पाँच कहानियों का ये कथा संग्रह पंचतत्व या यों कहें पंचामृत की तरह पाँच अलग-अलग तत्वों से बना है। प्रत्येक कहानी जीवन के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित करती है। कुछ घटनाएँ या पात्र इस कदर सार्वकालिक हो जाते हैं कि उसके एक विशेष पहलू से इतर पाठक का ध्यान जल्दी नहीं जाता है। इस संग्रह की प्रत्येक कहानी आपके मन के मिथक को बार-बार तोड़ेगी। हर कहानी कुछ अलग, कुछ नया संदेश देती है। यहाँ न केवल कथानक नए हैं बल्कि कहानी के द्वारा उठाए गए मुद्दे भी अलग हैं। एक सिपाही की मौत नए अंदाज में दिखेगी, पितृऋण की अदायगी भी एक अलग तरीके से होगी। कुछ ऐसे विषय हैं जिनपर ज्यादा न लिखना पोलिटिकली करेक्ट माना जाता है। ऐसे विषयों को छूकर लेखक ने एक तरह से खतरा भी मोल लिया है। लेकिन कहानी किसी अनछूए पहलू को उजागर न करे तो फिर वो एक घिसा-पिटा संदेश हो जाती है जो पाठक सदियों से कहानियों के माध्यम से सुनते आए हैं। इसलिए इस कथा संग्रह में आप बार-बार चमत्कृत होंगे और एक नई दृष्टि से अपने आस-पास के पात्रों का पुनरावलोकन कर पाएंगे।
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