भाषा के मुख्य रूप से चार अंग हैं- वर्ण, शब्द, पद और वाक्य । भाषा की उस छोटी ध्वनि (इकाई) को वर्ण कहा जाता है, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते । इसमें वर्णमाला, वर्णों के भेद, उनके उच्चारण, प्रयोग तथा संधि पर विचार किया जाता है। शब्द विचार में शब्द-रचना, उनके भेद, शब्द-सम्पदा तथा उनके प्रयोग आदि पर विचार किया जाता है । पद विचार में पद-भेद, पद-रूपांतर तथा उनके प्रयोग आदि पर समीक्षा होती है । कई शब्दों के मेल से वाक्य बनते हैं, ये शब्द या पद मिलकर किसी अर्थ का ज्ञान कराते हैं - यह वाक्य विचार है । व्याकरण में इन सारी बातों पर चर्चा होती है । यहाँ हिंदी के सभी व्याकरण के विभागों पर ईमानदारी से चर्चा करने का प्रयास किया गया है । इस पुस्तक में संपूर्ण व्याकरण को हिंदी की प्रकृति, प्रवृत्ति और प्रयोग के अनुरूप, छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित कर सुगम-सुबोध शैली में प्रस्तुत किया गया है । व्याकरण विषय के अलावा पत्र-व्यवहार, अनुवाद आदि छात्रोपयोगी विषयों को शामिल किया गया है ।