“सीता और वान्या : सखित्व की अनकही अंतर्कथा” उपन्यास रामकथा के एक काल्पनिक पात्र वान्या, (जो सीता की सखी है) की दृष्टि से रचित यह एक भावप्रधान अंतर्कथा है। वान्या का बचपन सीता के साथ मिथिला में बीता है| सीता के विवाह के बाद संयोगवश वान्या का विवाह भी जनकपुरी में होता है और दोंनो की विदाई भी एक साथ होती है| मिथिला से अयोध्या और फिर वनवास तक की यात्रा में वह सखी सीता के धैर्य, करुणा,संवेदना और स्त्री-अनुभवों की साक्षी बनती है। यह कृति पौराणिक कथा के अंतरालों में छिपे मनोभावों को प्रकट करती है जिसमें कहीं सीता की स्मित मुस्कान को तो कहीं मौन व्यथा को अभिव्यक्त किया गया है| वान्या कथा की नायिका नहीं है परंतु सीता की छाया है, जो जीवन की विभिन्न घटनाओं के संदर्भ में सीता के हृदय के भावों को देखती और संजोती है।