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bachpan ke kisse / बचपन के किस्से कुछ तेरे हिस्से कुछ मेरे हिस्से

Author Name: Ms. Bimla Gajpati & Pawan Lather | Format: Paperback | Genre : Others | Other Details

बचपन के किस्से (कुछ तेरे हिस्से कुछ मेरे हिस्से) पुस्तक बाल मन का दर्पण है। जिसके अक्सों को कहानियों के रूप में डालने का प्रयास किया गया है। ये कहानियां जहां बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं वही मनोरंजन का खजाना भी हैं। हर बचपन मासूम होता है और एक ऐसी नींव भी जो पूरे जीवन का आधार बन जाता है। हर व्यक्ति के बचपन में अवश्य ही कुछ घटनाएं ऐसी घटती हैं जिसे याद कर करके वह रोमांच से भर जाता है। इस पुस्तक में बच्चों को आनंद, साहस, सबक और मनोरंजन सभी का साथ - साथ अनुभव होगा । लेखक आशा करते हैं कि बच्चों के साथ - साथ बड़े भी स्वयं का इन कहानियों के साथ सह संबंध स्थापित कर पाएंगे।

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बिमला गजपति & पवन लाठर

बिमला गजपति

बिमला गजपति का जन्म हिमाचल प्रदेश जिला सोलन के एक छोटे से गाँव दाडलाघाट में एक किसान परिवार में हुआ। इनके पिताजी मिलीट्री इन्जीनियरिंग सर्विसज, जतोग (शिमला) से सेवानिवृत्त है तथा माताजी गृहणी हैं। इन्होंने अपना जीवन अपनी तीन छोटी बहनों के साथ सांझा किया है। अपने बचपन के पहले पाँच वर्ष गाँव में बिताने के बाद ये अपने माता पिता के साथ शिमला आ गई और इन्होंने अपनी शिक्षा शिमला में ही पूर्ण की। ये एम.ए. (अर्थशास्त्र), एम.एड• हैं तथा इन्होंने यू.जी.सी. राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा शिक्षा भी उत्तीर्ण की है। अपने जीवन काल के महत्त्वपूर्ण 12 वर्ष विभिन्न निजी विद्यालयों व महाविद्यालय में एक शिक्षिका के रूप में सेवारत रहते हुए बिताए तथा वर्तमान में हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में सन् 2017 से कला स्नातक अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। छात्र जीवन से ही लिखने में रूचि रखते हुए नीजिस्तर पर कविताएँ व छोटी कहानियाँ लिखती रही हैं। हाल ही में इनकी पुस्तक आस्तीन के धागे प्रकाशित हुई है जिसमें यह सह-लेखिका है।

पवन लाठर

पवन लाठर का जन्म हरियाणा के जीन्द जिले में एक फौजी परिवार में हुआ था। इनके पिता की तरफ से इनके पिता और दादा तथा इनकी माता की तरफ से इनके मामा व नाना, सभी फौजी थे। तीन भाई बहनों के परिवार में वे सबसे बड़े हैं। वे बचपन से ही अपने पिता के साथ फौजी माहौल में पले बढ़े हैं। इनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा आर्मी स्कूल, नाहन (हिमाचल प्रदेश) से हुई है। इसके अलावा ये अपने माता-पिता व भाई-बहन के साथ उमराई कैंट (मेघालय), जोरहाट (असम) एवं गुडगाँव (हरियाणा) में भी रहे हैं। उच्चतर शिक्षा में इन्होंने एम.बी.ए. (एफ.एम.) तथा एम. ए. (अंग्रेजी) की है। भारतीय कस्टम विभाग में लगभग तीन साल अपनी सेवाएं देने के बाद इन्होंने आयकर विभाग में कार्यग्रहण किया तथा विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएँ दी। वर्तमान में ये विभाग में बतौर आय कर निरीक्षक तैनात है। साहित्य में इन्हें शुरू से ही लगाव रहा है तथा स्वयं भी कहानियाँ, कविताएँ हास्य-व्यंग आदि लिखते रहते हैं। इनकी कहानियाँ, कविताएँ आदि सब समाज के हर चेहरे को सामने लाने की एक कोशिश होती है। हाल ही में इनकी पुस्तक आस्तीन के धागे प्रकाशित हुई है जिसमें यह सह-लेखक हैं।


 


 

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