटॉप ऑन किया.

श्रियन अब समझ गया था कि अगर उसे अपने दिल दिमाग से उस हादसे के बोझ को हटाना है तो सच सबके सामने लाना ही होगा. उसने उस हादसे की पूरी डिटेल लिखी और उससे जुड़े सभी दस्‍तावेज की कॉपी बनाकर उसे दिल्‍ली के पुलिस कमिश्‍नर को मेल कर दिया. उसने तुला की कहानी को भी लिखा और आग्रह किया कि पुलिस उसे ढूंढकर उसे उसकी पहचान वापस लौटाने में मदद करें.

पांच दिन बाद जब श्रियन दिल्‍ली लौटा तो पुलिस उसका एयरपोर्ट पर इंतजार कर रही थी. एयरपोर्ट की भीड़ में उसे चही चेहरा फिर दिखा, तुला उसे देखकर मुस्‍कुरा रही थी, आज उसे भी रिहाई मिली थी.

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