मर के भी ना वादा अपना तोड़ेंगे

रोमांस
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"हमारा साथ हमारा प्यार यूहीं बना रहेगा ना जान..?"

"हां बच्चा ! हम ऐसे ही रहेंगे और हमारा प्यार कभी कम नहीं हो सकता..!"

रोहन ने मुस्कुराते हुए स्नेहा से कहा, जो उसके कंधे पर सिर रखे हाथ में हाथ लिए बालकनी मे सर्दी की सुबह में हल्की धूप का आनंद ले रही है। रोहन भी उसकी हथेलियों को रगड़ते हुए गर्म करने की कोशिश में लगा था।

सुबह का वो नजारा देखते ही बनता है जब सूरज कोहरे को चीर अपनी किरणें बिखेरने को बेताब होता है। भीनी भीनी सी ठंड बदन में सिहरन सी पैदा करती है और ओस की बूंदे माटी को नम कर उसकी खुशबू फैलाती है।

रोहन सूरज की तरफ इशारा करते हुए बोला - "हमारा प्यार इस सूरज की तरह है, जो कभी नहीं मिट सकता! कोहरा चाहे कितना भी इसे ढकने की कोशिश क्यों ना कर ले लेकिन ये अपनी किरणे बिखेर ही देता है! ऐसा ही हमारा प्यार होगा, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हमेशा बना रहेगा! कितनी भी मुश्किलें क्यों ना आए, हमारा प्यार कभी कम नहीं होगा!"

स्नेहा ने सिर उठाकर उसे देखा और बोली - सच..?

रोहन ने उसका माथा चूमकर हां में सिर हिलाया। तो स्नेहा उससे लिपट गई। वह सिसकते हुए बोली - "तुम रह पाओगे मेरे बिना रोहन..?"

रोहन ने उसे बाहों में कसते हुए कहा - "अरे पगली ! तुम्हारे बिना कहां, मै तो तुम्हारे साथ जिऊंगा! हर पल, हर लम्हा तुम्हे ऐसे ही खुद मे कैद रखूंगा! अभी तो बताया ना हमारा प्यार इस सूरज की तरह है, जो ढल सकता है लेकिन मर नहीं सकता!"

स्नेहा ने रोते हुए कहा "मै तुम्हे छोड़कर नहीं जाना चाहती रोहन! लेकिन मै मजबूर हूं! क्या करू??? मै कभी तुम्हे तकलीफ़ मे नहीं देख सकती और आज देखो लाइफ का सबसे बड़ा दर्द मै ही तुम्हे दे रही हूं!"

रोहन उसका सिर सहलाते हुए कहने लगा कि ऐसा कुछ नहीं है जान! तुम मुझे कभी कोई तकलीफ़ नहीं दे सकती! स्नेहा सुबकते हुए पूछने लगी - "ऐसा क्यों होता है जब हम पूरी तरह से किसी की मोहब्बत में डूब जाते है तो वो साथ बस वही खत्म हो जाता है? ना चाहते हुए भी हमे उसी शख्स को दर्द क्यों देना पड़ता है जिसकी खुशियों के लिए खुदा से दिन रात मन्नते मांगते है?"

"वो इसलिए क्योंकि मोहब्बत का सफर कभी खत्म होता ही नहीं है! जितने ज्यादा उतार चढ़ाव हमें इस सफर में मिलते है ना, ये सफर उतना ही खूबसूरत बनता जाता है!" रोहन ने स्नेहा को समझाते हुए कहा "अब चलो आंसू पूछो और चलो मेरे साथ! तुम्हे कुछ दिखाना है!"

रोहन उसे गोद में उठा घर के बाहर बने पार्क में ले आया। रोहन ने उसे गोद से उतारा, उसकी आंखो पर हाथ रख अपने साथ लेकर जाने लगा। रोहन ने धीरे से उसके पैरो से स्लीपर्स निकाले और उसका हाथ पकड़ चलने लगा।

कुछ दूर जाकर एक जगह रुके और रोहन ने उसकी आंखे खोल दी। ओस गिरने से हरी हरी घास गीली हो चुकी थी। गीली घास पर चलने का अलग ही मज़ा है। जहां रोहन ने स्नेहा को छोड़ा वहां हर कदम पर बॉक्सेस रखे हुए थे। जहां उन बॉक्सेस का सिलसिला खत्म हो रहा था उस छोर पर बहुत ही खूबसूरती से रोहन ने स्नेहा के लिए मॉर्निंग कॉफी डेट अरेंज की है।

स्नेहा एक एक करके उन बॉक्सेस को उठाती और उन्हें खोलकर देखती। सभी मे स्नेहा के लिए थैंक यू नोट और प्यारे प्यारे मैसेजेस है। स्नेहा उन्हें पढ़कर कभी मुस्कुराती, तो कभी उसकी आंखो से आंसू छलक पड़ते।

आखिर में वो उस जगह पहुंचे जहां रोहन ने सारे अरेंजमेंट किए है। चारो ओर सफेद पर्दे, जिन्हे चुन्नटें डालकर बड़ी खूबसूरती से लाइटिंग और सफेद लिली के फूलों से एक गोल घेरे में सजाया गया था। बीच में एक मेज़ और दो कुर्सियां रखी है। हर ओर स्नेहा और रोहन की तस्वीरें रिबन के सहारे लटकी हुई है।

स्नेहा ने जब ये सब देखा तो उसकी खुशी का तो जैसे कोई ठिकाना ही नहीं रहा। वह किसी बच्चे की तरह घूम घूमकर उन तस्वीरों को देखने लगी और उनसे जुड़ी हर याद एक बार फिर से जीवंत हो चली।

रोहन भी उसे इतना खुश देख मुस्कुराने लगा। उसने अपना फोन निकाला और चुपके से उन पलो को कैमरे में कैद कर लिया। जो शायद उसकी वो आखिरी यादें है स्नेहा के साथ। रोहन ने अपनी आंखो के नम किनारों को साफ किया और स्नेहा के पास आया।

रोहन ने उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा - "काश ये पल यही थम जाएं!" रोहन की आवाज इस बार उसका दर्द नहीं छुपा सकी और उसकी आंखो ने भी उसका साथ छोड़ दिया। रोहन की आंख से आंसू का एक कतरा स्नेहा के कंधे पर गिरा।

स्नेहा ने झट से पलटकर रोहन को कस कर गले लगा लिया। रोहन रोते हुए बोला - "मत जाओ ना यार, प्लीज! मै नहीं जी पाऊंगा तुमसे जुदा होकर!" स्नेहा भी थोड़ी भारी आवाज में कहने लगी - "जाना तो मै भी नहीं चाहती रोहन! मजबूर हूं अपनी किस्मत के हाथों! क्या करू जब किस्मत ने ही मेरी सांसे छीन ली मुझसे?"

"तो तुम्हे ही क्यों यार? भगवान को जान लेनी थी तो मेरी ले लेते ना! मुझे हो जाता ये ट्यूमर! तुम्हे नहीं होना चाहिए था जान! मै तुम्हे इस तरह मरते हुए नहीं देख सकता!"

दोनो एक साथ रो पड़े। स्नेहा रोहन के आंसू पोंछते हुए बोली "इस तरह रोकर विदा करोगे अपनी जान को? चलो ये आंसू साफ करो और एक बड़ी सी स्माइल दो मुझे! रोहन नजरें झुकाए ना में सिर हिलाते बोला "मुझसे नहीं हो पाएगा!"

स्नेहा उसके चेहरे को अपने हाथो मे थामकर बोली - "फॉर मी प्लीज! अगर तुम इसे रहोगे तो मै कैसे जा पाऊंगी? प्लीज रोना बन्द करो रोहन!"

रोहन अपने आंसू साफ करके बोला - कौन रोया? कोई भी तो नहीं रो रहा! मै तुम्हारा हर पल बहुत खूबसूरत बनाऊंगा!" इतना कह उसने स्नेहा के गालों को चूम लिया। जैसे ही उसके होंठो की ओर बढ़ा स्नेहा ने उसके मुंह पर हाथ रख उसे रोक दिया और वहां से भाग गई।

वह भागते हुए बोली - "पहले तुम मुझे पकड़ कर दिखाओ! इतनी आसानी से किस नहीं मिलने वाली! रोहन जोर से चिल्लाया अच्छा बेटा हमसे शैतानी! अभी बताता हूं तुम्हे तो!" स्नेहा आगे आगे और रोहन के उसके पीछे, ऐसे भागने लगे जैसे जेल से कोई कैदी भाग रहा है और पुलिस उसके पीछे।

भागते हुए स्नेहा का पैर पौधों को पानी देने वाली पाइप मे उलझा और वो घास मे ही गिर पड़ी। रोहन उसके पास आया और हंसते हुए बोला - "अब कहां जाओगी भाग कर?" वह स्नेहा को जमीन पर गिरा देख जोर जोर से हंसने लगा। उसे यू हंसता देख स्नेहा के मन को बड़ा सुकून सा मिला।

रोहन भी उसके साथ ही जमीन पर लेट गया। आसमान में देखते हुए स्नेहा ने कहा - "जब भी तुम मुझे मिस करो तो इसी तरह आसमान को देखना और फिर मै तुम्हे देखकर हसुंगी, जैसे अभी तुम खुश हो रहे थे!"

रोहन और स्नेहा दोनो एक दूसरे मे खो गए और उनके लब नहीं उनकी आंखे बतियाने लगी। स्नेहा ने धीमे शब्दों में कहा - "रोहन! थैंक यू फॉर एवरीथिंग! आई लव यू टिल माई लास्ट ब्रीथ! आईं प्रॉमिस यू!"

"आई लव यू टू जान एंड थैंक्स टू यू ठू मेरी लाइफ को इतना हसीन बनाने के लिए!" रोहन ने इतना कहकर अपनी आंखें बंद कर ली।

रोहन अपने होंठो से स्नेहा के लबों को चूमने लगा। स्नेहा ने अपनी आंखे बन्द कर ली। उसने अपना वादा निभाया और फिर कभी आंखे नहीं खोली.......!!

रोहन आज भी उसी जगह लेटा आसमान को देखने लगा लेकिन आज स्नेहा उसके साथ नहीं थी। उसकी आंखो से आंसू छलककर जमीन पर गिर पड़ा और सहसा वो आंसू हंसी में बदल गए मानो स्नेहा उसे देख मुस्कुरा रही हो।

समाप्त

✍️नव्या अग्रवाल"नवी"

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