भारत एक कृषिप्रधान देश है। अकसर बहुत से लोग कहते है की जो सुख शहर में है वो सुख गाँव में कहाँ। शरह में मस्त ए.सी. , पंखा , कूलर , पक्का मकान , सड़क , गाड़ियां हैं ; यह सब चीजें गाँव में कहाँ। लेकिन शायद ऐसे लोगों को क्या पता की अगर गाँव में लोगों को ए.सी. चाहिए होती है तो वह आराम से अपने यारों दोस्तों के साथ खुली हवा में बैठकर ए.सी. का मज़ा उठाते हैं। अगर लोगों को ठन्डे पानी से नहाना होता` है तो वे नदियों में डुबकी लगा - लगाकर नाहते है। गाँव में अगर शहर के बराबर सुविधाएँ नहीं तो क्या हुआ जो प्रेम , सौहाद और भाईचारा भारत के ग्रामीण इलाकों ( गाँव ) में है , वो तो शहरों से लुप्त ही हो चुकी है।
आज अगर आप किसी गाँव में किसी को जानते हो या न जानते हो गाँव के सब लोग आपको अतिथि की तरह ही रखेंगे। पानी , चाय- नाश्ता वह सब आपको करवाऐंगे। आपसे वह कभी नहीं कहेंगे कि आप हमारे रिश्तेदार नहीं हो आप हमारे घर नहीं आ सकते। उनके अंदर इंसानियत एवं प्रम कूट - कूट कर भड़ा पड़ा है । लेकिन वहीं अगर आप किसी शहरी के घर मे जाओ और अगर आप उनके संबंधी नही हो , तो वह से आपको मुश्किल से पानी ही पिलाएँगे। सभी लोग ऐसे नहीं होते लेकिन ज्यातर ऐसे ही हैं। वह आपको दरवाजे से ही विदा कर देंगे। कुछ शहरी लोग तो ऐसे हैं , जो अपने रिश्तेदारों के भी कुछ दिन ठहर जाने पर मुहँ बनाने लग जाते हैं। लगभग हर एक शहर के आदमी मे इंसानियत तो जैसे लुप्त हो चुकी हैं।
गाँव में अगर किसी के घर कुछ तो पड़ोसी सबसे पहले उनकी मदद करत हैं , लेकिन शहर में तो किसी को किसी से मतलब ही नहीं , चाहें उसके घर में कुछ भी हो जाएँ । अकसर पड़ोसी तो यह कहकर चलते बनते हैं की " उस की मुश्किल , वही जाने " गाँव मे सब अपने सुख - दुःख दूसरे के साथ व्यक्त करते हैं , और धन पर्याप्त मात्रा मे ही कमाते और अपने परिवार के साथ समय व्यक्त करते है । लेकिन शहर में व्यक्ति को जैसे माया ने घेर लिया है। वह इतना लोभी हो चुका है की परिवार के साथ बिताने के लिए उसके पास समय भी नही है इतना धन कमाने का क्या फायदा जब परिवार के साथ बिताने के लिए समय ही न हो। आया है सो जाएगा , राजा , रंक , फ़कीर । गाँव मे साधन न के बराबर है , जिससे वायु प्रदूषण भी बिलकुल नहीं है। लेकिन शहर में अत्याधिक साधन होने के कारण प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। ऐसे ही गाँव में शहर से बहुत अधिक फायदे हैं। अब क्या गाँव या शहर ?
#598
50
50
: 0
1
5 (1 )
Bratesh Kumar Singh
Description in detail *
Thank you for taking the time to report this. Our team will review this and contact you if we need more information.
10
20
30
40
50