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KHALI JEB BADA SAPNA / खाली जेब, बड़ा सपना “गरीबी से नहीं, सोच से बड़ी बनती है ज़िंदगी”

Author Name: DHIRENDRA SINGH BISHT | Format: Paperback | Genre : Young Adult Fiction | Other Details

“खाली जेब, बड़ा सपना” एक सच्ची प्रेरणादायक कहानी है, अरुण की, जो एक छोटे से गाँव में गरीबी में पला-बढ़ा लेकिन उसके सीने में देश के सबसे कठिन परीक्षा UPSC को पास करने का सपना था।

ना कोचिंग थी, ना पैसे, और ना ही कोई बड़ा नाम, लेकिन था तो एक जिद और विश्वास कि बदलाव संभव है।

यह कहानी केवल सफलता की नहीं है,
बल्कि उन अनकही तकलीफ़ों की है,
जो हर उस युवा ने सही हैं जिसने अपने हालात से लड़कर एक मुकाम पाया है।

कहानी में संघर्ष है, छल भी है,
लेकिन सबसे ज़्यादा है — उम्मीद और हिम्मत की ताक़त।

अरुण की यह यात्रा लाखों युवाओं को यह विश्वास दिलाती है कि
सपने संसाधनों से नहीं, सोच और संकल्प से पूरे होते हैं।

यह पुस्तक विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों, सिविल सेवा अभ्यर्थियों और उन सभी के लिए है जो मानते हैं कि
जहाँ से कोई उम्मीद नहीं होती — वहीं से सबसे बड़ी कहानियाँ शुरू होती हैं।

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धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

धीरेन्द्र सिंह बिष्ट एक संवेदनशील, विचारशील और प्रभावशाली लेखक हैं, जो अपनी लेखनी के माध्यम से आम जीवन की असाधारण संवेदनाओं को गहराई से उकेरते हैं। उत्तराखंड की शांत वादियों से आने वाले धीर, अपनी कहानियों में पहाड़ों की सादगी, रिश्तों की खामोशी, और आत्मा की अनकही पुकार को बेहद सहजता से प्रस्तुत करते हैं।

उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं:

“काठगोदाम की गर्मियाँ”
“फोकटिया”
“मन की हार, ज़िंदगी की जीत”
“अग्निपथ”
“जब पहाड़ रो पड़े”
“बर्फ़ के पीछे कोई था?”
“जब पहाड़ रो पड़े” एक मार्मिक कथा-संग्रह है, जिसमें उत्तराखंड के ग्रामीण जीवन, विस्थापन और प्रकृति से कटते संबंधों की पीड़ा को लेखक ने बेहद सच्चाई से दर्शाया है।
वहीं “बर्फ़ के पीछे कोई था?” एक मनोवैज्ञानिक और रहस्यात्मक कहानी है, जो रिश्तों, भय और आत्मखोज के इर्द-गिर्द घूमती है — यह उनकी शैली का एक नया और परिपक्व विस्तार है।

धीरेन्द्र का लेखन समाज के उन वर्गों की आवाज़ बनता है, जो अक्सर हाशिए पर रह जाते हैं — वे चरित्र जो आम हैं, लेकिन जिनके अनुभव असाधारण हैं। उनका मानना है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, आत्मबोध और चेतना का माध्यम होना चाहिए।

वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन के साथ-साथ युवाओं को साहित्य, आत्मविकास और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने के लिए कार्यरत हैं।

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