JUNE 10th - JULY 10th
रीगर्मियों का मौसम हो और शाम का वक्त मानो दिन ढलने का नाम ही न लेता हो।शाम के सात आठ बजे तक तो ऐसा लगता है कि जैसे रात अभी हुई ही नहीं। और शाम का यही समय बच्चो को सबसे अच्छा लगता है।जिसमे वह जी भर के खेलते हैं और बच्चो के खेलने का यह नज़ारा सचमे बड़ा ही दिलकश नजर आता है।ऐसे ही एक गांव मे शाम के समय कुछ बच्चे मैदान मे मज़े से खेल रहे थे,और उन्हें यूं खेलते हुए एक सात साल का लड़का जिसका नाम नमन था देख रहा था। वो एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे बैठा था।उसका भी उन बच्चों के साथ खेलने का बहुत दिल कर रहा था।पर वो चाह कर भी उनके साथ खेल नही सकता था,क्योंकि उन बच्चों के घर वालो ने उन्हें उसके साथ खेलने से मना किया था।वो अक्सर उस पेड़ के नीचे बैठ कर यही सोचता रहता कि क्यों कोई उसके साथ नहीं खेलता क्या वो इतना बुरा है।दरअसल नमन अक्सर अपने दोस्तों के साथ एक मॉन्स्टर के बारे में बात किया करता था।वह मॉन्स्टर जो उसने कभी देखा नहीं पर उसके बारे में उसने अपनी मां और बड़े भाई से सुना ज़रूर था।वो अपने दोस्तों को बताता था कि एक मॉन्स्टर कैसे कभी कभी रात को उनके घर आता है,और उसकी मां और बड़े भाई को चोट पहुंचा कर चला जाता है। उसके दोस्त उसकी ये बाते सुनके डर जाते और उसकी शिकायत अपने घरवालों से करते।शायद इसीलिए अब उसका कोई दोस्त ना था।उस दिन भी वो उस पेड़ के नीचे बैठ कर यही सोच रहा था कि कैसे वो अपनी मां और बड़े भाई को को उस मॉन्स्टर से बचाए।उसकी मां जो गांव के स्कूल में चपड़ासी का काम किया करती थी बेहद नेक स्वभाव की थी और अपने दोनो बेटो से बेहद प्यार करती थी।उसका बड़ा भाई पारस जो लगभग पंद्रह साल का था,पास ही के शहर में एक दुकान पर लगा हुआ था।आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उसके बड़े भाई ने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।नमन के पिता भी थे जो कि एक रिक्शा चालक थे।नमन अक्सर यही सोचता कि वो उस मॉन्स्टर के बारे मे सब कुछ अपने पिता को बता दे ताकि वो उस मॉन्स्टर को मार कर भगा दे,पर उसकी अपने पिता से कभी खुलके मुलाकात हुई ही नहीं।उसके पिता देर रात को घर आया करते,जब नमन सोया होता था और सुबह नमन के स्कूल जाने के बाद उठते।नमन की अपने पिता के साथ यूं तो बेहद कम यादें थी पर फिर भी वह उनकी बड़ी इज्जत करता था और वह चाहता था कि वह बड़ा हो कर अपने पिता जैसा मेहनती और अच्छा इंसान बने।यही सब सोचते सोचते वह अपने घर आ गया और घर आके अपनी मां से उस मॉन्स्टर के बारे में पूछने लगा।उसकी मां उसकी बात को नज़र अंदाज़ करती हुई,उसको हांथ मुंह धोके खाना खाने को कहतीहै।नमन भी चुप चाप अपनी मां की बात मानकर खाना खा लेता है और अपने स्कूल का कुछ काम करने लग जाता है।तकरीबन साढ़े आठ उसका भाई घर आता है,और भाई को देख के वो झट से उसके पास जाता है जो उसके लिए एक खिलौना लाया था,जिसे मिलने के बाद वो और भी ज्यादा खुश हो जाता है।पारस घर का कुछ सामान जो वो बाज़ार से लाया था अपनी मां को देता है और हाथ पांव धोकर खाना खाता है।रात के दस बजने वाले थे पारस नमन को सोने के लिए कहता है।जिसपे नमन कहता है बस थोड़ी देर और वो इस खिलौने के साथ खेलेगा,और वैसे भी पापा आने ही वाले होंगे,आने दो उन्हें आज उन्हें उस मॉन्स्टर के बारे में सब कुछ बता दूंगा।यह सुनके पारस पहले तो थोड़ा घबराता है और फिर थोड़ा गुस्सा करते हुए नमन को सोने लिए कहता है।कल देखना पापा को आपकी भी शिकायत करूंगा फिर वो आपको मारेंगे कहता हुआ नमन सो जाता है।अगले दिन सुबह वो अपनी मां के चेहरे पर फिर से चोट के निशान देखता है और कहता है कि ये फिर से उसी मॉन्स्टर का काम है ना,रुको मैं अभी पापा को जगा कर सब बता देता हूं।पर उसकी मां उसे ऐसा करने से रोकती है और स्कूल जाने को कहती है।नमन मूंह लटकाए स्कूल के लिए निकल पड़ता है।उस दिन शाम को फिर से उसी मैदान में बैठे वो वही सब सोचने लगता है।वैसे तो गर्मियों में रात का अंधेरा देरी से होता है पर उस शाम अंधेरा जल्दी होने को था।बादलों की वजह से आकाश में एक लाली सी छा गई तो जो ढलते सूरज की किरणों और बादलों के कारण बनी थी ऐसा लग रहा था कि मानो चारों और खून ही खून हो जो एक अनहोनी का एहसाह करवा रहा था।नमन अपने घर आ जाता है और फिर उसका भाई भी।सब कुछ फिर से वैसे ही होता है वो नमन और उसके भाई का खाना-खाना और नमन का ज़िद करते हुए सो जाना।उस रात भी नमन चैन से सोया था।बाहर बहुत जोरों से बारिश हो रही थी,कि तभी अचानक एक ज़ोरदार बिजली का कड़ाका हुआ।बिजली की उस गर्जन से नमन डर कर उठा और उठ कर जो उसने देखा उसे देख के वो और ज्यादा दहल गया।उसने देखा कि उसके बड़े भाई पारस के हाथ खून से रंगे हुए थे और हर तरफ खून ही खून था उसकी मां भी वही खड़ी थी जिसके कपड़े भी खून से सने थे।नमन यह देख कर चिल्लाता है और पूछता है कि ये सब क्या है।जिसपे उसका भाई कहता है कि उसने मॉन्स्टर को आज खत्म कर दिया अब वो कभी भी हमें तंग नहीं करेगा।नमन यह सुनके और डर से रोने लगता है और अपनी मां के गले लग जाता है।पर उसकी मां तो पत्थर बने,वहां चुप चाप खड़ी थी।अगली सुबह सब कुछ शान्त हो चुका था।रात भर चला वो तूफान अब थम गया था।ऐसा लग रहा था कि जैसे वो तूफानी रात कभी आई ही ना हो।तूफान से गिरे पत्ते और पेड़ों की टहनियां,जो गांव की सड़कों पर बिखरी हुई थी साफ साफ कह रही थी कि,ये तूफान तो फिर भी थम गया,पर जो तूफान नमन के घर कल रात को आया वो अब तक थमा नहीं।बल्कि उस तूफान की हवा कोई दूसरा ही रुख लेने को थी।ऐसा रुख जिससे नमन के भाई,उसकी मां,उसके पिता और खास करके नमन की ज़िंदगी हमेशा के लिए बिखरने वाली थी।धीरे धीरे नमन के घर हुई कल रात वाली घटना की बात सारे गांव में फैल जाती है।उसके घर के बाहर सब गांव वाले इक्कठे हो जाते हैं,और नमन के भाई के बारे में बात करने लगते हैं,क्योंकि उसके भाई पारस को पुलिस हथकड़ी लगा के ले जा रही थी।नमन की मां मूक दर्शक बने यह सब होते हुए देख रही थी।वो तो मानो एक पत्थर की मूर्त बन चुकी थी,एक ऐसी मूर्त जिसे कोई एहसाह ना होता हो।कल रात से ही उसने न तो कुछ बोला और न ही उसके शरीर ने कोई हरकत की थी।वो इस कदर पत्थर बने खड़ी थी,कि उसकी आंख की पुतलियां तक भी नहीं झपक रही थी।इसी बीच बेचारा सात साल का छोटा सा नमन पुलिसवालों को अपने भाई को छोड़ देने के लिए कहता रहा और बार बार बस यही बताता रहा कि उसके भाई ने तो मॉन्स्टर को मारा है तो फिर क्यूं वो उसको लेके जा रहे हैं।नमन के मुंह से उस मॉन्सटर का जिक्र सुनकर गांव वाले आपस में काना फूसी करने लगे।सब अपनी अपनी कहानियां गढ़ने लगे।कोई नमन को पागल कह रहा था तो कोई पारस को,कोई शैतानी ताकत का हाथ बता रहा था तो कोई कुछ और।वही लोगो की बुरी आदत।कही किसी के घर क्या हुआ,क्यूं हुआ,कैसे हुआ यह सब समझने के बजाए लग जाते हैं अपना अपना अनुमान लगाने।यह भी नही सोचते की उस परिवार पर क्या बीत रही होगी।अब इन सब लोगो में से किसका अनुमान सही होगा सबको इसी बात की पड़ी थी।नमन की मां पत्थर बने लोगों की वो तमाम जली कटी बाते सुन रही थी,और सब होते हुए देख रही थी।वो किसी को कुछ भी बताना और सफाई देना मुनासिफ नही समझ रही थी,मानो कि जैसे उसे पता हो की थोड़ी देर में कल रात का राज़ खुलने ही वाला हो।पारस भी चुप चाप पुलिस के साथ जा रहा था।उसके चेहरे पर भी कोई हाव भाव ना थे।ना डर का भाव ना ही कल रात जो उसने किया उस बात की ग्लानि का भाव।वो भी अपनी मां की ही तरह पत्थर बन पुलिस वालो के साथ जा रहा था।नमन अपने भाई को यूं जाता देख बस रोए ही जा रहा उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे।वैसे वो कर भी क्या सकता था आखिर था तो वो एक सात साल का बच्चा ही।अपने हालातों से समझौता किए वो बस रो ही रहा था कि तभी उसकी नजर उसके घर से बाहर आते दो आदमियों पर गई जो सफेद कपड़े पहने उसके घर से बाहर निकल रहे थे।उनके सर पर वो सफेद टोपी,ऐसा लग रहा था कि को किसी अस्पताल के कंपाउंडर हो,आपने हाथों में स्ट्रैचर पकड़े उसके घर से निकले।उस स्ट्रैचर पे एक व्यक्ति लेटा हुआ था जिसका चेहरा सफेद कपड़े से ढका हुआ था।नमन यह देख कर समझ गया कि यह और कोई नहीं बल्कि वही मॉन्स्टर होगा जिसे उसके भाई ने मारा है। नमन उस मॉन्स्टर के पास जाके उसे देखने की कोशिश करता है पर उसे रोक दिया जाता है।वो दोनो कंपाउंडर उस मॉन्स्टर की लाश एम्बुलेंस की ओर ले जा ही रहे थे,कि एक हवा के एक झोंके से उस लाश पर पड़ा वह पर्दा सरक जाता है,जिससे नमन तथा बाकी सभी गांव वालो को उस मॉन्स्टर का चेहरा नज़र आ जाता है।कहने को तो वो महज़ एक हवा का झोंका था पर नमन के लिए वो किसी तूफान से कम न था क्योंकि इस पल के बाद उसकी सारी दुनिया बिखरने वाली थी।उस सात साल के बच्चे को अपनी उम्र से कई गुना ज्यादा बड़ा दुख जो मिलने वाला था।दरअसल वो लाश जो उसने देखी थी वो किसी और कि नहीं बल्कि उसके खुद के पिता की थी। वही पिता जिसे वह अपना सब कुछ मानता था। नमन यह देख के कुछ समझ नहीं पाता और अपनी मां से जाके पूछता है मां भाई ने तो मॉन्स्टर को मारा था तो फिर पापा को ये लोग क्यों लेजा रहे हैं मां बताओ ना मां कुछ तो बोलो मां कुछ तो बोलो मां नमन के ऐसा बार बार कहने पर आखिर कार इस बार उसकी मां अपनी चुपी तोड़ते हुए कहती है कि तेरे पापा ही थे हमारे घर के मॉन्स्टर। वही मॉन्स्टर जिसके नाम से मैं और तेरा भाई डर से सिहर जाया करते थे। वो मॉन्सटर जो अक्सर शराब पीकर या कोई अन्य नशा करके आए दिन मुझको और तेरे भाई को मारता।जिसकी वजह से हमारा सुख चैन, खुशी सब दूर हो गई थी।हां यह वही मॉन्स्टर है बेटा ये वही मॉन्स्टर है।और ऐसा कहते हुए फूट फूट के रोने लगी।वो ऐसे रो रही थी कि मानो सालों से शांत कोई ज्वालामुखी आज सक्रिय हो उठा हो।नमन को तो इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा था।जिस बाप को वो अपना सब कुछ मानता था और बड़ा हो कर जिसके जैसा वो बनना चाहता था,उसका वही पिता उसके घर का मॉन्सटर था।इस बात के एहसास ने उस मासूम को अंदर से तोड़ दिया।पर क्या उसके पिता सच में एक मॉन्स्टर थे,या फिर उन्होंने जो भी कुछ किया वो उनसे किसी ने करवाया हो। करवाने वाला भी एक ऐसा मॉन्स्टर जो आसानी से कहीं भी मिल जाता है शराब या फिर अन्य किसी नशे के रूप में।पहले तो यह मॉन्स्टर लोगो को अपने आधीन करता है और इस हद तक उन्हें अपना गुलाम बना लेता है कि वो इसके लिए कुछ भी कर जाते हैं फिर चाहे अपने परिवार की खुशियों की बलि ही क्यूं ना देनी पड़े।
लेखक :~ जतिन शर्मा
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souravgagat500
sureshna77
anu1201sharma
Kaafi badhiya Khani pdh ke acha lga
Description in detail *
Thank you for taking the time to report this. Our team will review this and contact you if we need more information.
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