किरदार

जीवनी
5 out of 5 (5 Ratings)
Share this story

Kahani shuru krne se pehle mujhse baadha karo ki aap kahani ko pura padhoge ....

June ke din time karib 2:15 baje, jaan-lewa dhoop, उभलते हुए हवा से गुजरते हुए तमाम लोग सड़के पार कर रहे थे अपने अपने खवाहिशों के बोझ लेके....

उन सूर्य के किरण से बचते हुए एक छतरी को बायाँ हाथ से पकड़ते हुए दाया हाथ में एक पुरानी ड़ायेरी, पुराना चश्मा नाक के सहारे लटकाते हुए एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे किरदार कवि आ पहुँचे ।

एक लम्बी साँस लेने के बाद कवि किरदार मुस्कुराते हुए कहते हैं की- यह धरती तुम कितने निर्दोष हो,

60 वर्ष का उम्र में खड़े किरदार कवि के आँखों में एक किसिम के पुरानी यादों के अधुरी कहानी सा छलकता दिख रहा था....किरदार कवि उस पीपल पेड़ के नीचे सहारे लेते हुए बैठ जाते हैं । किरदार अपने उस पुरानी डायरी को पसीनों से पोंछते हैं और डायरी के बीच से एक पुरानी कलम उठाते हैं ।

कबी जब भी कुछ नया सोचते थे तो उस डायरी में नोट करते थे । फिर एक अचानक से तेज हवायें चलती हैं और उनके डायरी का 21 वाँ पेज खुल जाता हैं जिस में लिखा होता हैं : किरदार

और कवि किरदार बड़े गौर से देखते हैं । किरदार अपने एक छोटे गाँव में छोटा सा घर में ज़िन्दगी गुज़ारते हैं । उनका दूरदर तक कोई रिश्तेदार नही हैं । उनकी पत्नी इस दुनिया से दूर जा चुकी थी । उनका एक बेटा हैं और वो बाहर बिदेश में रहता हैं और किरदार से कवि बातचीत नही होती हैं ।

किरदार का एक क़िस्सा सुनाता हूँ जो उस 21 वाँ page में लिखा होता हैं ।

यह जो दुनिया हैं ना महोदय, यह बहुत निर्दय हैं । अगर आप अपने किरदार को समझ पाओ तो आप एक रूपी में ही अपने सारे जीवन का सार हासिल कर लोगे ।

एक फ़ुल का भूमिका क्या होता हैं ? रंग भरना, मन में मोहित करना, प्रकृति का एहसाश कराना पर एक माली का किरदार होता हैं उसे तोड़ के बाज़ारों में बेचना । बाज़ार से जिसने ने उठाया उस का भी कुछ ना कुछ किरदार होगा ।

क्या दिन थे वह जो मैंने इस किरदार को गले लगाते हुए अपने आप से एक बाधा किया था । में बस अपनी ज़िंदगी को किरदार से जोड़ूँगी ।

माफ़ करना डायर्री में यही लिखा था । सायद हम किरदार को सुन रहे थे ।

22वाँ पेज पढ़ते हैं....

क्या हमारा कोई पहचान हैं ? मानव सच में इस बात से सहमत है की वो अपने किरदार को जानता हैं ? एक पिता-माता होने का किरदार, पति पत्नी होने का किरदार, बच्चे होने का किरदार, प्रेमी-प्रेमिका होने का किरदार । अपने काम का किरदार, नाम का किरदार ....? एक इंसान का किरदार ।

क्यू की मैं भी नही निभा पाया अपना किरदार. मेरी पत्नी ने मुझे मरने से पहले अपने बेटे का ज़िक्र किया था उसे आना चाहिए मेरे मौत पर । पर उसने भी नहीं निभाया अपना किरदार । और में एक किरदार बाप नही हूँ ।

उसी के नीचे एक और पंक्ति में लिखा था ।

झुमक़ा बिंदी, खुले बाल और हाथ में चायें

अरे थोड़ा तो मेरी तबियत का ख़्याल रखा करो ।

फिर से माफ़ करना उस पेज में यही लिखा था ।मैं भी तो एक लेखक ही हूँ ना - मेरा भी तो किरदार हैं ।

पेज 23वाँ

किरदार की पत्नी का नाम भूमिका था ।भूमिका और किरदार दोनो एक वर्षों के बाद प्रेम में पड़ गए थे ।और दोनो ने विवाह कर लिया और एक बच्चे को जन्म दिया । उस का नाम था मानव ।

मानव बचपन से ही अपने घर से दूर रहता था । सहर में पढ़ाई करता था और वो सहर से ही बिदेश चला गया ।उसके बाद कभी लौट के वापस नही आया ।

काफ़ी बरस बीत गए । दोनो ने साथ में ज़िंदगी के एक एक पल को बिताया । फिर एक दिन शाम के समय था जब किरदार अपने पत्नी को बहुत ही प्रेम से छेड़ रहे थे अचानक उनकी पत्नी मानव का नाम लेते हुए किरदार के और गिर गयी ।कुछ समय गम्भीर..... । भूमिका चली गयी किरदार से दुर ।

किरदार जैसे तैसे सम्भालता अपने आप को ।फिर कुछ साल गुजर जाता हैं । अब वो पहले जैसा मुस्कुराता नही हैं, टूट चुका हैं अन्दर से, अब तो घर के राशते भी भूलने लगता हैं, बूढ़ा हो चुका हैं ।

पेज 24वाँ

किरदार अपने सारी पुरानी यादों को अपने उस पुरानी ड़ायेरी में लिखता हैं । और कभी कभी गुनगुनाता हैं , गाता हैं और ज़ोर ज़ोर से रोता हैं ।

(और कोई किरदार में नही आएगा)

(ख़त्म कर दी हैं मोहबत तुम पर ।)

25वाँ पेज में जाने से पहले कहानी फिर शुरू होती हैं । किरदार लिखते हैं की इस धरती में हरेक का कहीं किरदार हैं ,

हर कोई अपना अपना भूमिका निभा रहा हैं ।

( भूमिका ने कहा था हम दोनो के बारे मैं मानव को कभी नही बताने का बाधा किया था ।)

पेज 25वाँ

ख़ाली था अब किरदार का ड़ायेरी।

जब उस पीपल के पेड़ के नीचे से किरदार उठा और अपने छत्री को खोला और अपने घर के तरफ़ बढ़ने लगा और पीछे से एक आवाज़ आया -

पिता जी

पिता जी

2 बार आवाज़ लगाने के बाद किरदार पीछे के तरफ़ मोड़ के देखता हैं उसके सामने एक गोरा सा व्यक्ति खड़ा होता हैं

में मानव पिताजी ।

किरदार एक चक से उसके आँखों में गौर से देखता रहता हैं । कुछ समय देखने के बाद ज़मीन में गिर जाता हैं ।

किरदार अब नही रहा ।

ड़ायेरी के सबसे पीछे लिखा हुआ था- मानव को खुद का किरदार और भूमिका निभाना कभी नही आया ।

यही जीवन का सच हैं ।

Stories you will love

X
Please Wait ...