भगवान श्री कृष्ण के उपदेश जो श्रीमदभगवद् गीता के रूप में संकलित हैं। सम्पूर्ण मावन जाति को एक ऐसे मार्ग को ले चलने को प्रेरित करते हैं, जो उन्हे सत्य के मार्ग का पथिक बना सके। उन्होंने सम्पूर्ण भगवदगीता में जितना आध्यात्मिक ज्ञान दिया है, उतना ही व्यवहारिक ज्ञान भी दिया है। इस छोटे से उपन्यास में लेखक ने श्रीमदभगवद् गीता के कुछ श्लोकों को लेकर अपनी कल्पना से हिन्दू समाज में फैली जाति प्रथा की सामजिक बुराई का उजागर करने का प्रयास किया है। संम्भवत: भगवान श्री कृष्ण का भी यही मंतव्य रहा होगा । किसी के हृदय को ठेस पहुँचे लेखक का कोई ऐसा विचार नही है। अपितु भगवान श्री कृष्ण की वाणी को अपनी कल्पना के आधार पर उपन्यास का लेखन ही लेखक की प्राथमिकता है |
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