कभी कभी लगता हैं , पहले एक किरदार बनाओ फिर उसे जीवंत करो , उसे संवाद दो , उसे उम्र दो और फिर उसे अमर बना दो । तब क्या हो जब एक राइटर खुद को अपनी ही कहानी का एक किरदार मान कर अपने आस पास की दुनिया खुद बना ले , वह अपने पिता जी को अपने पसद का चुने और माँ को अपने स्वाद अनुसार क्या एक कहानीकार को अपने मन का शहर चयन करने का अधिकार होना चाहिए ? या वह बस सिर्फ कैरेक्टर्स की विश्लेषण करें । खैर अब जैसा भी हो । 3 इश्क और 6 किताबें लिखने के बाद जब अपनी फैमिली , 24 दोस्त और अपने ग्रेजुएशन के विभाग के सुप्रीमो से ज्यादा किसी और का अटेंशन नहीं मिला तो । मैंने खुद को वक़्त के मुताबिक हर एक साँचे मे ढालने के लिये यह कहानी सोचा और लिख डाला । अब मेरे पसंद का शहर होगा , मेरे ओरिजिनल माँ पापा काफी किफायती और मस्त हैं बाकी कहनी के हिसाब से मुझे कुछ बदलना पड़े हैं , तो माफी उनसे अभी से मांग लेता हूँ . अच्छी बात यह है कि इस कहानी में मेरे पसंद की लड़की होगी , आग लगें पूरे दुनिया के नाबरे को इस लड़की में मेरे हिसाब से नखरे होंगे और मेरे पसंद का इतना आशा करता हूँ मेरी यह फ़िवशन कहानी आपको रियल लगे । आपको सबको में प्रस्तुत करता है ।
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners