टीनएजर शीना की मम्मी रोमा तिहाड़ जेल में सज़ा काट रही हैं। ऐसा क्या हुआ, जो रोमा की लव स्टोरी एक क्राइम थ्रिलर बनकर रह गई? शीना खोलेगी अपनी डायरी के वे पन्ने, जो आपको ले जाएंगे रोमा और कंवलजीत की धमाकेदार लेकिन ख़ूनी प्रेम कहानी के सफ़र पर।
जयंती रंगनाथन लगभग तीन दशकों से मीडिया और लेखन में सक्रिय हैं। मुंबई में ‘धर्मयुग’ और ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविज़न’ में काम करने के बाद दिल्ली में ‘वनिता’ पत्रिका की संपादक। ‘अमर उजाला’ में फ़ीचर संपादक और अब ‘हिन्दुस्तान’ अख़बार में एक्ज़िक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत। पांच उपन्यास — ‘आस-पास से गुज़रते हुए’, ‘खानाबदोश ख़्वाहिशें’, ‘औरतें रोती नहीं’, ‘एफ़ओ ज़िंदगी’ और ‘शैडो।’ दो कहानी संग्रह – ‘एक लड़की दस मुखौटे’ और ‘गीली छतरी।’ पहला फ़ेसबुक नॉवेल – ‘30 शेड्स ऑफ़ बेला।’ संस्मरणात्मक उपन्यास – ‘बॉम्बे मेरी जान।’ संपादन – ‘कामुकता का उत्सव’ और ‘रेड लाइट एरिया।’ सीरियल लेखन, पटकथा लेखन, ऑडियो बुक लेखन, पॉडकास्टर उपन्यास और लेखन पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से पांच एमफ़िल और तीन पीएचडी। मीडिया और लेखन के लिए विविध पुरस्कार और मान्यताएं।