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Karma Vigyan / कर्म विज्ञान

Author Name: Pavan Pathak | Format: Paperback | Genre : BODY, MIND & SPIRIT | Other Details

इस पुस्‍तक में कर्म के ऊर्जा के स्‍वरूप एवं शक्ति की विवेचना की गई है।

            कर्म ऊर्जा का ही स्‍वरूप है। कर्म के माध्‍यम से प्रारब्‍ध, संस्‍कार, संस्‍कृति  एवं स्‍वध्‍याय के विभिन्‍न अव्‍यवों की गति को परिवर्तित कर जीवन की प्रत्‍यक्ष एवं प्रारब्‍ध से उत्‍पन्‍न विभिन्‍न समस्‍याओं के निदान एवं कारण का विशलेषण किया गया है।

Ø  प्रत्‍येक कर्म की अपनी परिणति होती है और वह जीव को जीव के माध्‍यम से जीवन में सर्वोत्‍तम समय में प्रकृति प्रदान करती है।

Ø  कर्म एवं कर्मफल का स्‍वरूप जीवन में ऊर्जा के रूप में ही रहता हैा 

Ø  कर्म कभी मरता नहीं है वह ऊर्जा के रूप में जीवन में बना रहता है ।

Ø  प्रत्‍येक कर्म की निजी परिपक्‍वता अवधि होती है जो पूर्ण होते ही स्‍वत: ही कर्मफल के रूप में प्रकट हो जाती है।

Ø  परिणाम जीवन में बहुत आवश्‍यक नहीं है किस विधा से परिणाम प्राप्‍त किया गया वही कर्म बंधन बन जाता है।

Ø  जीव की आत्‍म संग्रहित ऊर्जा ही प्रारब्‍ध है।

Ø  सामान्‍य रहें, सरल रहे, स्‍वास्‍थ्‍य रहें, ज्‍यादा जिये।

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पवन पाठक

बचपन में प्रकृति की नजदीकियों के मूक संवाद ने जीवन को नयी दिशा दी। मन जीवन के अनसुलझे प्रश्‍नों के उत्‍तर खोजता ही रहा। संसार परिवार एवं समाज की कठिन समस्‍याओं ने गीता, रामायण एवं संतो के पास भी भेजा, कुछ ज्ञान मिला। लेकिन सच्‍चा ज्ञान अस्‍पताल, दुखी, असहाय जीवों एवं जीवन की जगह-जगह हार ने मन को मथा तब स्‍वत: ही ज्ञान उपजा और उसने बाध्‍य‍ किया पुस्‍तक (कर्म विज्ञान) लिखने के लिये।

भारत हैवी इलैक्ट्रिकल, लि‍मि० झाँसी में वरिष्ठ प्रबन्धक के पद से सेवानिवृत्‍त होने के बाद जीवन को संसार से अलग कर जीवन को देखने का समय मिला। परिवार, समाज एवं संसार में कर्म/ ऊर्जा और उसको रूपांतरित होते देखा।

प्रारब्‍ध, संस्‍कृति, संस्‍कार पर कर्म ऊर्जा का प्रत्‍यक्ष एवं परोक्ष प्रभाव से उत्‍पन्‍न कर्मफल ने जीवन को झकझोरा, तब समझ आया कि सरल जीवन के जीवन प्रश्‍न बडे सरल होते है जो कि जीवन में  सरलता से हल हो जाते है। लेकिन कठिन जीवन के जीवन प्रश्‍न बडे कठिन।

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