"कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, और कुछ... एक भयानक सौदे का हिस्सा बन जाते हैं।"
विवेक मासूम है, लेकिन दुनिया उसके लिए नहीं। उसके पिता, श्री राम जी, एक सम्मानित नेता हैं—बाहर से आदर्श, भीतर से छल-कपट से भरे। सत्ता की भूख ने उन्हें निर्दयी बना दिया है। उनकी राजनीति का दंश न केवल उनके परिवार बल्कि एक मासूम लड़की की जिंदगी को भी निगल रहा है।
माँ इस कलंक से बचने के लिए संघर्ष कर रही है, विवेक अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में है, और वह लड़की... उसकी जिंदगी एक राजनीतिक सौदे में बदल दी गई है। क्या विवेक अपने पिता की छवि से अलग अपनी राह बना पाएगा? क्या माँ इस अंधकार से बाहर आ पाएगी? और वह लड़की—जिसका सब कुछ छीन लिया गया—क्या उसे कभी इंसाफ मिलेगा?
हर पन्ना एक नया रहस्य खोलेगा, हर मोड़ पर सच्चाई का खौफनाक चेहरा मिलेगा। यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि एक त्रासदी है, जो आपको भीतर तक झकझोर देगी।