मेरे द्वारा इस किताब में भगवान िे प्रतत दिए
जाने वाले सभी तिों िा संपूर्ण ववशलेषर् किया गया
है, किस तरह से निली, झूठे भगवान िा पुतला
दिखािर िुछ लोग तनचले तबिे िे लोगों िो डराते
रहते हैं| और भगवान िे सहारे उनिा आर्थणि,
सामाजजि एवं राजनीतति शोषर् आज भी धड़ल्ले से
िरते आ रहे हैं| मेरा अथण बस इतना है कि सभी गरीब
एवं शोवषत वगों िे लोग इस झूठी िुतनया से बाहर
आिर अपना आर्थणि एवं राजनीतति तथा शैक्षणर्ि
वविास िरें एवं ववज्ञान वाि िो बढावा िें, वे ताकिणि
और बुद्र्धमान बने|
ववषय – सूची
क्रम संख्या अध्याय
पृष्ठ
संख्या
1. हम भगवान को क्यों मानते हैं? 5-15
2.
भगवान का अस्ततत्व कैसे आया
होगा? 16-24
3. क्या भगवान प्रार्थनाएं सुनता है? 25-29
4.
नास्ततक भगवान को क्यों नहीं
मानते हैं? 30-35
5. भगवान नहीं है, साबित करो? 36-42
6.
अगर दुबनया में भगवान नहीं है तो
हम इतने नैबतक और सभ्य कैसे हैं ? 43-48
7.
अगर भगवान नहीं है तो सि कुछ
इतना व्यवस्थित कैसे हैं? 49-58
8. क्या भगवान दयालु है? 59-64
9. क्या भगवान न्याय – बप्रय है? 65-69
4
10. भगवान का बकतना मूल्य है? 70-72
11. क्या कण- कण में भगवान है? 73-75
12. भगवान पुरुष है या मबहला? 76-79
13.
अगर मैं भगवान को ना मानू तो क्या
होगा? 80-85
14. भगवान ने हमें क्यों िनाया? 86-90
15.
अगर दुबनया में सभी धमथ और
भगवान ना होते तो क्या होता? 91-94
16. क्या अल्लाह ने कुरान भेजी र्ी? 95-98
17.
क्या अल्लाह जन्नत में भेज सकता
है? 99-101
18.
क्या सच में मोहम्मद ने चांद के दो
टुकडे कर ददए र्े? 102-104
19.
ईसाइयों के गॉड ने दुबनया क्यों
िनाई? 105-107
बनष्कषथ
य