भगवान् श्री कृष्ण और भोलेनाथ के भक्तों को आचार्य श्री राजिंदर कुमार सूर्यवंशी की ओर से तन और मन से आप सभी को मेरा आशीर्वाद। इस कथा का प्रामाणिक ग्रंथों से कोई लेना देना नहीं है। यह सतयुग से जुड़ी कथा मुझे ध्यान योग द्वारा प्राप्त हुई है। इस पुस्तक में उसी का वर्णन है। मेरा ऐसा आश्वासन है कि मैं इस पुस्तक के माध्यम से आपको ज्ञान के परे द्वार से सतयुग में ले जाने का प्रयास करूँगा। आपको केवल पढ़ते हुए इस पुस्तक पर ही ध्यान केंद्रित करना होगा। मेरा ऐसा विश्वास है कि यदि आपने अपना ध्यान इस पुस्तक की कथा पर केंद्रित किया तो आपको भगवान् शिव के दर्शन ज़रूर प्राप्त होंगे।