पुस्तक के बारे में
हिमाचल प्रदेश भारत के भौगोलिक मानचित्र पर जहां एक ओर अपने अनुपम सौदर्य के कारण जाना जाता है, सांस्कृतिक मानचित्र पर जहां अलग और उच्च्तम सांस्कृतिक परंपराओं का समवाहक रहा ह,ै वहीं पर ये क्षेत्र धार्मिक मानचित्र पर अपने विभिन्न प्रकार के धार्मिक विश्वास के कारण जाना जाता है। एक ओर जहां देवी-देवता लोगों के मित्र और रिश्तेदारों की भांति ही लोक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं पर जीवन के हर अच्छे कृत्य में ये देवी -देवता ढाल बनकर लोगों के खडे माने जाते हैं। यही नहीं कई बार इनके प्रति उदासीनता और उपेक्षा की भावना से मनुष्य सजा का भी पात्र बन गया माना जाता है। यही भावना एक नहीं हर क्षेत्र में विद्यमान है। फिर चाहे वह लाहौल स्पीति, चंबा और किन्नौर के दुर्गम क्षेत्र हों या फिर कांगडा, मंडी, बिलासपुर और सोलन या शिमला, सिरमौर की घाटियां या मैदानी भाग हों। यह पुस्तक हिमाचल, विशेषकर जिला सोलन के ऐसे ही परंपराओं और पूजा पद्वतियों पर प्रकाश डालती है, जो अति प्राचीन काल से लेकर यहां के लोगों के मनोभावों के केंद्र बिन्दू रहे हैं। यही नहीं यह विश्वास और परंपराएं भले ही बहुत ज्यादा प्रकाश में नहीं आ सकीं लेकिन फिर भी लोगों की इन परंपराओं में गहन आस्था है। प्रस्तुत पुस्तक में लेखिका ने सिर्फ समाज में परंपरागत तथ्यों को ही उजागर किया है एवं किसी भी रूप में लंेखिका इन्हें मानने या न मानने के लिये प्रोत्साहित नहीं करती है। हां इतना अवश्य है कि इनमें से बहुत सी परंपरायें महज लोक वेद पर ही आधारित हैं। यदि लोग अपने शास्त्रों को आधार बनाकर इन्हें जारी रखें तो ये बहुत ही सकारात्मक परिणाम दे सकती हैं।