शिकारी कौन

रहस्य
5 out of 5 (7 Ratings)
Share this story

एक छोटा सा गाँव था। उस समय लगभग पाँच सौ घर रहे होंगे। यह 1970 के दशक का समय था। यह कहानी बिलकुल मनोरंजक है और ग्रामीण परिवेश को चित्रित करती है। तो उसी गाँव में कहानी के चरित्र नायक रामलोचन बाबू रहते थे। स्वभाव से टमाटर थे। यानि कि सभी सब्ज़ियों में मिल जाते थे। गाँव में कोई भी उनका दुश्मन न था। सभी दोस्त ही थे। होते भी क्यों न ? वो कभी किसी से सीधे रार नहीं ठानते थे। गाँव में ज्यादातर पुरुष लोग ‘डेरा’ पर रहते थे। ‘डेरा’ मतलब घर से कुछ दूर खेत में बना हुआ एक दूसरा छोटा घर जहाँ गाय - बैल आदि भी रहते थे और बच्चे पढाई करते थे।

हमारे कथानायक रामलोचन बाबू को रेडियो सुनने का बहुत शौक था। रेडियो पर उस समय बी बी सी न्यूज़ की बहुत धाक थी। बी बी सी मतलब सत्यता का प्रमाण। एक और प्रोग्राम आता था रेडियो पर "बिनाका गीत माला" जिसे अमीन सयानी प्रस्तुत करते थे, बहुत ही ख़ास अंदाज़ और आवाज़ में। वो “भाइयों और बहनों” के बदले “बहनों और भाइयों” बोला करते थे। तब के रेडियो श्रोता उन्हें आज भी बड़े दिल से याद करते हैं। हाँ, तो रामलोचन बाबू बी बी सी समाचार और बिनाका गीत माला जरूर सुनते थे। ज्यादा पढ़े - लिखे नहीं थे लेकिन अखबार पढ़ने का शौक रखते थे। मैंने उन्हें कभी कोई किताब पढ़ते नहीं देखा। तो रामलोचन बाबू जब शाम के समय खाली बैठते थे तो कुछ अन्य लोग भी ग्रामीण चाल चलन से पास आकर बैठ जाते थे। कथा नायक समाचारों की चर्चा करके गुरुता का अनुभव करते थे।

रामलोचन बाबू की एक और खूबी थी। वे दो ऐसे व्यक्तियों के परम मित्र थे जो आपस में परम शत्रु थे। चलिए इनका नाम भी रख लेते हैं, सज्जन सिंह और कज्जल सिंह। इन दोनों के बीच अहम् की लड़ाई थी और प्रबल थी। लेकिन कथानायक इन दोनों शत्रुओं के परम मित्र थे। कैसे थे ? नीति तो नहीं कहती। लेकिन थे और आजीवन रहे। सज्जन सिंह समझते कि कथानायक कज्जल सिंह की गुप्त सूचना उन्हें देते हैं और कज्जल सिंह समझते कि सज्जन सिंह की गुप्त सूचना उन्हें मिलती है, और इसी विश्वास पर वह दोस्ती कायम थी। सज्जन सिंह तो भाई में अकेले थे लेकिन कज्जल सिंह चार भाई थे। बाद में वो चारों दो गुट में बँट गए और रामलोचन बाबू दोनों ही गुट के मित्र बने रहे। हालाँकि बाद में एक सूचना लीक हो जाने के कारण एक गुट का विश्वास उठ गया था।

रामलोचन बाबू में एक अन्य खूबी भी थी। उनके पास सभी तरह के लोग बैठते थे। अच्छे, बुरे सभी। उनमे से कुछ, गाँव के तत्कालीन चोर भी थे। चोरों का भी उनपर अटूट विश्वास था। कुछ चोर तो गाँव एवं आस पास के गाँवों की घटना उनको सुना जाते थे। कभी - कभी तो यहाँ तक बता जाते थे कि रात में चोरी कहाँ पर करेंगे। लेकिन उनका प्लान कभी भी रामलोचन बाबू के कारण विफल नहीं हुआ। आखिर यही तो खासियत थी उनकी।

कहानी में अब एक और किरदार शामिल होते हैं। उनका नाम था धौताल सिंह। धौताल सिंह का एक बगीचा था जिसमें आम, कटहल, महुआ आदि के पेड़ लगे थे। गाँव में कई किसानों के बगीचे हुआ करते थे। धौताल सिंह के पेड़ में कटहल, नीचे की तरफ ज्यादा फलता था। एक दिन दो - तीन चोर, रामलोचन बाबू के पास बैठे थे। एक चोर बोला "हुजूर, धौताल बाबू का आम और कटहल बहुत फला हुआ है। रात में तोड़ लेंगे। संयोग वश कुछ देर बाद धौताल सिंह भी घुमते फिरते वहीं आकर बैठ गए। चोर की दाढ़ी में तिनका। वो लोग धीरे - धीरे वहाँ से खिसक लिए। धौताल बाबू बहुत देर तक बैठे रहे। समाचार सुना गया। फिर जब चलने को हुए तो रामलोचन बाबू ने टोका, बोले धौताल कटहल बहुत नीचे फला है। काँटे का बाड़ लगा दीजिए, नहीं तो किसी को लोभ आएगा, तोड़ लेगा। धौताल बाबू बोले, हाँ, सही बोल रहे हैं। कल दिन में कुछ करते हैं।

रात में ही नीचे का कटहल और आम सारा गायब हो गया। धौताल बाबू बगीचे से लौट रहे थे, मुँह लटकाए। रामलोचन बाबू से भेंट हो गई। बोले रात में सारा आम और कटहल तोड़ लिया चोरों ने। रामलोचन - हमने तो बोला ही था आपको। धौताल - हाँ आपने तो सही बोला था।

रामलोचन बाबू को यही फायदा था कि उनके बगीचे में कभी चोरी नहीं होती थी। चोरों को भी लगता था कि कहीं कोई बात होगी तो उन्हें जानकारी मिल जाएगी।

समय यूँ ही बीतता रहा। गाँव में मिर्च की अच्छी खेती होती थी। किसान लोग खलिहान में मिर्च तैयार करके बनारस, कलकत्ता, दिल्ली की मंडियों में बेचने जाते थे। रामलोचन बाबू भी मिर्च की खेती करते थे। एक बार उनके खलिहान से तैयार मिर्च की ढ़ेरी से रात में मिर्च की चोरी हो गई। गाँव भर में खोजा गया। कहीं पता नहीं चला। सामाजिक रूप से कई घरों की तलाशी भी हुई। नहीं मिला। लेकिन उनके घरों की तलाशी नहीं हुई जो चोरी करने वाले लोग रामलोचन बाबू के यहाँ बैठा करते थे।

क्या साँप भी कभी दूध का मान रखता है ?

अब मैं यह आप पाठकों के विवेक पर छोड़ता हूँ कि शिकारी कौन था ? गावों में ऐसा वाकया आज भी होता है। मुझे तो एक अंग्रेजी कहावत याद आती है कि " ए मैन हू रन्स विथ द हेयर एंड हंट्स विथ द हाउंड।"

Stories you will love

X
Please Wait ...