A wish comes true
By Zain Haseeb in Fantasy | পড়ার জন্য : 1,081 | পছন্দ: 1
A wish comes true       “Jane Jane dinner is ready!”, her mom called. Jane was lying on her bed and looking sadly at a photo. It was a picture of her dad playing hockey with her when she was just two years old.&nb  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:42 AM
A Raindrop
By Zain Haseeb in Fantasy | পড়ার জন্য : 783 | পছন্দ: 1
A Raindrop    It was a really cold day.  I was stunned when I opened my eyes. I saw thousands of blue gems dropping on the earth.  There was a great white mass hovering over me.  I had expected to see a clear sky and lovely green grass and flowers nodding  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:45 AM
A caged bird
By Zain Haseeb in Poetry | পড়ার জন্য : 348 | পছন্দ: 1
A caged bird.    I was once a free soul, soaring up high  Feeling the wind on my cheeks, in the day blue sky    Swirling up and down with no worry  And racing with my friends in jiffy and flurry.    But one day, as I sat on a window sill,  A cage came dow  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 04:57 AM
A WEIGHT WORTH CARRYING
By Jonas Yaniv Lumbila in Romance | পড়ার জন্য : 604 | পছন্দ: 1
120... she dared not look but what other choice did she have? The numbers left a depressed sigh on her face. He watched the digits in their clarity but with smile on his face looking at her with a sense of assurance “Don’t stress love they are only numbers” Timmy calmly said. &l  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 05:28 AM
ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 319 | পছন্দ: 1
ज़िन्दगी के पत्थर, कंकड़ और रेत Philosophy के एक professor ने कुछ चीजों के साथ class में प्रवेश किया. जब class शुरू हुई तो उन्होंने एक बड़  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 07:56 AM
தாய் (Mother)
By Ahamed Hamza in Poetry | পড়ার জন্য : 662 | পছন্দ: 1
தாய் தாய் தூங்கி நான் அறியேன் தரணியில் நீ வாழும் வரை அதிகாலை நான் எழுந்தால் அதற்கு முன்பே விழித்திடுவாய்நான் அ  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 07:59 AM
समंदर कि लहरों से
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 722 | পছন্দ: 1
"समंदर कि लहरों से और ठंडी-ठंडी ये हवाओं से कुछ पा लिया है,  सब कुछ खोने के बावजूद मैंने ममता कि चरणों में अपना शीश प  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 07:59 AM
Ruh Sa Nikli Aawaaz♥️
By Shashwat Kumar Singh in Poetry | পড়ার জন্য : 786 | পছন্দ: 1
बड़ी ही दिलचस्प होती है ये सत्रह-अठरह की लड़कियाँ वक्त-सुब्हदम सी होती है ये सत्रह-अठरह की लड़कियाँ धूप से शिकायातें ह  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:00 AM
How the josh
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 265 | পছন্দ: 1
 " जीत कर उनको दिखाओ जो तुम्हारे हार ने का इंतजार कर रहे हैं ." By Vivek Kumar Pandey  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:02 AM
Shayari
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 380 | পছন্দ: 1
 "डर मुझे भी लगा फासला देख कर,  पर मैं बढता गया रास्ता देख कर,   खुद-ब-खुद मेरे नजदीक आती गई,   मेरी मंजिल मेरा   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:05 AM
वक़्त से लड़कर
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 756 | পছন্দ: 1
"वक़्त से लड़कर जो नसीब बदल दे इन्सान वहीं जो अपनी तकदीर बदल दे , कल क्या होगा कभी मत सोचो , क्या पता कल वक़्त खुद अपनी   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:07 AM
उम्मीदों की कश्ती
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 266 | পছন্দ: 1
"उम्मीदों की कश्ती को डुबोया नहीं करते, मंजिल दूर हो तो थक कर रोया नहीं करते, रखते हैं जो  दिल में उम्मीद कुछ पाने की  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:08 AM
मां का प्यार
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 1,028 | পছন্দ: 1
"रुके तो चांद जैसी चले तो हवाओ जैसी वो मां ही है जो धुप मे भी छाव जैसी." Love your mom & Take care of mom  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:10 AM
जरा कोशिश तो कर
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 848 | পছন্দ: 1
जरा कोशिश तो कर " संगीत सुन कर ज्ञान नहीं मिलता ,  मंदिर जाकर भगवान नहीं मिलता, पत्थर तो इसलिए पूजते है लोग, क्योंकि   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:13 AM
है मैरे दोस्तों
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | পড়ার জন্য : 284 | পছন্দ: 1
"अब ना में हुं ना बाकी है ज़माने मेरे , फिर भी मसहुर है शहरों में फंसाने मेरे, जिन्दगी है तो नये जख्म भी लग जायेंगे, अब   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 23,2020 08:14 AM