कितनी ख़ूबसूरत है दुनिया?

aanandrishikesh
रोमांस
4.7 out of 5 (15 Ratings)
Share this story

"यारा सीली - सीली बिरहा की रात का जलना", एक लड़का अगर यह गा रहा हो, तो उसकी जलती रात के कच्चे धुएँ आपकी आँखों के कोर को शायद जला न पाएँ। विरह तो इक नारी का सुरमा है ना!

बड़ा पुराना क़िस्सा है। मैं जब तक़रीबन चार साल का था, तब की बात है। यादें कच्चे-पक्के दाग़ ही तो हैं, जिनके कुछ धब्बे आँखों के परदे पर से हया के मारे फिसल जाते हैं। बाक़ी बेहया धब्बे किसी धुआँदार दृश्य की तरह समय - समय पर उभरते हैं। उस समय की यादें भी कुछ उजड़ी - उधड़ी - उखड़ी हैं। नानी की किडनी बिगड़ गयी थी सो हमें टाउन का रुख़ करना पड़ा। मैं ऑपरेशन से बहुत ख़ौफ खाता था। मम्मी लेकिन कहती हैं कि मुझे जब भी सुई लगती थी, रोना तो मेरी आत्मा जाने, मैं सिसके बिना स्वयं को सुई लगते हुए एकटक अपलक देखा करता था। डर अपनी सीमा के पार सन्नाटे का रूप धर लेता है। आदमी जब हद से अधिक डरा हो तो उसके कण्ठ से चूँ तक नहीं निकलती है। यादें भी ना, क्या क्या दृश्य दिखला देती हैं। टाउन में आने के बाद अनसुने गाने कान अपनी ओर खींच ले जाते थे। घर पर एक टेप ज़रूर था, मगर कैसेट गिने - चुने ही हुआ करते थे। "यारा सीली - सीली बिरहा की रात का जलना", किसी भीड़ में एक दिन धुन सुनाई दी, और वह धुन मुझे भीड़ में होते हुए भी तन्हा करती गयी।

आज जुलाई की यह शाम अलग तो नहीं लगी जब तक उस धुन के धुएँ मेरे मन के श्मशान से न उठे। तुम गा रहे हो और मैं तुम्हें अपना मन दे कर सुन रहा हूँ। समय ने मानो उस धुन को मेरे ज़ेहन में कहीं दफ़्न कर दिया था। चौदह बरस का मनवास बीत गया। इस धुन का इन चौदह बरसों में दोबारा मेरे कानों से राब्ता नहीं हुआ था। तुमसे बेहतर सिर्फ जनाब सज्जद अली गाते हैं। मैं तुम्हें यह बारहा कहता हूँ और तुम हो कि " चल झूठे! "। तुम्हारे सुर मेरी साँसों के ज़रिये सफ़र करते हैं। मेरा नब्ज़ - नब्ज़ तुम्हें टटोलता है।

मैं तो कहता भी हूँ कि तुम संगीत को सीरियसली लो। मैं लिखूँ, तुम उसे स्वर देना। कितना सुखद होगा, नहीं? तुम्हें मगर लोगों की नब्ज़ टटोलनी है। सर्जन बनो लेकिन संगीत से नाता न तोड़ना। मेरी बायीं केहुनी जो उमड़-उमड़ कर समय - समय पर उखड़ती है, उसकी सर्जरी भी तो तुम्हें ही करनी है। मैं नाज़ुक - दिल किसी ग़ैर डॉक्टर को अपना हाथ नहीं दे सकता। वो हाथ जो तुम्हारा सिर सहलाने हेतु है। हाथ, जो तुम्हारे बालों में फेरता हूँ और तुम उस पर माथा टिकाए इस दर्दीली दुनिया के पार मुझे तलाशते ख़्वाब - ख़्वाब फिरते हो। जिस पर तुम घण्टों सो चुके हो। जिसके सहारे तुम्हें घण्टों गुज़ारने हैं।

" गुलज़ार - सी बातें न बनाया करो। "

" बातें ही तो हैं जो मुख को ख़ूबसरत बनाती हैं। "

आज यह जान कर मुझे आश्चर्य हुआ, बल्कि आश्चर्य नहीं हुआ कि इस गाने को गुलज़ार ने लिखा था। गाने गुलज़ार ही लिखते हैं, एमिनेम आदि जाने क्या बकते हैं।

" लेकिन फ़िल्म देखी है तुमने? "

" 'लेकिन' फ़िल्म देखी है तुमने? ", मैंने नवु से पूछा।

" फ़िल्म तो नहीं देखी कभी, देखी हो तो ध्यान नहीं। उसके सभी गाने मगर ज़रूर सुने होंगे। "

" वो सभी गाने हैं ही इतने प्यारे। गुलज़ार ने जो लिखे हैं। शब्दों को वह कितना सटीक कसते हैं। सीली - सीली... सीली मतलब पता है तुम्हें? "

" गीली..? "

" दरअस्ल सीली के दो मायने सामने आते हैं। एकदम ठीक कहा, सील या नमी से बनी सीली। बिरहा की आँसुओं - सी गीली रात जल रही है। जब कि दूसरा ज़रा देशज अर्थ है - माचिस की तीली। सलाई तो सुनी होगी। बिरहा की रात तीली - तीली जलती जाती है। जनवरी में ज्यों तुम्हारे बिन मेरी चार रातें जली थीं, तुम क्या जानो! "

" हुँह, कैसे ही जानूँ, तुम रूठ कर जो बैठे थे। गाल फुलाने पर लेकिन लगते तो क्यूट हो। "

" लुभाना तो ख़ूब आता है तुम्हें। लड़ाइयाँ भी बड़ी रोचक होती हैं, नहीं? रिश्ते की इमारत में तकरार की एकाध ईंट रख दें तो पीसा की टॉवर झुकती ही दिखेगी। बावजूद इसके, पीसा की झुकती टॉवर है तो एक अजूबा! "

" ज्ञान झाड़ लो बस। आस-पास ध्यान न झाड़ना। देखो, दुनिया कैसे देख रही है। दो लड़के देखे नहीं कि... कितनी बदसूरत है दुनिया! "

मैंने मुस्काते हुए तुम्हारा सिर अपने हाथों में लिया, सहलाया, पुचकाया। " नवु! मेरी आँखों में देखो, देखते रहो। "

" कितनी ख़ूबसूरत है दुनिया! "

Stories you will love

X
Please Wait ...