JUNE 10th - JULY 10th
....... एक तरफा प्यार.......अरे दोस्तों जरा गौर फरमाये मोहब्बत की बात है वो वी एक तरफा मोहब्बत की कहा गया है ''कि हद से ज्यादा कुछ अच्छा नही होता हद से ज्यादा खाना मोटा बना देता है, हद से ज्यादा सोना आलसी बना देता है, हद से कुछ वी करो नुकसान होता है वैसे ही हद से ज्यादा मोहब्बत पागल बना देती है।'' इसी प्रकार हद से ज्यादा मोहब्बत करने बाली एक भोली सी लड़की की कहानी है हाजिर है आपके सामने .......
एक अनजान सी, भोली सी ,प्यार सी लड़की रश्मि अपनी दुनिया में खुश थी न किसी की फ़िक्र न किसी का दवाव बिलकुल मस्त थी फिर अचानक सब बदल गया । कहानी अब शुरू होती है एक दिन एक अजनबी स्कूल में अजनबी लोगों के बीच गयी वहा उसकी अजनवी वी मोहब्बत थी । जी हा वहा वो लड़का भी शिक्षा ग्रहण करता था उसका नाम रमन था रमन बहुत ही होशियार अच्छा ,अच्छे परिवार से था मगर थोड़ा घमंडी था और उस लड़की की अपेक्षा ज्यादा खूबसूरत था । रश्मि भी अच्छे परिवार से और खुश थी । ऐसे ही ऐसे कुछ वक्त निकल गया और रश्मि उसे प्यार करने लगी उसकी बुराई में अच्छी देखने लगी पर अब तक उसे पता नही था कि वह मोहब्बत के बंधन में बंध गयी है । वक्त का पहिया धीरे धीरे आगे जाता रहा और ऐसे ही दो साल गुजर गए बदलते वक्त ने दोनों को अलग कर दिया वो दोनों अलग - अलग स्कूल में पढने लगे । तब रश्मि को अहसास हुआ की वह रमन से प्यार करने लगी
उसे हर जगह रमन ही दिखता वह उसे ही याद करने लगी ,उसके बारे में सोचने लगी, उससे मिलने के लिए तड़पने लगी , और उसे ढूढ़ने लगी । वक्त गुजर रहा था कि एक दिन उसे रमन मिला एक कोचिंग में जहाँ रमन पढ़ता था रश्मि भी यह सोचकर उसी जगह पढ़ने लगी कि आखिर इंतजार के पल अब खत्म होंगे । कुछ वक्त ऐसे ही गुजर गया लेकिन आज तक रश्मि ने एक लफ्ज तक बात नही की । वो सोचने लगी की रमन को उसके दिल की बात कैसे बतायी जाये वो कहने से डरती थी ।
फिर एक दिन उसकी बात फेसबुक के जरिये हुई । रश्मि ने अपने दिल की बात रमन से कह दी मगर तब तक देर हो चुकी थी। रमन किसी और को पसंद करने लगा था जिस लड़की को वो पसन्द करता था वो रश्मि की दोस्त थी । रमन ने कहा कि उस लड़की से मेरी दोस्ती करवा दो रमन ने रश्मि को प्यार का वास्ता दे दिया था फिर क्या था रश्मि की आँखों में आंसू ऐसे गिरने लगे जैसे बरसात होने लगी हो। अपने सपनों का गला घोंटकर रमन की जिंदगी बसाने लगी रमन हमेशा खुश रहे रश्मि अब भी यह चाहती थी इसलिये रश्मि ने जाकर उस लड़की से कहा कि रमन उसे पसंद करता है मगर उस लड़की की जिंदगी में भी कोई और था और किसी कारण उसे कोचिंग छोड़ने पड़ी तो रमन ने उस लड़की को कोचिंग से जाने की वजह को रश्मि को माना जो कि सरासर गलत था
रश्मि उसे समझाती उससे गिड़गिड़ाती मगर रमन को कोई फर्क नही पड़ा । बल्कि रश्मि को बुरा भला कहता उसका मजाक बनाता उसे गालिया देता उसको अपमानित करता मगर रश्मि अब भी उसे ही प्यार करती। रश्मि के चहरे से मुस्कराहट गायब हो गयी वो एक दम से अकेली हो गयी , न खाने पर ध्यान,न सोने पर, न पढ़ाई, पर परिवार पर ,परन्तु उसे देखने वो रोज कोचिग जाती थी।
ऐसे ही ऐसे 2 साल गुजर गए और वो एक दूसरे से बहुत दूर हो गए मगर रश्मि का प्यार कम नही हुआ उसे वो फ़ोन करती मगर रमन वैसे ही बाते करता उसे चोट देता मगर न तो रश्मि बदली और न रमन,
फिर एक दिन रश्मि के मन में ख्याल आया कि उसकी जिंदगी में कोई और लड़का आ जाये तो शायद वो रमन को भूल जाये । कुछ दिन बाद ऐसा ही हुआ पर रश्मि किसी दूसरे को नही अपना सकी । अब तो उसकी जिंदगी ऐसी हो गयी जैसे कुएं में पानी न हो जैसे बिना पहिये की गाड़ी , उसकी जिंदगी लाश की तरह हो गयी, जिन्दा तो है मगर जीने की वजह नही , न किसी से बोलती, न किसी के पास जाती ,बस खुद से ही कैद हो कर रही गयी और वहा रमन किसी दूसरी लड़की के साथ खुश था ।
वक्त गुजरता गया सब बदल गया मगर उसका प्यार नही बदला । अब वो खुश रहने लगी अपनों के लिए, झूठी मुस्कान तो ले आयी , दिखावे की जिंदगी तो जीने लगी मगर आज तक भी वो खुश नही है
वो भूल कर भी रमन को ना भुला सकी ।
दोस्तों प्यार उससे करो जो आपको को करता हो और कभी हद से ज्यादा प्यार मत करना नही तो आपकी भी रश्मि जैसी हालत होगी, हो सके तो कभी रमन जैसे बेदर्द इंसान मत बनना कि कोई आपके लिए जान दे मगर आपको फर्क न पड़े , आप लोग ऐसी गलती न करे .......।
.......अर्पिता पटेल.......
भाग 2
कहानी अभी खत्म नही हुई थी कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्तों।।
हमने पहले पार्ट में पढ़ा कि रमन ने कभी रश्मि की मोहब्बत को स्वीकार नही किया रश्मि अपनी दुःख भारी जिंदगी जी रही थी पर एक दिन उसके जीवन मे मोड़ आया।।
भले ही रश्मि को रमन न मिला परन्तु उसे सच्ची मोहब्बत मिली जिसकी वो हकदार थी।।
कहानी शुरू होती है अब........
समय का पहिया चलता ही रहा और वो रश्मि अपना दुखो का बोझ ढोती रही ।।
फिर एक दिन रश्मि के परिवार वालो ने उसकी शादी एक अच्छे घर मे तय कर दी ।।
परिवार वालो द्वारा रश्मि से पूछा गया - क्या वह ये शादी करना चाहती है?
रस्मी का उत्तर. - हाँ । क्योकि उसके पास कोई रास्ता भी नही था न रमन के लौटने की कोई आस वो करती तो क्या करती ।।
कुछ समय वाद रश्मि की शादी हो जाती है और वो अपने ससुराल चली जाती है परन्तु आज भी उसके दिल मे सिर्फ और सिर्फ रमन ही था ।
वो अपने पति को तन के रूप में तो अपना लेती है परंतु मन से नही अपनापाती है ।।
"रश्मि का पति उमंग जो कि एक जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में एक बाबू के पद पर था।। "
वह भली भांति जानता था कि रश्मि उससे प्रेम नही करती है क्यो नही करती यह जानने के लिए एक दिन वह रश्मि से बात करता है।।
उमंग - में जानता हूँ कि आप हमसे प्रेम नही करती तो में इसका कारण जान सकता हूँ कि आपके दिल मे मेरी जगह क्यो नही है।
रश्मि - कोई उत्तर नही।
उमंग - क्या में आपको पसंद नही हूँ?
रश्मि -कोई उत्तर नही।
उमंग - क्या में आपके सपनो के राजकुमार जैसा नही हुन?
रश्मि - कोई उत्तर नही।
उमंग - क्या आपने ये शादी किसी दबाव में की?
रश्मि - कोई उत्तर नही?
उमंग - क्या आपको में और मेरा परिवार अच्छा नही लगा?
रश्मि - कोई उत्तर नही।
उमंग ने ज्यादा दबाव न डालते हुए कमरे से बाहर निकल कर अपने दफ्तर को चला गया।।
यहाँ रश्मि के मन मे डर बैठ गया था कि उसके पति के बार बार प्रश्न पूछने के बाद उत्तर नही दिया इस बात से रूठ कर रश्मि को घर से बाहर न निकल दे।।
शाम के 4:30 बजे थे और रश्मि के मन मे वही डर था।
दरवाजे की घंटी बजती है।।
रस्मी दरवाजा खोलती है तो उमंग घर वापिस आ जाता है।।
उमंग रश्मि से - एक कप चाय मिलेगी ।।
रश्मि चौक जाती है - कि गुस्से से जगह उमंग प्रेम से एक कप चाय की ख्वाहिश रखता है।।
रश्मि चाय बना कर उमंग को देती है।
उमंग रश्मि से - भले ही तुमने कोई उत्तर नही दिया परन्तु ये मत समझना कि तुमसे नाराज हु या तुम्हे घर से निकाल दूंगा ये घर जितना मेरा उतना ही तुम्हारा है पर अब में तुम्हारे साथ एक कमरे में नही रह सकूँगा में तुमसे नाराज नही हूँ पर में आपको परेशान नही करना चाहता । जब आपको लगे कि मै आपके बाते समझने के लायक हूँ तो मेरे कमरे का दरवाजा हमेशा आपके लिए खुला रहेगा।।
रश्मि - आश्चर्य से उमंग की ओर देखती है और सोचती है कि वह जानता है कि में उससे प्रेम नही करती फिर भी मुझे घर से निकालने की वजह मुझे सम्मान दे रहा है।।
समय बीतता रहा एक साल होने वाला है और रश्मि को उमंग के प्रति सम्मान बढ़ता रहा ।
एक दिन कि बात है,
रश्मि के मन मे विचार आता है कि उमंग मेरा कितना सम्मान और प्रेम करता है में उसे और धोखा नही दे सकती में उसे अपने पुराने दिनों के बारे में बता देती हूं चाहे फिर उमंग मुझे घर से ही क्यों न निकाल दे।।
एक रात रश्मि और उमंग खाने की मेज पर बैठ कर खाना खा रहे थे ।।
रश्मि - सुनिए मै आपसे कुछ बात करना चाहती हूं अपने कल के बारे में।
उमंग उत्साह से - कहिये
रश्मि - अपने और रमन के बारे में सब बयां करती है।
दोनों खाना खा लेते है।
उमंग - बिना कुछ कहे कुर्सी से उठकर अपने कमरे की ओर चला जाता है।
रश्मि उदास भरी होकर उठती है और वो भी अपने कमरे में सोचते हुए चली जाती है कि आगे क्या होगा?
सुबह होती है तभी उमंग अपने बैग को लेकर दफ्तर की ओर चल देता है।
उमंग दफ्तर जाते हुए रश्मि से - 4 बजे तैयार हो जाना और अपना बैग तैयार कर लेना।
रश्मि - मानो उस के ऊपर कोई पहाड़ टूट गया हो आंसुओं के धार लगी हुई थी। आँसू पोछते हुए अपना सामान पैक कर रही थी।
4:00 बजे दरवाजे की घंटी का स्वर सुनाई देता है।
रश्मि दरवाजा खोलती है उमंग घर की भीतर जाकर ।।
उमंग - रश्मि अपना समान लेकर आओ ।
रश्मि - अंदर जाकर सामान लाती है और देखती है उमंग भी एक बैग लिए खड़ा होता है।
दोनों घर को लॉक करते हुए आगे बढ़ते है परंतु रश्मि कुछ समझ नही पा रही थी कि वह कहा जा रही है और उमंग भी अपना बैग लिये हुए है।
उमंग एक टेक्सी लेकर आता है दोनों बैठते है और एक रेस्ट्रोरेंट में जाकर रुकती है। दोनों वहाँ से रेस्ट्रोरेंट के अंदर जाते है वहाँ एक टेबल बहुत ही सजी हुई थी जिस पर पहले ही उमंग का नाम लिखा था ।
( रश्मि सोचते हुए ये हमे यहाँ क्यो ले आया और हम जा कहा रहे है)
उमंग- कुर्सी खिसकाते हुए रश्मि को बैठने का इशारा करता है।
दोनों बैठे जाते है
उमंग - अपनी जेब से एक गुलाब ओर एक बहुत ही खूबसूरत कंगन निकलते हुए रश्मि से कहता है विवाह की वर्षगांठ की बहुत बहुत बधाई।।
रश्मि - खुश होते हुए गुलाब और कंगन लेलेती और उमंग से पूछती है कि ये बेग हम समझे नही।
उमंग - में समझता हूं हम दोनों राजस्थान की ट्रिप पर जा रहे है।।
रश्मि - मानो रश्मि को सब कुछ मिला गया जिसकी उसे तलाश थी वह उमंग को गले से लगाना चाहती थी पर शर्म के मारे गले न लगा सकी।
दोनों वहाँ से चलकर राजस्थान पहुँचे वह पहुचते हुए एक होटल में गए जहाँ ...
उमंग होटल में बात करते हुए - एक हमे दो कमरे चाहिए।
रश्मि - नही! नही एक ही कमरा।
मानो एक पल में ही रश्मि ने अपने प्यार का इजहार कर दिया हो।
दोनों कमरे में पहुँचते ही ।
रश्मि उमंग से - में तुमसे बेइंतहा मोहब्बत करती हूं क्या आप मेरे साथ सातो जन्म रहने का वादा करते है।।
उमंग - हम आपको सदैव खुश रखेगे।।
कुछ दिन राजस्थान में घूमने के बाद घर लौट आते है ।
दोनों गए तो थे पति पत्नी बनकर मगर लौट कर हमसफर के रूप में आये ।।
यही मेरी कहानी समाप्त होती है ।
मोहब्बत पहली हो या दूसरी ये मायने नही रखता पर सच्ची कितनी है ये मायने रखता ।
रश्मि जिसकी हकदार थी उसे वो मिल गया रमन न सही पर उसे बेहद प्रेम करने वाला उमंग मिल गया था और वो बहुत खुश थी।
मित्रो आपको कोई समझता नही या छोड़ कर चला जाता है तो निराश मत होना शायद ईश्वर ने उससे बेहतर देनी की सोची हो।।
आशा है कि आप लोगो को ये कहानी पसन्द आयी होगी अगर पसदं आये तो प्लीज शेयर एंड कमेंट दोस्तो।।
धन्यवाद
अर्पिता पटेल
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Arpita patel
Very emotional
rajumaharaj9889
Bohat sundar beautiful kahani anand aa gaya khani padhkar
writerarpita798
Very good strory
Description in detail *
Thank you for taking the time to report this. Our team will review this and contact you if we need more information.
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