हिन्दुस्तान की गौरवगाथा
भारत की इस धरती को हम भारतवासी माँ मानकर पूजते हैं, जब हमारी माँ गुलामी की जंजीरों में कैद थी तब देश के कुछ वीर सपूतों ने अपनी जान की परवाह किये बिना अपनी माँ को आजादी के तिरंगे की चोली पहनाई तभी तो ये स्वतंत्रता दिवस हमारी इस आर्यवत की धरा पर महज एक कौम का नही, अपितु संपूर्ण भारत का त्यौहार है जिसे हर भारत वासी बिना भेदभाव के पूर्ण निष्ठा और हर्षोल्लास के साथ मनाता है।
15 अगस्त 1947 में 90 साल बाद जब भारत एक लोकतांत्रिक स्वतंत्र राष्ट्र बना, तब से पूरा हिंदुस्तान अपने अपने तौर तरीकों से इस पावन पर्व को मनाता आया है कहीं तिरंगा लहराकर, तो कही आजादी के गीतों से सजे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपना उत्साह दिखाकर, तो इस स्वतंत्रता दिवस हम कवि गण ने भी ये सोचा कि इस बार जश्न हम भी अपने तरीके से मनायेंगे तो इसी राह में कुछ कदम आगे बढ़ाकर भारत के भिन्न भिन्न प्रांतों के कुछ कवियों ने प्रस्तुत की हैं अपनी भावनाएं इस सारगर्भित संकलन के रूप में, आशा है पाठकों को हमारा ये प्रयास पसंद आये और हम भी आजादी के पर्व में अपनी सहभागिता सलग्न कर पाएं।