ऊर्जा संरक्षण (एनर्जी कंजर्वेशन) –
ऊर्जा संरक्षण का विचार प्राय: यह नहीं है कि आवश्यकता में कमी की जावे, और न उपयोगिता को कम किया जावे । सामान्यत: ऊर्जा संरक्षण का विचार किसी भी तरीके से ऊर्जा के दुरुपयोग को रोकना, ऊर्जा बर्वाद न करना है ।
अक्षय ऊर्जा – नवकरणीय ऊर्जा (रिनुएबिल एनर्जी) उद्देश्य –
• ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोत (अक्षय स्रोत) के बारे में जानना, दैनिक उपयोग में लाना, ऊर्जा का बेहतर उपयोग करना, व्यर्थ दुरुपयोग, जहां हो रोकना, ऊर्जा संरक्षण करना ।
• इसमें मुख्यत: सूर्य ऊर्जा, जल ऊर्जा (जल प्रपात), पवन ऊर्जा, कृषि एवं जानवरों के अपशिष्ट (वेस्ट), जैविक खाद (बायोमास), गोबर गैस, ज्वारीय ऊर्जा, भूमि उष्मीय ऊर्जा, लहर ऊर्जा, स्रोत आदि गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं ।
ऊर्जा बचत - ऊर्जा बचत के लिए नागरिकों/उपभोक्ताओं को सीधे सरल / उपाय एवं नियम बरतने हैं, इन उपायों को अपने घरों, दफ्तरों, कारखानों और खेतों - खलिहानों में बड़ी आसानी से व्यवहार में अपनाया जा सकता है ।
ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता है : -
• तेजी से समाप्त हो रहे ऊर्जा संसाधनों की बचत के लिए ।
• ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए ।
• कुछ महत्वपूर्णआवश्यक उद्योगों में उत्पादन लागत में कमी करने के लिए, ताकि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सके ।
• पर्यावरण के गिरते हुए स्तर एवं प्रदूषण पर अंकुशरोक लगाने के लिए ।
• ऊर्जा की मांग एवं पूर्ति के मध्य अन्तर कम करने के लिए ।
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