भगवान् ने पाँचवें अवतार में कपिल मुनि के रूप में जन्म लेकर एक विशेष ज्ञान को प्रसारित किया, जिसे सांख्य दर्शन अर्थात शरीर के पच्चीस तत्वों का ज्ञान कहते हैं। मनुष्य के जीवन में यह ज्ञान शान्ती प्रदान करता है। भागवत् महापुराण भाग-१ के स्कन्ध-३ से यह अंश लेकर बहुत ही सरल शब्दों में अनुवाद किया गया है। आशा है आप अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकाल कर इस कथा को पढ़ेंगे।