यात्रा साहित्य की जननी होती है , संस्मरण और यात्रा वृतांत तो सीधे तौर पर यात्राओ का शब्द चित्रण ही हैं . जब पाठक प्रवाहमयी वर्णन शैली में यात्रा वृतांत पढ़ते हैं तो वे लेखक के साथ साथ उस स्थल की यात्रा का आनंद बिना वहां गये ले सकते हैं जहां का वर्णन किया जाता है . यदि ट्रेवलाग से पाठक की जिज्ञासायें शांत होती हैं तो लेखन सार्थक होता है . यात्रा संस्मरण भौगोलिक दूरियों को कम कर देते हैं . यात्रा संस्मरण एक तरह से समय के ऐतिहासिक साक्ष्य दस्तावेज बन जाते हैं .
प्रायः जब सीमित समय के लिये कोई टूरिस्ट के रूप में विदेश यात्रा पर जाता है तो कम समय में ज्यादा से ज्यादा देख लेने के प्रयास के चलते छोटी छोटी बातें समझे जाने से उपेक्षित रह जाती हैं . रोजमर्रा के ढ़ेर से अनछुये मुद्दों पर इस किताब मे लिखा गया है . आज जब युवा रोजगार और शिक्षा के लिये लगातार भारत से अमेरिका जा रहे हैं , तब यह किताब ऐसे युवाओ को और उनके पास जाते माता पिता रिश्तेदारों को अमेरिकन जीवन शैली को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकेंगे . इस डायरी से अमेरिका के संदर्भ में हिन्दी पाठको का किंचित कौतुहल शांत हो सका तो अच्छा लगेगा .
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