“स्वस्थ पुरुष स्वस्थ समाज का निर्माण करता है |”
अर्थात् प्रकृति में व्यवस्थित रूप से स्थित स्वस्थ पुरुष एक स्वस्थ समाज का निर्माण करता है | स्वास्थ्य को केंद्र मानकर समस्त चिकित्सा पद्धति इस उद्देश्य हेतु निरंतर प्रवृत रहती हैं | आयुर्वेद शास्त्र पौराणिक इसी चिकित्सा को चिकित्सा सूत्र एवं सिद्धान्तो के रूप में प्रयुक्त कर प्रगति के पथ पर अग्रसर है |
आयुर्वेद चिकित्सक गण, अनुसंधान कार्य में संलगन विद्यार्थी एवं छात्र समुदाय आयुर्वेद वाङ्मय की विविधता के फलस्वरूप व्याधि से संबंधित चिकित्सा सूत्र एवं सिद्धांतों के संग्रह में क्लिष्टता का अनुभव करते हैं | संग्रह रूप में उपलब्धता के अभाव के फलस्वरूप भावी आयुर्वेदिक चिकित्सक मोहग्रस्त होकर रोग निवारण में कठिनता का आभास करते है | आयुर्वेद सम्प्रदाय की इस समस्या के निवारण में सहायता हेतु इस पुस्तक का निर्माण किया गया है | संग्रह रूप में उपलब्ध चिकित्सा सूत्र संग्रह न केवल विद्यार्थिगण अपितु चिकित्सकगण के मार्गदर्शन को अवलोकित कर किया गया है | इस संग्रह के माध्यम से आयुर्वेद संप्रदाय के निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर इस चिकित्सा पद्धति का अनुसरण करने वाले चिकित्सक गण रोगविशेष में निर्देशित विषय का चयन कर सुगमतापूर्वक अपने संदेह के निवारण किया जा सकता है |