इस किताब में गुरू और शिष्य के संबंध बताया गया है और गुरू के प्रति प्रेम एवम भक्ति और अन्य कथा जो इसी पर आधारित है इस किताब को लिखने के दौरान कोई भी धर्म और कोई भी जाती को नुकसान नहीं पहुंचा या गया है और इस किताब को लिखा है श्री विवेक कुमार पांडे शंभुनाथ जी ने.।