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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal
इस किताब में समाज में बीत चुके कुछ घटना जिसमें हम लोगो को एक जुट होकर उसके खिलाफ लड़ना चाहिए था। गौरतलब है कि हम सिर्फ दुख व्यर्थ कर सकते हैं और हमेशा के तरह हम मोमबत्ती लेकर चौक च
इस किताब में समाज में बीत चुके कुछ घटना जिसमें हम लोगो को एक जुट होकर उसके खिलाफ लड़ना चाहिए था। गौरतलब है कि हम सिर्फ दुख व्यर्थ कर सकते हैं और हमेशा के तरह हम मोमबत्ती लेकर चौक चौराहों तक जाना उचित समझते है।
देख कर अनदेखा करना भी पाप के श्रेणी में आता है।
इस किताब में हमारे भारतीय ग्रंथों के कुछ महत्वपूर्ण किरदार का भी हमने उल्लेख किया है जिसकी भूमिका हमारे जीवन के कुछ बदलाव हेतु जरूरी है।।
सकुनी किसी के लिए गलत होगा और हो सकता है किसी के लिए सही भी
नजर का फर्क है, किसी को जो गलत लगता है , वो किसी को सही भी।
अखबार के पन्नो को कोई सिर्फ पढता है और कोई सिर्फ
सकुनी किसी के लिए गलत होगा और हो सकता है किसी के लिए सही भी
नजर का फर्क है, किसी को जो गलत लगता है , वो किसी को सही भी।
अखबार के पन्नो को कोई सिर्फ पढता है और कोई सिर्फ उसपर सोता और खाता है
इस किताब समाज के अलग अलग पहलुओं को कविता के माध्यम से बताया गया है ।
इस किताब मे चीज़ो को अलग नजरिए से देखना और अलग ढंग से प्रस्तुत किया गया है
सिर्फ उस नजर से मत देखिये जैसे बाकी सारे लोग देख रहे है
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