कहते हैं की जिंदगी एक समुन्द्र के समान है जिसमे हम अपनी कश्ती का संचालन बराबर करते रहते है। कई ऐसे पल आते हैं जो हमें हसाते है तो कई सारे पल हमें बहुत रुलाते है। लेकिन उन लम्हों का क्या जब कोई छोटी सी बात भी हमें पहाड़ जितनी बड़ी लगी हो या बड़ी से बड़ी बातें तिनके के समान महसूस हुई हो। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है? यदी हाँ, तो ऐसी परिस्थितियों में आपने क्या किया? क्या आपके मन में उलझने आई? “ये कैसी उलझन” भी आपको ऐसी ही पात्र और परिस्थितियों से रूबरू करेगा जहाँ हर किसी के मन में कुछ उलझनें तो आई मगर उसका जवाब उन्हें आने वाले वक़्त ने बखुबी दिया।
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