यह पुस्तक वामपंथी इतिहासकारों द्वारा रचाए गए उन सभी षड्यंत्रों का गहन विश्लेषण करती है, जिन्होंने भारतीय महिलाओं को उत्पीड़ित के रूप में चित्रित करने और सनातन धर्म की नींव को कमजोर करने का प्रयास किया। इस पुस्तक में लेखक अपने तर्कों से उन सभी दावों का खंडन करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह पुस्तक विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा भारतीय इतिहास को विक्षिप्त करना और अपने स्वयं के इतिहास को आगे बढ़ाने के लिए भाषा और शब्दों के हेर-फेर पर प्रकाश डालती है। इस पुस्तक में लेखक ऐतिहासिक अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ और आख्यानों के सुनियोजित परिवर्तन पर विभिन्न तथ्य प्रस्तुत करके प्रकाश डालते हैं जिससे पाठकों को इन दावों का गंभीर रूप से मूल्यांकन करने का अवसर मिलता है। यह समृद्ध भारतीय संस्कृति की सभ्यता को भी दर्शाती है जहाँ प्रत्येक स्त्री का सम्मान किया जाता था। अतः यह पुस्तक भारतीय संस्कृति में स्थित उन सभी कुप्रथाओं को सिरे से खारिज करती है जिन्हें सनातन धर्म को धूमिल करने के उद्देश्य से भारत के लोगों पर थोपा गया था।